BNT Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव अपने अंतिम पड़ाव पर है और भाजपा के दिग्गज नेता वहां चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। चर्चा है कि 29 अप्रैल को बंगाल चुनाव के अंतिम चरण की वोटिंग संपन्न होते ही बिहार में सम्राट कैबिनेट का विस्तार कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी ‘यूथ ब्रिगेड’ के साथ बिहार को नई गति देने का खाका तैयार कर लिया है। पार्टी स्तर पर नामों का चयन (वर्कआउट) पूरा हो चुका है, बस केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलनी बाकी है।
कैबिनेट विस्तार का गणित
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार में इस बार युवाओं को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्रिमंडल के विस्तार में तीन प्रमुख स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
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जातीय प्रतिनिधित्व: पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और सवर्ण समुदायों को उचित स्थान देकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश है।
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क्षेत्रीय संतुलन: बिहार के अलग-अलग कोनों, जैसे कोसी, मगध, अंग और मिथिलांचल को कैबिनेट में जगह दी जाएगी।
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परफॉर्मेंस: पुराने चेहरों के अनुभव के साथ-साथ ‘परफॉर्मर’ युवाओं को जगह देने की तैयारी है।
विजय सिन्हा और संजय सरावगी
पार्टी के भीतर दो बड़े नामों—विजय सिन्हा और संजय सरावगी—को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
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विजय सिन्हा: पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखने वाले विजय सिन्हा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। चर्चा है कि उन्हें भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है या संगठन में किसी बड़े पद (जैसे प्रदेश अध्यक्ष) पर समायोजित किया जा सकता है।
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संजय सरावगी: वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की इच्छा भी सरकार में काम करने की है। अगले तीन साल तक राज्य में कोई बड़ा चुनाव नहीं है, ऐसे में वे मंत्रिमंडल में शामिल होकर विकास कार्यों में योगदान देना चाहते हैं।
इन नामों पर लग सकती है मुहर
सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी की टीम में निम्नलिखित नामों का शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है:
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अनुभवी चेहरे: मंगल पांडे, रामकृपाल यादव, नितिन नबीन और जनक राम।
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युवा और नए चेहरे: श्रेयसी सिंह (अंतरराष्ट्रीय शूटर और विधायक), नीतीश मिश्रा, लखेन्द्र पासवान और प्रमोद चंद्रवंशी।
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जातीय संतुलन वाले नाम: दिलीप जायसवाल, सुरेंद्र प्रसाद मेहता, रमा निषाद, और संजय सिंह ‘टाइगर’।
नीतीश मिश्रा और जनक राम
सूची में सबसे ऊपर नीतीश मिश्रा का नाम चर्चा में है। विदेश से शिक्षित और सौम्य छवि वाले नीतीश मिश्रा ने पहले उद्योग मंत्री के रूप में शानदार प्रदर्शन किया था। युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं, दलित समुदाय का बड़ा चेहरा जनक राम की वापसी भी तय मानी जा रही है। कोसी क्षेत्र से नीरज बबलू और निषाद समाज से हरि साहनी भी कतार में हैं।
नए चेहरों की एंट्री
सम्राट चौधरी अपनी टीम में फ्रेश टैलेंट लाना चाहते हैं। बिहपुर से तीन बार के विधायक इंजीनियर शैलेंद्र (भूमिहार जाति) भागलपुर क्षेत्र के मजबूत दावेदार हैं। वहीं, अरवल के विधायक मनोज शर्मा को भी जातीय संतुलन और सक्रियता के आधार पर जगह मिल सकती है।
भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा, “अभी नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं, जैसे ही वहां चुनाव संपन्न होगा, विस्तार को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”
राजनीतिक जानकारों का विश्लेषण
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि इस बार कैबिनेट का स्वरूप ‘ओल्ड गार्ड्स’ और ‘न्यू ब्लड’ का मिश्रण होगा। अगले एक सप्ताह के भीतर बिहार की सत्ता का नया स्वरूप सामने आ सकता है। सबसे बड़ी चुनौती विजय सिन्हा और संजय सरावगी जैसे कद्दावर नेताओं को सही भूमिका में फिट करने की होगी। चूंकि बिहार में विकास की गति तेज करनी है, इसलिए सम्राट चौधरी उन्हीं चेहरों पर दांव लगाएंगे जो त्वरित निर्णय लेने और जमीन पर काम करने में सक्षम हों।
29 अप्रैल के बाद बिहार में सियासी हलचल तेज होना निश्चित है। सम्राट चौधरी की यह नई टीम न केवल सरकार चलाएगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव (जो कि तीन साल बाद हैं) के लिए पार्टी की नींव को भी मजबूत करेगी। दिल्ली से लौटने वाले निर्देशों के साथ ही राजभवन में शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो सकती हैं।