BNT Desk: वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे परियोजना को कुल सात पैकेजों में बांटा गया था। इनमें से पांच पैकेजों पर काम पहले से ही चल रहा था, लेकिन रोहतास जिले में आने वाले पैकेज 4 और 5 तकनीकी कारणों से फंसे हुए थे।
दरअसल, इस हिस्से में सड़क वन क्षेत्र (Forest Area) से होकर गुजरनी थी, जहाँ एक टनल (सुरंग) का निर्माण होना था। वन विभाग ने वहां ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं दी। टनल बोरिंग मशीन (TBM) का विकल्प बहुत महंगा था, इसलिए अंत में सड़क का डिजाइन ही बदल दिया गया। अब यह सड़क वन क्षेत्र के बजाय सासाराम शहर के पास से गुजरेगी।
नया डिजाइन और बदला हुआ रूट
डिजाइन में बदलाव के कारण सड़क की लंबाई अब लगभग 15 किलोमीटर बढ़ गई है।
-
नया विस्तार: अब यह हिस्सा कोनकी गांव से लेरुआ गांव तक करीब 41.955 किलोमीटर लंबा होगा।
-
लागत: इस नए पैकेज के निर्माण पर लगभग 2897.16 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
-
मॉडल: इसे ‘हाइब्रिड एन्युटी मॉडल’ (HAM) पर बनाया जाएगा, जिसमें सरकार और निर्माण एजेंसी मिलकर पैसा लगाएंगी।
सोन नदी पर बनेगा 3.5 किलोमीटर लंबा पुल
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत सोन नदी पर बनने वाला एक विशाल पुल है।
-
प्रमुख आकर्षण: रोहतास के पास सोन नदी पर 3.5 किलोमीटर लंबा छह लेन का पुल बनाया जाएगा।
-
अन्य निर्माण: इस पैकेज के तहत 6 छोटे पुल भी बनाए जाएंगे।
-
जमीन की जरूरत: इस पूरे हिस्से के लिए 310.77 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी, जिसमें से काफी हिस्सा सरकारी भूमि है।
बिहार के इन जिलों को मिलेगा सीधा फायदा
यह एक्सप्रेसवे बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजर रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी:
-
कैमूर: यहाँ पैकेज 1 और 2 के तहत 54 किलोमीटर सड़क बन रही है।
-
रोहतास: नया पैकेज (4 और 5) इसी जिले के आर्थिक परिदृश्य को बदल देगा।
-
औरंगाबाद: पैकेज 6 के तहत 35.2 किलोमीटर का हिस्सा यहाँ से गुजरेगा।
-
गया: पैकेज 7 के तहत 33.5 किलोमीटर लंबी सड़क गया जिले में बनाई जा रही है।
समय की बचत और व्यापार को बढ़ावा
इस सड़क के बन जाने से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच की दूरी सिमट जाएगी।
-
आधा हो जाएगा सफर: वर्तमान में वाराणसी से कोलकाता जाने में 14 घंटे लगते हैं, जो इस एक्सप्रेसवे के बाद घटकर केवल 6 से 7 घंटे रह जाएगा।
-
आर्थिक कॉरिडोर: यह सड़क केवल यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि माल ढुलाई के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। यह सीधे हल्दिया बंदरगाह (Haldia Port) से कनेक्टिविटी देगी, जिससे बिहार के व्यापारियों के लिए समुद्र के जरिए व्यापार करना आसान हो जाएगा।
बिहार के लिए विकास का नया द्वार
NH-319B केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह पूर्वी भारत का एक इकोनॉमिक कॉरिडोर है। सासाराम और रोहतास के अटके हुए काम को मंजूरी मिलने से अब पूरे प्रोजेक्ट के पूरा होने की समयसीमा साफ हो गई है। यह एक्सप्रेसवे न केवल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
आने वाले कुछ वर्षों में वाराणसी से कोलकाता का सफर एक विश्वस्तरीय अनुभव होगा, जिसका सबसे बड़ा लाभ बिहार के लोगों को मिलेगा।