भागलपुर: मायागंज अस्पताल में सुरक्षाकर्मी आपस में भिड़े, लाठी-डंडों से अधीक्षक कार्यालय को बनाया रणक्षेत्र; मरीजों में मची भगदड़

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: पूर्वी बिहार के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित चिकित्सा केंद्र, जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जिसे आम लोग मायागंज अस्पताल के नाम से जानते हैं) में सोमवार को एक बेहद शर्मनाक और डरावनी घटना सामने आई। जिस अस्पताल परिसर में मरीजों का इलाज होता है और जहां सुरक्षा की उम्मीद की जाती है, वही परिसर अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।

अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले सुरक्षाकर्मी ही किसी बात को लेकर आपस में भिड़ गए। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच जमकर खूनी संघर्ष शुरू हो गया। इस हिंसक झड़प के कारण अस्पताल में इलाज कराने आए गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना दे रहे थे गार्ड

मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे फसाद की शुरुआत अस्पताल के अधीक्षक (Superintendent) कार्यालय के ठीक सामने से हुई। अस्पताल में तैनात एक निजी सुरक्षा कंपनी के स्थानीय गार्ड अपनी कुछ जायज मांगों को लेकर वहां एकत्र हुए थे। सुरक्षाकर्मियों की मांगें निम्नलिखित थीं:

  • वेतन वृद्धि: लंबे समय से मानदेय या सैलरी न बढ़ाए जाने का विरोध।

  • अवकाश की समस्या: जरूरत के समय छुट्टी न मिलने की शिकायत।

  • प्रशासनिक मुद्दे: कंपनी और अस्पताल प्रबंधन के रवैये को लेकर नाराजगी।

स्थानीय गार्ड अपनी इन मांगों को लेकर अधीक्षक कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। इसी दौरान, उसी निजी सुरक्षा कंपनी के कुछ अन्य गार्ड पड़ोसी जिले बांका से वहां पहुंच गए। बांका से आए सुरक्षाकर्मियों और भागलपुर में तैनात सुरक्षाकर्मियों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह मामूली कहासुनी एक बड़े हिंसक रूप में बदल गई।

लाठी-डंडों से हुआ खूनी संघर्ष

दोनों पक्षों के जवान सारी मर्यादाओं और नियमों को ताक पर रखकर एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से टूट पड़े। अधीक्षक कार्यालय के सामने शुरू हुआ यह बवाल कुछ ही मिनटों में इतना बढ़ गया कि इसने पूरे अस्पताल परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। लाठियां भांजते और एक-दूसरे को लहूलुहान करते हुए ये सुरक्षाकर्मी अस्पताल के मुख्य गेट से बाहर निकलकर मुख्य सड़क तक पहुंच गए।

इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाकी और नीली वर्दी पहने सुरक्षाकर्मी एक-दूसरे पर कितनी बेरहमी से लाठियां बरसा रहे हैं। इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के कई गार्डों को गंभीर चोटें आई हैं और वे घायल बताए जा रहे हैं। जिस सुरक्षा बल के कंधों पर हजारों मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल की संपत्ति की सुरक्षा का भार था, उनका यह हिंसक और उग्र रूप देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति दंग रह गया।

मीडिया के तीखे सवालों से भागे अस्पताल अधीक्षक

इतने बड़े चिकित्सा केंद्र के भीतर दिन-दहाड़े हुए इस खूनी खेल ने अस्पताल प्रबंधन की मुस्तैदी और कानून-व्यवस्था पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इस बेहद संवेदनशील और सुरक्षा में चूक के मामले पर अस्पताल के अधीक्षक प्रोफेसर एच.पी. दुबे से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाया।

प्रोफेसर एच.पी. दुबे मीडिया के कैमरों को देखकर बचते नजर आए और पत्रकारों के तीखे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। अस्पताल प्रबंधन द्वारा साधी गई इस रहस्यमयी चुप्पी ने मामले को और संदेहास्पद बना दिया है। लोगों का कहना है कि अगर अधीक्षक कार्यालय के ठीक बाहर सुरक्षाकर्मी सुरक्षित नहीं हैं और इस तरह गुंडागर्दी कर रहे हैं, तो वार्डों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है।

अस्पताल परिसर में भारी तनाव

इस हिंसक घटना के बाद से ही मायागंज अस्पताल परिसर में भारी तनाव और डर का माहौल बना हुआ है। मरीज और उनके परिजन अभी भी सहमे हुए हैं। घटना को लेकर स्थानीय बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मरीजों के परिजनों ने जिला प्रशासन से इस पूरे हुड़दंग की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि इस तरह सरेआम अस्पताल जैसी जगह को अखाड़ा बनाने वाले और मरीजों की जान जोखिम में डालने वाले दोषी सुरक्षाकर्मियों और संबंधित निजी एजेंसी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके। अब यह देखना होगा कि भागलपुर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही और गुंडागर्दी पर क्या कड़ा एक्शन लेता है।

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