बिहार: पटना हाईकोर्ट की अनुशंसा पर 8 जजों का तबादला, परिवार और निगरानी कोर्ट में नए चेहरों की एंट्री

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की न्यायिक व्यवस्था में कार्यकुशलता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हाईकोर्ट के महानिबंधक (Registrar General) की अनुशंसा पर राज्य के 8 वरिष्ठ न्यायाधीशों का स्थानांतरण और नई पदस्थापना (Transfer-Posting) की गई है। इस फेरबदल का सबसे बड़ा असर पटना के परिवार न्यायालय और निगरानी अदालत (Vigilance Court) पर पड़ेगा, जहाँ लंबे समय से कार्यरत न्यायाधीशों के स्थान पर नई नियुक्तियां की गई हैं।

पटना परिवार न्यायालय

पटना के सबसे व्यस्त अदालतों में से एक, परिवार न्यायालय (Family Court) के नेतृत्व में बदलाव किया गया है। यहाँ के वर्तमान प्रधान न्यायाधीश सुनील दत्त पांडे का स्थानांतरण कर दिया गया है। उन्हें अब सीतामढ़ी परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह पर अविनाश कुमार-2 को नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले अररिया परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के पद पर तैनात थे।

निगरानी और विशेष अदालतों में नई पोस्टिंग

भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए पटना और मुजफ्फरपुर की निगरानी अदालतों में भी नई नियुक्तियां हुई हैं:

POCSO और रेप कोर्ट

बच्चों के साथ होने वाले अपराधों और संवेदनशील मामलों की सुनवाई के लिए विशेष पोक्सो (POCSO) अदालतों में भी अनुभवी जजों को तैनात किया गया है:

  1. मनीष प्रकाश: समस्तीपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश मनीष प्रकाश को अब रेप एवं पोक्सो कोर्ट में पीठासीन पदाधिकारी के रूप में नई जिम्मेदारी दी गई है।

  2. राम प्रकाश यादव: सीतामढ़ी के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश राम प्रकाश यादव को भी रेप एवं पोक्सो के विशेष न्यायालय में पीठासीन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।

इन नियुक्तियों से उम्मीद की जा रही है कि जघन्य अपराधों से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

अररिया कोर्ट में प्रमोद कुमार यादव की नियुक्ति

स्थानांतरण की इस कड़ी में प्रमोद कुमार यादव का भी नाम शामिल है। पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश रहे प्रमोद कुमार यादव को अब पदोन्नति/नियुक्ति देते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोटि में शामिल किया गया है। उन्हें अररिया परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के पद पर पदस्थापित किया गया है।

हाईकोर्ट का प्रशासनिक निर्णय

न्यायिक क्षेत्र में समय-समय पर होने वाले ये तबादले प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखने का एक हिस्सा हैं। पटना हाईकोर्ट की ओर से यह कदम अदालतों में लंबित मामलों (Pending Cases) की संख्या कम करने और न्यायिक प्रक्रियाओं को गति देने के लिए उठाया गया है। विशेष रूप से निगरानी और पोक्सो कोर्ट जैसे संवेदनशील विभागों में नई तैनाती यह दर्शाती है कि हाईकोर्ट भ्रष्टाचार और यौन अपराधों जैसे मामलों में किसी भी प्रकार की देरी नहीं चाहता।

न्याय प्रक्रिया में आएगी नई ऊर्जा

पटना हाईकोर्ट की अनुशंसा पर हुए इन तबादलों से राज्य की निचली अदालतों की कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिलेगा। जहाँ एक तरफ अनुभवी जजों को निगरानी और विशेष अदालतों की कमान दी गई है, वहीं दूसरी ओर परिवार न्यायालयों में भी फेरबदल कर नई कार्यशैली को प्रोत्साहित किया गया है। इन जजों के कार्यभार संभालते ही कई महत्वपूर्ण और लंबित मामलों की सुनवाई में नई तेजी आने की पूरी संभावना है।

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