गया: एक ही गांव की 5 बेटियों ने रचा इतिहास; बंगाल बीघा की बेटियां बनीं बिहार पुलिस का हिस्सा

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार के गया जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने पूरे राज्य का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। गया जिले के बोधगया प्रखंड के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव बंगाल बीघा की पांच बेटियों ने एक साथ बिहार पुलिस में चयनित होकर इतिहास रच दिया है। एक ही गांव की पांच युवतियों और महिलाओं का पुलिस सेवा के लिए चुना जाना कोई साधारण बात नहीं है। इस ऐतिहासिक सफलता ने न केवल उनके परिवारों को बल्कि पूरे इलाके को गौरवान्वित किया है। गांव में चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ इन बेटियों की मेहनत और उनकी कामयाबी के चर्चे हो रहे हैं।

गांव में जश्न और गर्व का माहौल

जैसे ही बिहार पुलिस परीक्षा के परिणाम घोषित हुए और गांव की पांच बेटियों के चयन की खबर बंगाल बीघा पहुंची, पूरा गांव जश्न में डूब गया। ग्रामीणों के बीच उत्साह, उमंग और गर्व का ऐसा माहौल है मानो गांव में कोई बड़ा त्योहार आ गया हो। लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिला रहे हैं और बेटियों के माता-पिता को बधाई देने के लिए उनके घरों पर तांता लगा हुआ है। इस सफलता को ग्रामीण इलाके में बेटियों की शिक्षा, उनकी आजादी और कठिन परिश्रम की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। ये बेटियां अब क्षेत्र के अन्य बच्चों के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं।

जानिए कौन हैं इतिहास रचने वाली ये 5 बेटियां

पुलिस सेवा के लिए चयनित हुईं इन जांबाज बेटियों में कोई किसान की बेटी है, तो कोई पुलिस अफसर की, और कोई गांव की बहू है। इन सभी के नाम और पारिवारिक पृष्ठभूमि इस प्रकार है:

  1. प्रीति कुमारी: बंगाल बीघा गांव के रहने वाले रामजी यादव की पुत्री हैं। इन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के माहौल में रहकर पूरी की।

  2. रीति कुमारी: ये भी रामजी यादव की ही पुत्री हैं। यानी एक ही घर की दो सगी बहनों (प्रीति और रीति) ने एक साथ पुलिस की वर्दी पहनकर माता-पिता का नाम रोशन किया है।

  3. रुधा कुमारी: ये झारखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर कार्यरत राम लखन यादव की पुत्री हैं। पिता की खाकी वर्दी को देखकर बड़ी हुईं रुधा ने अब खुद भी पुलिस सेवा में आकर पिता का मान बढ़ाया है।

  4. सोनम कुमारी: गांव के ही एक साधारण किसान विजय यादव की पुत्री हैं। खेतों में पिता की हाड़-तोड़ मेहनत को देखकर सोनम ने कुछ बड़ा करने की ठानी थी।

  5. सिंकू देवी: यह सफलता इस मायने में और खास हो जाती है क्योंकि चयनित अभ्यर्थियों में किसान सिकंदर यादव की पुत्रवधू (बहू) सिंकू देवी भी शामिल हैं। शादी और घर-परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है।

 

ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों को नहीं बनने दिया बाधा

इन पांचों बेटियों की सफलता की कहानी इसलिए भी बेमिसाल है क्योंकि इनके पास बड़े शहरों के बच्चों जैसी सुख-सुविधाएं नहीं थीं। ग्रामीण परिवेश, बिजली की आंख-मिचौनी और कोचिंग-संसाधनों की भारी कमी के बावजूद इन बेटियों ने कभी हार नहीं मानी।

इन्होंने अपनी पढ़ाई के आड़े गरीबी या सीमित संसाधनों को कभी नहीं आने दिया। कड़े अनुशासन, हर रोज तड़के उठकर दौड़ का अभ्यास करना, शारीरिक दक्षता की तैयारी और घंटों किताबों के साथ वक्त बिताकर इन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर बिहार पुलिस में अपनी जगह पक्की की है।

परिजनों ने दिया पूरा साथ, बेटियों ने चुकाया कर्ज

सफलता के बाद बेटियों के परिजनों (माता-पिता और अभिभावकों) की आंखें खुशी से नम हैं। परिजनों ने बताया कि भले ही वे आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं थे और ग्रामीण परिवेश की अपनी कुछ सीमाएं थीं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी बेटियों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी।

समाज की रूढ़िवादी सोच और पुरानी बातों को दरकिनार कर उन्होंने अपनी बेटियों पर पूरा भरोसा जताया। आज इन पांचों बेटियों ने अपनी इस शानदार कामयाबी से अपने माता-पिता के उस भरोसे का कर्ज पूरी ईमानदारी से चुका दिया है।

आसपास के गांवों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

बंगाल बीघा गांव की इन बेटियों की यह कामयाबी अब सिर्फ इसी गांव तक सीमित नहीं है। यह आसपास के दर्जनों गांवों के लिए एक मिसाल बन गई है। विशेषकर उन परिवारों के लिए यह एक बड़ी सीख है जो आज भी बेटियों को बोझ समझते हैं या उन्हें उच्च शिक्षा देने से कतराते हैं।

सिंकू देवी की सफलता ने यह भी साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शादी के बाद भी सपनों को पूरा किया जा सकता है। गया जिले का यह छोटा सा गांव अब ‘पुलिस वाली बेटियों के गांव’ के नाम से अपनी नई पहचान बना रहा है।

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