BNT Desk: बिहार के आम नागरिकों और वाहन चालकों के लिए एक बार फिर तगड़ी और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। राज्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस नए इजाफे के बाद तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा और गहरा असर पड़ने वाला है।
ताजा संशोधन के मुताबिक, बिहार में पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी पटना समेत राज्य के तमाम जिलों में ईंधन की दरें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने मध्यमवर्गीय परिवारों और व्यावसायिक वाहन मालिकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।
पटना में पेट्रोल-डीजल के नए रेट
राजधानी पटना में इस बढ़ोतरी का सबसे सीधा और बड़ा असर देखने को मिला है। नई दरें लागू होने के बाद पटना में ईंधन के भाव इस प्रकार हैं:
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पेट्रोल की नई कीमत: पटना में अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 111.11 रुपये हो गई है।
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डीजल की नई कीमत: वहीं, रोजमर्रा के परिवहन और भारी वाहनों में इस्तेमाल होने वाला डीजल अब 97.14 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।
ईंधन के ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि राज्य में तेल की कीमतें अब आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।
10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम: महंगाई की हैट्रिक
जनता के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी कोई अचानक या लंबे समय बाद नहीं हुई है। पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह तीसरी बार है जब तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया है।
लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के कारण पिछले एक हफ्ते में ही तेल के दाम कई रुपये ऊपर चढ़ चुके हैं। इस ‘महंगाई की हैट्रिक’ ने आम जनता को संभलने का मौका भी नहीं दिया है। लोग अभी पिछली बढ़ोतरी के झटके से उबर भी नहीं पाए थे कि तेल कंपनियों ने एक और नया बोझ जनता की जेब पर डाल दिया।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की इस लगातार बढ़ती कीमतों के पीछे मुख्य वजह वैश्विक परिस्थितियों को माना जा रहा है। तेल विपणन कंपनियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार आ रही तेजी इसका सबसे बड़ा कारण है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की मांग बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही दिक्कतों की वजह से अंतरराष्ट्रीय मानक काफी महंगे हो गए हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाली किसी भी तरह की उथल-पुथल या मूल्य वृद्धि का सीधा असर भारत के राज्यों और अंततः आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर चौतरफा असर
पेट्रोल और डीजल केवल वाहनों को चलाने के लिए ही जरूरी नहीं हैं, बल्कि देश और राज्य की पूरी अर्थव्यवस्था की धुरी इनसे जुड़ी हुई है। तेल के दामों में 87 और 91 पैसे की यह बढ़ोतरी दिखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका व्यापक असर हर क्षेत्र पर पड़ता है:
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सब्जियां और खाद्यान्न होंगे महंगे: डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (Transportation) का खर्च सीधे तौर पर बढ़ जाता है। जब ट्रकों का किराया बढ़ेगा, तो गांवों और अन्य राज्यों से शहरों तक आने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध और राशन की चीजें भी महंगी हो जाएंगी।
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घरेलू बजट पर दबाव: नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय लोग जो रोजाना अपनी बाइक या कार से दफ्तर जाते हैं, उनका मासिक पेट्रोल खर्च अब काफी बढ़ जाएगा।
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किसानों पर मार: ग्रामीण इलाकों में किसान सिंचाई के लिए पंपसेट और ट्रैक्टरों में डीजल का भारी इस्तेमाल करते हैं। डीजल महंगा होने से खेती की लागत भी बढ़ जाएगी।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस तपिश ने बिहार के आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।