BNT Desk: बिहार में पिछले करीब दो महीनों से राजस्व कार्यों को लेकर मची अफरा-तफरी अब खत्म होने जा रही है। 9 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन सामूहिक हड़ताल पर गए राज्य के अंचलाधिकारियों (CO) ने आखिरकार काम पर लौटने का फैसला किया है। ‘संयुक्त मोर्चा, बिहार राजस्व सेवा महासंघ’ ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे अपनी हड़ताल स्थगित कर रहे हैं। इस फैसले से उन लाखों लोगों को बड़ी राहत मिली है, जिनके दाखिल-खारिज, जाति-आवास प्रमाण पत्र और ज़मीन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कार्य अधर में लटके हुए थे।
क्यों लिया गया हड़ताल स्थगित करने का निर्णय?
संयुक्त मोर्चा द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह निर्णय मुख्य रूप से दो कारणों से लिया गया है:
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मुख्यमंत्री का आश्वासन: संगठन ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा दिए गए आश्वासन पर उन्हें पूरा भरोसा है। सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का सकारात्मक संकेत दिया है।
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व्यापक जनहित: हड़ताल के कारण राज्य का प्रशासनिक ढांचा और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। जनता की परेशानियों को सर्वोपरि रखते हुए महासंघ ने सामूहिक अवकाश खत्म करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया।
दफ्तरों में दोबारा शुरू होगा कामकाज
बयान में स्पष्ट रूप से तारीख का उल्लेख किया गया है। संयुक्त मोर्चा के सभी सदस्य और अंचलाधिकारी 04.05.2026 (4 मई 2026) को अपने-अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान करेंगे। यानी अगले सोमवार से अंचल कार्यालयों में लंबित फाइलों का निपटारा फिर से शुरू हो जाएगा। प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी अधिकारियों को कार्यस्थल पर पहुँचने का निर्देश दिया गया है।
सरकार के सामने रखी गई 11 सूत्री मांगें
अंचलाधिकारियों की यह लड़ाई उनके मान-सम्मान और सेवा शर्तों से जुड़ी है। संयुक्त मोर्चा को उम्मीद है कि बिहार सरकार अब उनके साथ किए गए वादे को निभाएगी। उनकी मुख्य मांगों में शामिल हैं:
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भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) पद से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना।
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कुल 11 सूत्री मांग-पत्र, जिसे पहले ही सरकार को सौंपा जा चुका है।
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राजस्व सेवा के अधिकारियों की सुरक्षा और कार्यशैली में सुधार।
मोर्चा ने साफ कहा है कि वे सरकार से समयबद्ध कार्रवाई (Time-bound Action) की उम्मीद कर रहे हैं ताकि बार-बार टकराव की स्थिति पैदा न हो।
2 महीने का अल्टीमेटम
अंचलाधिकारियों ने भले ही हड़ताल स्थगित कर दी है, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं माना जाना चाहिए। संयुक्त मोर्चा ने सरकार को 2 महीने की मोहलत दी है।
“अगर निर्धारित दो महीने की समयावधि के भीतर हमारी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संयुक्त मोर्चा फिर से सामूहिक अवकाश और हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होगा।” — महासंघ का बयान
यह अल्टीमेटम दर्शाता है कि अधिकारी फिलहाल सरकार को काम करने का मौका दे रहे हैं, लेकिन उनकी निगाहें अब सरकारी फाइलों की रफ्तार पर टिकी रहेंगी।
हड़ताल का प्रभाव: क्या कुछ हुआ बाधित?
9 मार्च से लेकर अब तक (लगभग 55 दिन) बिहार के राजस्व विभाग में काम पूरी तरह ठप रहा।
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दाखिल-खारिज (Mutation): लाखों आवेदन पेंडिंग हो गए।
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प्रमाण पत्र: छात्रों और नौकरी पेशा लोगों के लिए आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र बनने बंद हो गए थे।
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राजस्व वसूली: ज़मीन की रसीद और सरकारी लगान की वसूली पर भी बुरा असर पड़ा।
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कोर्ट केस: अंचल स्तर पर चलने वाले राजस्व मुकदमों की तारीखें बढ़ती रहीं।
अंचलाधिकारियों की काम पर वापसी बिहार के सुशासन के लिए एक सकारात्मक कदम है। राजस्व विभाग राज्य की अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अब गेंद सरकार के पाले में है। अगर 2 महीने के भीतर 11 सूत्री मांगों पर ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो यह विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। फिलहाल, 4 मई से जनता के रुके हुए काम होने की उम्मीद जाग गई है।