बिहार: MLC चुनाव में NDA के 9 और RJD से सुनील सिंह ने किया नामांकन, मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की राजनीति में इस समय विधान परिषद (MLC) की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भारी हलचल है। इन 10 सीटों (जिसमें एक सीट पर उपचुनाव शामिल है) के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी 9 उम्मीदवारों ने विधानसभा पहुंचकर अपना-अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। पर्चा भरने के बाद एनडीए के तमाम बड़े नेताओं और उम्मीदवारों ने एकजुटता दिखाते हुए विधानसभा पोर्टिको में ‘विक्ट्री साइन’ (जीत का भरोसा) बनाया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी विधानसभा पहुंचे, जो राजनीति से दूर रहने के बावजूद इस खास मौके पर मौजूद रहे। दूसरी तरफ, विपक्षी महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के दिग्गज नेता सुनील सिंह ने अपना नामांकन दाखिल किया है। हालांकि, सुनील सिंह के नाम को लेकर आरजेडी के भीतर ही कलह शुरू हो गई है।

रोहिणी आचार्य ने सुनील सिंह की उम्मीदवारी पर उठाए सवाल

आरजेडी उम्मीदवार सुनील सिंह के नामांकन दाखिल करते ही लालू प्रसाद यादव के परिवार और पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर सुनील सिंह की उम्मीदवारी को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। रोहिणी ने सीधे तौर पर अपने भाई और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के फैसले पर निशाना साधा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि रोहिणी इस फैसले से खुश नहीं हैं, जिससे चुनाव के ठीक पहले महागठबंधन के भीतर की गुटबाजी उजागर हो गई है।

NDA का सीट शेयरिंग फॉर्मूला: किसे मिलीं कितनी सीटें?

एनडीए ने इस चुनाव में बहुत ही सधे हुए तरीके से टिकटों का बंटवारा किया है। 9 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा इस प्रकार की गई है:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 4 उम्मीदवार (नामांकन के समय बीजेपी के वरिष्ठ नेता संजय मयूख विक्ट्री साइन दिखाते नजर आए)।

  • जनता दल यूनाइटेड (JDU): 4 उम्मीदवार (जदयू की ओर से भारती मेहता ने भी अपना पर्चा दाखिल किया)।

  • लोक जनशक्ति पार्टी-रामविलास (LJP-R): 1 उम्मीदवार (चिराग पासवान की पार्टी ने अपने कोटे से एक प्रत्याशी उतारा है)।

 

दीपक प्रकाश का पत्ता कटा: फेसबुक बायो से हटाया ‘मंत्री’ और मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

इस चुनाव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश से जुड़ी है। दीपक प्रकाश को एनडीए की ओर से एमएलसी का टिकट नहीं मिला है। टिकट कटने से नाराज दीपक प्रकाश, जो वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, उन्होंने तुरंत अपने फेसबुक अकाउंट के बायो (Bio) से ‘मंत्री’ शब्द हटा दिया।

इस बीच, दीपक प्रकाश को फिर से मंत्री बनाए जाने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर दी गई है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 164(4) का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य (MLC) रहे 6 महीने की अवधि बीत जाने के बाद दोबारा मंत्री पद की शपथ कैसे ले सकता है?

क्या है दीपक प्रकाश का मामला?

दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को नीतीश सरकार में मंत्री बने थे। बिना किसी सदन का सदस्य बने उनके 6 महीने की अवधि मई 2026 में पूरी हो रही थी। लेकिन, 7 मई 2026 को बिहार में बनी सम्राट चौधरी सरकार (सम्राट सरकार) के कैबिनेट विस्तार में उन्होंने दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ले ली। इसी तकनीकी और संवैधानिक पहलू को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

18 जून को वोटिंग, जानिए क्या है फॉर्मूला

बिहार विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो एनडीए का पलड़ा बेहद भारी है। एनडीए के कुल 202 विधायक हैं। नियमों के मुताबिक, यदि सीटों से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में रहते हैं तो 18 जून 2026 को मतदान कराया जाएगा।

जीत का समीकरण इस प्रकार है:

  • 25 वोटों की जरूरत: 9 सीटों पर एक साथ चुनाव होने के कारण, किसी भी एक MLC प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए कम से कम 25 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी।

  • NDA की मजबूत स्थिति: विधानसभा में बीजेपी के पास 89, जेडीयू के पास 85, लोजपा (आर) के पास 19, आरएलएम के पास 4 और ‘हम’ (HAM) पार्टी के विधायक हैं। इस गणित के हिसाब से एनडीए अपने बलबूते 8 एमएलसी सीटों पर आसानी से जीत दर्ज कर लेगा।

  • महागठन के पास 1 सीट: बची हुई सीटों में से आंकड़ों के लिहाज से कम से कम एक सीट आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन के खाते में जानी तय है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी खेमा कोई नया दांव खेलता है या आरजेडी के भीतर की यह कलह वोटिंग के दिन कोई नया मोड़ लेती है।

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