BNT Desk: पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर अपनी नियुक्ति समेत अन्य मांगों को लेकर विद्यालय परिचारी पिछले करीब दो सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच मंगलवार को परिचारियों ने सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने के लिए अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में आंदोलनकारी थाली और चम्मच लेकर सड़क पर उतर आए और पुलिस की मौजूदगी में जोर-जोर से थाली बजाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की।
प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों के हाथों में अलग-अलग नारे लिखी तख्तियां थीं। इनमें ‘नियुक्ति नहीं तो मृत्यु दो’ और ‘परिचारी एकता जिंदाबाद’ जैसे नारे प्रमुख रहे। थाली और चम्मच की आवाज से गर्दनीबाग का पूरा इलाका गूंज उठा। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई तो उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह तरीका अपनाया है।
दो सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे हैं परिचारी
विद्यालय परिचारियों के मुताबिक, वे पिछले करीब दो सप्ताह से गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि आमरण अनशन पर बैठे लोगों की स्थिति जानने के लिए अब तक कोई मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचा है। इसी वजह से उनमें नाराजगी बढ़ रही है। आंदोलनकारी लोकेश कुमार ने कहा कि वे लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाना है।
कोरोना के समय थाली बजाने की अपील का दिया उदाहरण
आंदोलनकारी लोकेश कुमार ने अपने प्रदर्शन के तरीके को कोरोना काल से जोड़ते हुए कहा कि कोरोना के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से थाली बजाने की अपील की थी। उसी तरह मंगलवार को विद्यालय परिचारी भी थाली बजाकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका कहना था कि थाली की आवाज के जरिए मुख्यमंत्री और सरकार का ध्यान उनकी स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे नौकरी की मांग कर रहे हैं और नियुक्ति नहीं होने के कारण उन्हें लगातार आंदोलन करना पड़ रहा है। लोकेश कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की कथित गलती का खामियाजा विद्यालय परिचारियों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई अलग पक्ष सामने आने की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
9719 परिचारियों की नियुक्ति का दावा
सहरसा से पटना पहुंचे आंदोलनकारी संजीव कुमार ने भी सरकार से नियुक्ति की मांग की। उन्होंने दावा किया कि 9719 विद्यालय परिचारी नियुक्ति से वंचित हैं। उनका कहना है कि इतने लोगों के भविष्य का सवाल लंबे समय से लंबित है और सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में फैसला लेना चाहिए।
संजीव कुमार ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि इन सभी लोगों की नियुक्ति कर उन्हें रोजगार का अवसर दिया जाए। उनका कहना था कि नियुक्ति नहीं होने के कारण परिचारियों को मजबूर होकर धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि उनके मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
15 साल से नियुक्ति का इंतजार करने का दावा
प्रदर्शन में शामिल एक अन्य आंदोलनकारी ने दावा किया कि विद्यालय परिचारी पिछले करीब 15 वर्षों से अपनी नियुक्ति के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस दौरान कई बार धरना-प्रदर्शन किए गए और अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ा।
आंदोलनकारी का आरोप है कि पूर्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान उन्हें लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि इतने लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपना गार्जियन बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार उनकी परेशानी को समझेगी और नियुक्ति को लेकर जल्द कोई सकारात्मक फैसला लेगी।
2012 से मामला लंबित होने का दावा
विद्यालय परिचारियों के मुताबिक, उनकी बहाली और नियुक्ति से जुड़ा मामला वर्ष 2012 से लंबित है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन अब तक उन्हें नियुक्ति का लाभ नहीं मिल पाया है। इसी मुद्दे को लेकर परिचारियों ने आंदोलन को तेज किया है। गर्दनीबाग धरनास्थल पर पिछले करीब दो सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल चल रही है। मंगलवार को थाली बजाकर किया गया प्रदर्शन भी इसी आंदोलन का हिस्सा रहा।
सरकार के फैसले पर टिकी आंदोलनकारियों की नजर
विद्यालय परिचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। थाली बजाने के बाद अब उनकी नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग नियुक्ति से जुड़ी है। उनका दावा है कि हजारों अभ्यर्थी लंबे समय से इस प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से यदि जल्द कोई निर्णय लिया जाता है तो आंदोलन समाप्त होने की उम्मीद बन सकती है।
फिलहाल गर्दनीबाग में भूख हड़ताल और प्रदर्शन जारी है। आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीकों से विरोध दर्ज करा रहे हैं। मंगलवार को थाली बजाने का प्रदर्शन भी इसी कड़ी का हिस्सा रहा। अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और विद्यालय परिचारियों की नियुक्ति से जुड़े मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।