बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव का एलान, 18 जून को वोटिंग और उसी दिन आएंगे नतीजे

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BNT Desk: बिहार की राजनीतिक फिजाओं में एक बार फिर से भारी गर्माहट देखने को मिल रही है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार विधान परिषद (MLC) की खाली हो रही सीटों को भरने के लिए चुनावी तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार विधान परिषद की 9 खाली सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 1 रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही सूबे के तमाम राजनीतिक दलों में हलचल बेहद तेज हो गई है। टिकट के दावेदारों से लेकर पार्टी आलाकमान तक, सभी जोड़-तोड़ के गणित में व्यस्त हो गए हैं।

18 जून को ही होगा फैसला

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी 10 सीटों के लिए आगामी 18 जून को मतदान (वोटिंग) कराया जाएगा। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने के लिए आयोग ने विशेष व्यवस्था की है, जिसके तहत 18 जून को ही मतदान समाप्त होने के बाद देर शाम तक नतीजों की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक ही दिन में वोटिंग और रिजल्ट आने के फैसले ने नेताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलों और कयासों का बाजार बेहद गर्म हो चुका है।

एनडीए में सीटों की खींचतान और शक्ति प्रदर्शन की होड़

इस बार का विधान परिषद चुनाव महज कुछ सीटों को जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी दलों के लिए अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन करने का एक बड़ा मंच बन गया है।

सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे (सीट शेयरिंग) को लेकर अंदरूनी रस्साकशी शुरू हो गई है। बीजेपी, जेडीयू और गठबंधन के अन्य छोटे दल अपनी-अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जुगत में लग गए हैं।

  • संख्याबल का गणित: बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के हिसाब से एनडीए का पलड़ा बेहद भारी नजर आ रहा है। अपने मजबूत संख्याबल के दम पर एनडीए गठबंधन लगभग 8 से 9 सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करने की स्थिति में दिख रहा है।

  • महागठबंधन की रणनीति: दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल यानी महागठबंधन भी शांत नहीं बैठा है। विपक्षी खेमा किसी भी तरह एनडीए के किले में सेंध लगाने और कम से कम एक से दो सीटों पर अपना कब्ज़ा जमाने के लिए अंदरूनी रणनीति तैयार कर रहा है। राजनीतिक पंडित इसे आने वाले चुनावों का ‘सेमीफाइनल’ मानकर देख रहे हैं।

 

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के नाम पर चर्चाओं का बाजार गर्म

इस चुनाव में सबसे ज्यादा ध्यान टिकट पाने वाले संभावित उम्मीदवारों के नामों पर टिका हुआ है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार पारंपरिक राजनेताओं के बजाय कई नए और चौंकाने वाले चेहरों को विधान परिषद (उच्च सदन) भेजे जाने की प्रबल संभावना है।

सबसे बड़ी और चौंकाने वाली चर्चा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बहुत तेजी से फैल रही है कि निशांत कुमार को इस बार विधान परिषद का टिकट दिया जा सकता है, जिससे उनकी राजनीति में आधिकारिक एंट्री हो सकती है।

इसके अलावा, नीतीश सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश जैसे कद्दावर नेताओं को भी इस चुनाव में मौका मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि सरकार के कुछ मंत्रियों के लिए तय समय सीमा के भीतर विधान मंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य बनना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। ऐसे में अपनी कुर्सी बचाने और लॉबिंग को मजबूत करने के लिए नेताओं की अंदरूनी दौड़-धूप अपने चरम पर पहुंच गई है।

सियासी समीकरण और आगे का दिलचस्प खेल

बिहार विधान परिषद की यह जंग केवल आंकड़ों और गणित का खेल नहीं है, बल्कि यह राज्य की जमीनी हकीकत और राजनीतिक नब्ज़ को परखने का एक बड़ा इम्तिहान है। हालांकि, विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए नतीजे पहले से ही काफी हद तक तय माने जा रहे हैं, लेकिन टिकटों के बंटवारे के बाद पार्टियों के भीतर होने वाली बगावत और भीतरघात (क्रॉस वोटिंग) के खतरे ने माहौल को बेहद सस्पेंसिव बना दिया है। आने वाले दिनों में बिहार की यह सियासी जंग और भी ज्यादा तल्ख, दिलचस्प और मोड़दार होने वाली है।

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