BNT Desk: बिहार के आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा झटका है। राज्य की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी संस्था, बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) ने अपने प्रसिद्ध ब्रांड ‘सुधा’ के दूध और उससे बने सभी उत्पादों (डेयरी प्रोडक्ट्स) की कीमतों में बढ़ोतरी का बड़ा ऐलान किया है।
सुधा ब्रांड की यह बढ़ी हुई नई दरें 25 मई 2026 से पूरे बिहार में एक साथ प्रभावी हो जाएंगी। इस फैसले से केवल रोजाना इस्तेमाल होने वाले दूध के दाम ही नहीं बढ़े हैं, बल्कि घी, पनीर, दही, लस्सी, मक्खन और सुधा की लोकप्रिय मिठाइयों की कीमतों में भी भारी इजाफा किया गया है। सुबह की चाय से लेकर त्योहारों की मिठाइयों तक, अब हर चीज के लिए बिहार के लोगों को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।
क्यों बढ़ाए गए दाम?
अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि अचानक दूध के दाम क्यों बढ़ जाते हैं। इस पर कॉम्पेड (COMFED) प्रशासन ने विस्तार से स्पष्टीकरण दिया है। फेडरेशन के मुताबिक, यह फैसला मजबूरी में और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण हैं:
-
पशुपालकों को ज्यादा भुगतान: ग्रामीण इलाकों में दूध का उत्पादन करने वाले किसानों और पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध की कीमत में 2 रुपये से लेकर 3.13 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। किसानों को उनकी लागत का सही मूल्य देने के लिए यह जरूरी था।
-
लागत में भारी बढ़ोतरी: पिछले कुछ समय में पैकेजिंग सामग्री के खर्च, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण ट्रांसपोर्टेशन (परिवहन) लागत, और डेयरी प्लांट को चलाने में आने वाले बिजली के खर्च में काफी इजाफा हुआ है।
इन्हीं सब वजहों से उत्पादन लागत बढ़ गई थी, जिसका सीधा असर अब रिटेल यानी खुदरा कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
सुधा दूध की नई और पुरानी दरें
दूध के पैकेटों में उनकी कैटेगरी के हिसाब से 1 रुपये से लेकर 3 रुपये तक की प्रति पैकेट बढ़ोतरी की गई है। नीचे प्रमुख बदलाव दिए गए हैं:
| दूध की श्रेणी | पैकेट का साइज | पुराना रेट (रुपये) | नया रेट (रुपये) |
| सुधा गोल्ड | 500 मिलीलीटर | 33 | 35 (1 लीटर का दाम 68 रुपये) |
| सुधा शक्ति टोंड | 500 मिलीलीटर | 27 | 28 (1 लीटर का दाम 55 रुपये) |
| सुधा स्टैंडर्ड | 500 मिलीलीटर | 29 | 31 (1 लीटर का दाम 60 रुपये) |
| गाय का दूध | 500 मिलीलीटर | 28 | 29 (1 लीटर का दाम 57 रुपये) |
| टी स्पेशल | 500 मिलीलीटर | 26 | 27 (1 लीटर का दाम 52 रुपये) |
घी, पनीर और बटर के भी बढ़ गए भाव
दूध के अलावा रसोई में रोज इस्तेमाल होने वाले अन्य सुधा प्रोडक्ट्स के दामों में भी 7 रुपये से लेकर 35 रुपये तक की भारी वृद्धि की गई है:
-
सुधा घी (500 ml): जो घी पहले 315 रुपये में मिलता था, वह अब 325 रुपये का हो गया है।
-
सुधा पनीर (200 ग्राम): पनीर का छोटा पैकेट अब 85 रुपये के बजाय 95 रुपये में मिलेगा (यानी सीधे 10 रुपये की बढ़ोतरी)।
-
टेबल बटर (500 ग्राम): इसके दाम में सबसे बड़ी उछाल आई है, यह 270 रुपये से बढ़कर अब 305 रुपये का हो गया है।
-
व्हाइट बटर (100 ग्राम): इसका रेट 55 रुपये से बढ़ाकर 62 रुपये कर दिया गया है।
गर्मी के सीजन में दही, लस्सी और अन्य ड्रिंक्स भी हुए महंगे
मई के इस तपते महीने में जब लोग गर्मी से राहत पाने के लिए दही और लस्सी का सहारा ले रहे हैं, तब सुधा ने इनके दाम बढ़ाकर तगड़ा झटका दिया है:
-
दही (1 किलो का पैकेट): अब ग्राहकों को 72 रुपये की जगह 78 रुपये चुकाने होंगे।
-
सादा लस्सी (140 ml): यह पॉकेट-फ्रेंडली लस्सी 10 रुपये से बढ़कर अब 12 रुपये की हो गई है।
-
मैंगो लस्सी: गर्मियों की इस खास लस्सी का दाम 12 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो गया है।
-
मस्तानी ड्रिंक (140 ml): इसका दाम भी 12 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दिया गया है।
मिठाइयों की कीमतें बढ़ीं
अगर आप सुधा के पार्लर से पेड़ा या रसगुल्ला खरीदने के शौकीन हैं, तो अब आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे:
-
मिल्क केक / पेड़ा (250 ग्राम): इसका दाम 108 रुपये से सीधे बढ़कर 125 रुपये हो गया है।
-
गुलाब जामुन (1 किलो टिन): अब यह 240 रुपये के बजाय 250 रुपये में मिलेगा।
-
रसगुल्ला (1 किलो टिन): इसका पुराना दाम 220 रुपये था, जो अब बढ़कर 240 रुपये हो गया है।
-
बालूशाही (प्रति किलो): बालूशाही का रेट भी 230 रुपये से बढ़ाकर 250 रुपये कर दिया गया है।
आम जनता और मध्यम वर्गीय परिवारों पर असर
सुधा ब्रांड के इस फैसले का सीधा असर बिहार के करोड़ों मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों के मासिक घरेलू बजट पर पड़ना तय है। दूध एक ऐसी आवश्यक वस्तु है जिसे कोई भी परिवार पूरी तरह बंद नहीं कर सकता, खासकर उन घरों में जहाँ छोटे बच्चे या बुजुर्ग हैं।
चाय, सुबह का नाश्ता, बच्चों का दूध और त्योहारों के व्यंजनों का खर्च अब बढ़ जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ जहाँ आमदनी सीमित है, वहीं दूसरी तरफ रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम इंसान की कमर टूट रही है। हालांकि, कॉम्फेड का दावा है कि डेयरी उद्योग को बचाए रखने और ग्रामीण किसानों की भलाई के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था।