BNT Desk: महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए पटना पुलिस की ओर से तैनात की गईं ‘पुलिस दीदी’ की गाड़ियां ही ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर सवालों के घेरे में आ गई हैं। 26 अगस्त को पटना जिले के 91 थानों के लिए 360 स्कूटी और 70 बाइक उपलब्ध कराई गई थीं। हालांकि, इन वाहनों पर अब तक रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं लगाए गए हैं। इसके बावजूद ये वाहन शहर की सड़कों पर लगातार चल रहे हैं।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी वाहन को सार्वजनिक सड़क पर चलाने के लिए उसका रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। नियम निजी और सरकारी, दोनों तरह के वाहनों पर लागू होता है। ऐसे में पुलिस विभाग के लिए उपलब्ध कराई गईं इन गाड़ियों के बिना नंबर सड़क पर चलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि आमलोगों की बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर ट्रैफिक पुलिस कार्रवाई करती है और जुर्माना भी वसूलती है। ऐसे में पुलिस की अपनी गाड़ियों के मामले में नियमों के पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शहर के 10 प्रमुख थानों में 160 गाड़ियां बिना नंबर
राजधानी पटना के प्रमुख थानों में ही बड़ी संख्या में ऐसी स्कूटी और बाइक चल रही हैं, जिन पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर के 10 प्रमुख थानों में कुल 160 वाहन बिना नंबर के चल रहे हैं। इनमें पीरबहोर थाना को 14, कदमकुआं को 18, कोतवाली को 12, गांधी मैदान को 16, सचिवालय को 16, जक्कनपुर को 16, शास्त्रीनगर को 14, कंकड़बाग को 20, पत्रकारनगर को 16 और दीघा थाना को 18 वाहन दिए गए हैं। इन गाड़ियों का इस्तेमाल महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े कामों के लिए किया जाना है। पुलिस दीदियों को इन वाहनों के जरिए अपने-अपने थाना क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों में लगाया गया है। ऐसे में बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के इन वाहनों का सड़कों पर दौड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी?
बिना नंबर के वाहन चलने का सबसे बड़ा सवाल उनकी पहचान और जवाबदेही को लेकर है। अगर इनमें से किसी वाहन से सड़क पर कोई दुर्घटना हो जाती है, तो उसकी पहचान और संबंधित जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ सकते हैं। आम वाहन चालकों के लिए नंबर प्लेट वाहन की पहचान का सबसे बुनियादी माध्यम होती है। पुलिस विभाग खुद आमलोगों से वाहन के सभी जरूरी दस्तावेज और रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों का पालन करने की अपील करता है। बिना नंबर प्लेट या बिना वैध रजिस्ट्रेशन के वाहन चलाने पर कार्रवाई भी की जाती है। ऐसे में पुलिस विभाग के लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों पर नंबर नहीं होना नियमों के समान रूप से लागू होने को लेकर सवाल पैदा करता है।
सार्जेंट मेजर बोले- डीटीओ को नंबर देने को कहा गया
मामले में मोटर ट्रांसपोर्ट के सार्जेंट मेजर कुणाल कुमार ने बताया कि सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध कराने के लिए जिला परिवहन कार्यालय यानी डीटीओ से कहा गया है। उनके अनुसार, वाहनों के रजिस्ट्रेशन में कितना खर्च आएगा, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। सार्जेंट मेजर ने बताया कि इस संबंध में रिमाइंडर भी दिया गया है। इसके बावजूद अब तक इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। यानी पुलिस विभाग की ओर से नंबर जारी कराने की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभाग से संपर्क किया जा चुका है, लेकिन नंबर मिलने का इंतजार अभी जारी है।
ट्रैफिक पुलिस से जवाब लेने की कोशिश
इस मामले में ट्रैफिक पुलिस का पक्ष जानने के लिए ट्रैफिक एसपी से संपर्क करने की कोशिश की गई। कॉल प्रभारी ट्रैफिक एसपी ने रिसीव किया। उन्होंने बताया कि एसपी साहब छुट्टी पर हैं। इसके बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं किया गया। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इन वाहनों को 26 अगस्त को थानों के लिए उपलब्ध कराया गया था, तो इतने समय बाद भी इनका रजिस्ट्रेशन नंबर क्यों नहीं मिला। पुलिस की ओर से डीटीओ को रजिस्ट्रेशन के लिए कहे जाने की बात सामने आई है, लेकिन नंबर जारी होने तक इन वाहनों को सड़क पर चलाने की अनुमति और उसकी जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस विभाग की इन गाड़ियों का इस्तेमाल सीधे महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए जरूरी है कि इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन जल्द पूरा हो और सभी गाड़ियों पर वैध नंबर प्लेट लगाई जाए, ताकि सड़क पर उनकी पहचान स्पष्ट रहे और किसी दुर्घटना या अन्य घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने में परेशानी न हो।