बिहार: 11 जिलों में बसेंगे आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप, किसानों की जमीन बनेगी ‘सोना’

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार को औद्योगिक और आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में सम्राट सरकार ने एक ऐतिहासिक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। राज्य के 11 प्रमुख शहरों में ‘ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप’ विकसित करने की योजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। इस महापरियोजना का मुख्य उद्देश्य न केवल शहरी भीड़भाड़ को कम करना है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना भी है।

इन टाउनशिप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये केवल रिहायशी इलाके न रहकर आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र (Economic Hubs) के रूप में उभरें।

पटना के पास बनेगी ‘फिनटेक और स्पोर्ट्स सिटी’

राजधानी पटना के आसपास विकसित होने वाली टाउनशिप भविष्य के बिहार की झलक पेश करेगी। सरकार का विजन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस करना है:

  • पुनपुन क्षेत्र: यहां एक अत्याधुनिक ‘खेल गांव’ (Sports City) और ‘ज्यूडिशियल एकेडमी’ बनाने का प्रस्ताव है।

  • फतुहा क्षेत्र: इस इलाके को ‘फिनटेक सिटी’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जो वित्तीय और तकनीकी स्टार्टअप्स का केंद्र होगा।

  • लॉजिस्टिक हब: व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बड़े लॉजिस्टिक पार्क भी इस योजना का हिस्सा हैं।

इन टाउनशिप को पटना रिंग रोड, पटना-गया-डोभी रोड और निर्माणाधीन आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे कनेक्टिविटी की कोई समस्या न रहे।

सोनपुर और सुल्तानगंज में प्रस्तावित नए एयरपोर्ट

परिवहन को रफ्तार देने के लिए सरकार हवाई संपर्क पर विशेष जोर दे रही है। योजना के मुताबिक:

  1. सोनपुर: यहां एक ‘ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट’ बनाने का प्रस्ताव है। आपको बता दें कि सोनपुर का कोर एरिया 2000 एकड़ के साथ राज्य में सबसे बड़ा है।

  2. सुल्तानगंज (भागलपुर): भागलपुर टाउनशिप की जरूरतों को देखते हुए सुल्तानगंज में नए एयरपोर्ट की योजना तैयार की गई है।

टाउनशिप का ढांचा: क्या और कहां बनेगा?

नगर विकास विभाग ने इस पूरी योजना को दो भागों में बांटा है— कोर एरिया (Core Area) और स्पेशल एरिया (Special Area)। पहले उन खाली जमीनों (कोर एरिया) पर काम शुरू होगा जहां अभी कोई निर्माण नहीं है, ताकि किसानों से जमीन लेने में आसानी हो।

जमीन के उपयोग का गणित:

नगर विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि टाउनशिप की जमीन का बंटवारा बेहद व्यवस्थित तरीके से होगा:

  • 55% हिस्सा: चौड़ी सड़कों और बुनियादी ढांचे (बिजली, पानी, ड्रेनेज) के लिए।

  • 15% हिस्सा: प्लानिंग अथॉरिटी के पास भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रहेगा।

  • 5% हिस्सा: पार्क और हरियाली के लिए समर्पित होगा।

  • 3% हिस्सा: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आवासों के लिए आरक्षित रहेगा।

आंकड़े जो हकीकत बयां करते हैं

क्षेत्रफल के मामले में पटना और सोनपुर सबसे आगे हैं।

  • स्पेशल एरिया: पटना का स्पेशल एरिया सबसे बड़ा है, जो 81,730 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है। इसके बाद सोनपुर (33,000 एकड़) और सहरसा (25,200 एकड़) का नंबर आता है।

  • कोर एरिया: सोनपुर 2000 एकड़ के साथ पहले, गया 1629 एकड़ के साथ दूसरे और दरभंगा 1600 एकड़ के साथ तीसरे स्थान पर है।

किसानों को कैसे होगा ‘बंपर’ फायदा?

अक्सर सरकारी योजनाओं में जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों में डर रहता है, लेकिन इस बार सरकार ने ‘लैंड पूलिंग’ जैसा मॉडल अपनाया है।

  1. डेवलप्ड प्लॉट की वापसी: किसानों से ली गई जमीन को विकसित करने के बाद, उसका 55% हिस्सा उन्हें वापस कर दिया जाएगा।

  2. सोने के भाव बिकेगी जमीन: आज जो जमीन महज एक खेती का टुकड़ा है, टाउनशिप विकसित होने के बाद वह एक प्रीमियम कमर्शियल या रेजिडेंशियल प्लॉट बन जाएगी।

  3. बुनियादी सुविधाएं: वापस मिलने वाले प्लॉट तक पक्की सड़क, बिजली, पानी और सीवरेज की सुविधा सरकार पहले ही बना चुकी होगी, जिससे उस जमीन की कीमत कई गुना बढ़ जाएगी।

आधुनिक और व्यवस्थित बिहार

बिहार कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब विभाग तेजी से काम कर रहा है। इन टाउनशिप में टूरिज्म कॉरिडोर और फिल्म सिटी विकसित करने पर भी विचार हो रहा है। ड्रेनेज सिस्टम, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट और आधुनिक पार्कों के साथ ये शहर बिहार के शहरीकरण की नई परिभाषा लिखेंगे।

यह योजना न केवल निवेश आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा करेगी। सम्राट सरकार का यह कदम बिहार के आर्थिक भूगोल को बदलने वाला साबित हो सकता है।

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