जन सुराज: राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने सक्रिय राजनीति से लिया ब्रेक; प्रशांत किशोर ने खाली किया शेखपुरा हाउस

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार की राजनीति में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ और बदलाव का नारा देकर उतरी प्रशांत किशोर (PK) की पार्टी जन सुराज इस वक्त अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी शिकस्त के बाद पार्टी को एक और बहुत बड़ा झटका लगा है। जन सुराज के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने अचानक सक्रिय राजनीति से एक साल का ब्रेक (विराम) लेने का एलान कर दिया है।

पप्पू सिंह के इस फैसले और प्रशांत किशोर द्वारा पटना स्थित उनके आवास ‘शेखपुरा हाउस’ को खाली करने की खबरों ने बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। राजनीति के जानकार इसे चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर उपजे गहरे असंतोष और बिखराव के रूप में देख रहे हैं।

विधानसभा चुनाव 2025 में लगा था ‘शून्य’ का झटका

प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी के गठन से पहले पूरे बिहार में महीनों लंबी पदयात्रा की थी। उन्होंने जनता की नब्ज टटोली और दावा किया था कि उनकी पार्टी पलायन, रोजगार और शिक्षा जैसे जमीनी मुद्दों पर चुनाव लड़ेगी।

दावे बड़े थे कि जन सुराज बिहार की राजनीतिक दिशा बदल देगी, लेकिन 14 नवंबर 2025 को जब बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, तो परिणाम बेहद निराशाजनक रहे:

  • 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में जन सुराज का खाता तक नहीं खुला और पार्टी शून्य (0) पर सिमट गई।

  • कई प्रमुख सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई।

सूत्रों के मुताबिक, इस अप्रत्याशित हार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आर्थिक रूप से सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले उदय सिंह को बुरी तरह हतोत्साहित कर दिया था।

नतीजों के बाद से ही नाराज चल रहे थे उदय सिंह!

मई 2025 में जब जन सुराज पार्टी का आधिकारिक गठन हुआ था, तब प्रशांत किशोर ने सीमांचल के कद्दावर नेता और उद्योगपति उदय सिंह को पार्टी का पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। उदय सिंह न केवल नैतिक बल्कि आर्थिक रूप से भी पार्टी के सबसे बड़े मददगार थे। देश-विदेश में फैले अपने बड़े कारोबार और 370 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के दम पर उन्होंने पार्टी को खड़ा करने में सब कुछ झोंक दिया था।

माना जा रहा था कि 2025 के चुनाव में जन सुराज इतिहास रचेगी। लेकिन जब नतीजे इसके ठीक उलट आए, तो उदय सिंह की प्रशांत किशोर और पूरे अभियान से नाराजगी बढ़ गई। 14 नवंबर 2025 के बाद से वे कभी भी सार्वजनिक रूप से प्रशांत किशोर के साथ मंच साझा करते नजर नहीं आए। वे कुछ समय के लिए देश से बाहर इंग्लैंड चले गए थे और दिल्ली लौटने के बाद भी उन्होंने पार्टी के कामकाज से पूरी दूरी बना ली थी।

व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज छोड़ राजनीति से बनाई दूरी

बीती रात उदय सिंह ने जन सुराज के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक संदेश भेजकर अपने फैसले से सबको चौंका दिया। उन्होंने लिखा:

“प्रिय साथियों, कुछ जरूरी मसलों पर पूरा ध्यान दे पाने के लिए मैंने लगभग एक साल तक सक्रिय राजनीति से थोड़ा विराम लेने का फैसला किया है। इस दौरान जो मोहब्बत, इज्जत और सहयोग मुझे मिला, उसके लिए मैं दिल से शुक्रगुजार हूँ।”

हालांकि, मीडिया के सामने उन्होंने इसे पूरी तरह से अपना निजी फैसला बताया और कहा कि वे हमेशा के लिए संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि अपने बड़े बिजनेस और कुछ निजी कामों को संभालने के लिए यह ब्रेक ले रहे हैं।

प्रशांत किशोर ने खाली किया ‘शेखपुरा हाउस’, आश्रम में हुए शिफ्ट

उदय सिंह की इस घोषणा के समानांतर पटना में एक और बड़ा घटनाक्रम हुआ। पटना का ‘शेखपुरा हाउस’, जो उदय सिंह का आवास है और पिछले कई महीनों से जन सुराज व प्रशांत किशोर की राजनीति का मुख्य ‘पावर सेंटर’ बना हुआ था, उसे प्रशांत किशोर ने खाली कर दिया है।

भीतरखाने की खबरों के मुताबिक, करीब 3 महीने पहले ही उदय सिंह ने प्रशांत किशोर को यह घर खाली करने का संकेत दे दिया था। अब प्रशांत किशोर पटना का ठिकाना छोड़कर बिहटा में बन रहे 5 एकड़ के ‘बिहार नवनिर्माण आश्रम’ में शिफ्ट हो गए हैं। पीके का कहना है कि जब तक बिहार में पूरी तरह बदलाव नहीं हो जाता, वे इसी आश्रम में रहकर राजनीतिक गतिविधियों और युवाओं की ट्रेनिंग का संचालन करेंगे।

जन सुराज के भविष्य पर खड़े हुए बड़े सवाल

उदय सिंह का इस तरह अचानक राजनीति से दूरी बनाना जन सुराज के संगठन के लिए बहुत बड़ा झटका है। इससे पहले भी पार्टी के गठन के समय जुड़े कई दिग्गज नेता और शुरुआती सदस्य प्रशांत किशोर का साथ छोड़ चुके हैं। अब जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ही किनारा कर लिया है, तो संगठन के सामने कई तीखे सवाल खड़े हैं:

  1. जन सुराज का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा?

  2. क्या आर्थिक रूप से मजबूत नेताओं के जाने के बाद पार्टी का जमीनी ढांचा कमजोर पड़ेगा?

  3. क्या प्रशांत किशोर इस बिखराव को रोककर आगामी चुनावों के लिए पार्टी को दोबारा खड़ा कर पाएंगे?

इन सभी सवालों के जवाब आने वाले वक्त में ही स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल उदय सिंह के इस कदम ने जन सुराज की अंदरूनी कलह को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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