कोटा को टक्कर दे रहा है पटना: 15 हजार करोड़ का हुआ बिहार का कोचिंग उद्योग, खान सर-रोशन आनंद विवाद के बीच समझें पूरा गणित

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BNT Desk: एक समय था जब देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी का मतलब सिर्फ राजस्थान का ‘कोटा’ हुआ करता था। लेकिन पिछले एक दशक में बिहार की राजधानी पटना ने इस मामले में देश का ध्यान खींचा है। आज पटना पूर्वी भारत का सबसे बड़ा एजुकेशन हब बन चुका है। बिहार के गांवों-कस्बों के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के छात्र भी अब पटना का रुख कर रहे हैं।

हाल ही में चर्चित शिक्षक खान सर (खान ग्लोबल स्टडीज) और ज्ञानबिंदु संस्थान के निदेशक रोशन आनंद के बीच हुए विवाद ने इस इंडस्ट्री के एक अलग पहलू को सामने ला दिया है। यह विवाद सिर्फ दो शिक्षकों की लड़ाई नहीं, बल्कि वर्चस्व और हजारों करोड़ रुपये के कोचिंग बाजार के कॉम्पिटिशन की कहानी कहता है।

कितनी बड़ी है पटना की कोचिंग इकॉनमी?

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक, पटना का कोचिंग उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 15,000 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार को प्रभावित करता है।

  • संस्थानों का जाल: बिहार में इस समय लगभग 6,383 कोचिंग संस्थान सक्रिय हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 1,256 संस्थान अकेले पटना में हैं।

  • छात्रों की संख्या: हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से करीब 2 लाख छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं (UPSC, BPSC, SSC, Railway, NEET, JEE) की तैयारी के लिए यहाँ आते हैं।

  • प्रमुख इलाके: मुसल्लाहपुर हाट, कंकड़बाग, बोरिंग रोड और राजेंद्र नगर जैसे इलाके पूरी तरह ‘स्टूडेंट जोन’ में तब्दील हो चुके हैं।

 

रियल एस्टेट, हॉस्टल और पीजी: चमक गई मकान मालिकों की किस्मत

छात्रों की इस भारी भीड़ ने पटना के रियल एस्टेट और हॉस्टल बिजनेस की तस्वीर बदल दी है। पिछले 10 वर्षों में कोचिंग वाले इलाकों में जमीन और मकानों की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ चुकी हैं।

  • किराये में भारी उछाल: बोरिंग रोड के हॉस्टल संचालकों के अनुसार, जहां पहले 3 BHK फ्लैट का किराया 20 हजार रुपये था, वह आज बढ़कर 40 हजार रुपये हो चुका है।

  • हॉस्टल का खर्च: पटना में छात्रों के लिए सुविधाओं के आधार पर हॉस्टल का मासिक किराया 6,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये तक है। सीमित बजट वाले छात्र एक ही कमरे में तीन-तीन लोग रहकर बिजली बिल अलग से चुकाते हैं।

 

कोरोना के बाद ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन की चुनौती

पटना के पुराने संस्थानों जैसे ‘गोल इंस्टीट्यूट’ का कहना है कि वे हर साल 6 से 7 हजार छात्रों को पढ़ाते हैं, जहां सालाना फीस 80 हजार से 1.70 लाख रुपये तक होती है। हालांकि, ‘विजन क्लासेज’ जैसे संस्थानों के संचालकों का मानना है कि कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन पढ़ाई का चलन बढ़ा है, जिससे पारंपरिक ऑफलाइन क्लास में बच्चों की संख्या पहले से थोड़ी कम हुई है। अब संस्थान खुद को डिजिटल मॉडल में ढाल रहे हैं।

कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने के लिए आएगा नया कानून

कोचिंग इंडस्ट्री के इस बेतरतीब विस्तार और हालिया विवादों को देखते हुए बिहार सरकार अब इसे नियंत्रित करने के मूड में है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने संकेत दिया है कि सरकार जल्द ही एक कड़ा ‘कोचिंग रेगुलेशन एक्ट’ प्रभावी करने जा रही है।

प्रस्तावित नियमावली की मुख्य बातें:

  • अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: 25 से अधिक छात्रों को पढ़ाने वाले हर कोचिंग संस्थान के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।

  • भारी जुर्माना: बिना रजिस्ट्रेशन कोचिंग चलाने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना और नियमों के उल्लंघन पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना व रजिस्ट्रेशन रद्द होने की कार्रवाई हो सकती है।

  • पुलिस वेरिफिकेशन: सुरक्षा के लिहाज से सभी कोचिंग संचालकों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना होगा।

  • अन्य सुविधाएं: भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगेगी और छात्रों के लिए फीस वापसी (Fee Refund) की पारदर्शी व्यवस्था की जाएगी।

 

जिम्मेदारी के साथ बढ़ेगा बाजार

पटना का कोचिंग उद्योग आज सिर्फ शिक्षा नहीं दे रहा, बल्कि ऑटो चालकों, किताब दुकानदारों, लॉज मालिकों और टिफिन सर्विस चलाने वालों को रोजगार भी दे रहा है। खान सर और रोशन आनंद जैसे विवादों से छात्रों की पढ़ाई और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। यदि सरकार और संस्थान मिलकर सुरक्षा, वाजिब फीस और बेहतर माहौल सुनिश्चित करें, तो पटना आने वाले समय में देश का सबसे सुरक्षित और बड़ा ज्ञान का केंद्र बन सकता है।

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