नालंदा: मघड़ा शीतलाष्टमी मेले में भगदड़, 8 महिलाओं की मौत, कई घायल

BNT
By
4 Min Read

BNT Desk: बिहार के नालंदा जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। बिहारशरीफ से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित मघड़ा गांव के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में मंगलवार सुबह भगदड़ मचने से 8 महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई है। चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार और शीतलाष्टमी के पावन अवसर पर माता के दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ इस हादसे का कारण बनी।

कैसे हुआ हादसा?

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (शीतला अष्टमी) को मघड़ा मंदिर में मुख्य पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन माता को ‘बासी’ (एक दिन पहले बना ठंडा भोजन) का भोग लगाया जाता है। इसी परंपरा को निभाने के लिए सोमवार रात से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटने लगे थे।

मंगलवार की सुबह जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, भक्तों के बीच माता के दर्शन की होड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कतारों में दबाव इतना बढ़ गया कि बैरिकेडिंग के पास मौजूद महिलाएं एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगीं। देखते ही देखते वहां चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।

मृतकों और घायलों का विवरण

इस दुखद घटना में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें सभी महिलाएं शामिल हैं। फिलहाल 6 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें तुरंत मॉडल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन ने अब तक कुछ मृतकों की पहचान साझा की है:

  1. रीता देवी (50 वर्ष): पति दिनेश रजक, निवासी सकुन्त बिहार।

  2. रेखा देवी (45 वर्ष): पति कमलेश प्रसाद, निवासी मथुरापुर नूरसराय।

बाकी मृतकों की पहचान के प्रयास जारी हैं। अस्पताल और मंदिर परिसर में परिजनों की भारी भीड़ जमा है और माहौल गमगीन बना हुआ है।

शीतलाष्टमी की परंपरा और मघड़ा मंदिर का महत्व

मघड़ा का शीतला माता मंदिर नालंदा ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में आस्था का बड़ा केंद्र है। शीतला अष्टमी के दिन यहाँ एक विशेष परंपरा निभाई जाती है:

  • चूल्हा न जलाना: मान्यता है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। श्रद्धालु एक दिन पहले बना हुआ भोजन ही ग्रहण करते हैं और माता को भी उसी का भोग लगाते हैं।

  • आखिरी मंगलवार का महत्व: चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बिहार के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं।

प्रशासनिक चूक पर उठे सवाल

इतनी भारी भीड़ की संभावना के बावजूद मंदिर परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने पर अब सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल यहाँ लाखों लोग आते हैं, फिर भी पुलिस बल और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। भगदड़ के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और वरीय अधिकारी मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

फिलहाल घायलों का इलाज जारी है और प्रशासन मृतकों के परिजनों को सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया में जुटा है।

Share This Article