बिहार: छपरा सदर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, एंबुलेंस नहीं मिली तो ठेले पर रस्सी से बांधकर ले गए शव

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BNT Desk: बिहार के छपरा सदर अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली तो वे शव को ठेले पर रखकर ले जाने को मजबूर हो गए। परिजनों ने शव को रस्सी से बांध दिया और फिर ठेले पर लेकर अस्पताल से निकल गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया और एंबुलेंस मैनेजर समेत संबंधित कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

 

पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने के लिए नहीं मिली एंबुलेंस

छपरा सदर अस्पताल में सामने आया यह मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन परिवहन सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतक के परिजनों को शव घर ले जाना था। इसके लिए उन्होंने 102 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस की मांग की।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध कराने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन उन्हें वाहन नहीं मिल सका। काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई व्यवस्था नहीं हुई तो उनके सामने शव को घर ले जाने की समस्या खड़ी हो गई।

आखिरकार परिजनों ने ठेले का सहारा लिया। शव को ठेले पर रखा गया और रस्सी से बांधकर अस्पताल से बाहर ले जाया गया। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों और मृतकों के परिजनों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ठेले पर शव ले जाने का वीडियो वायरल

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में परिजन शव को ठेले पर रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

सदर अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने की शिकायत ने व्यवस्था की जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों के सामने यह सवाल है कि जरूरत के समय एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर परिजन आखिर किस व्यवस्था के भरोसे रहें।

हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में यह स्पष्ट नहीं करता कि एंबुलेंस उपलब्ध क्यों नहीं हुई। इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जांच और स्पष्टीकरण के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

 

मृतक की पहचान को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान नगर थाना क्षेत्र के आजाद नगर करीमचक मोहल्ला निवासी सुदामा प्रसाद के बेटे सन्नी कुमार के रूप में बताई जा रही है। हालांकि, इस मामले से जुड़ी जानकारी में मृतक के नाम को लेकर अंतर होने की बात भी सामने आई है।

ऐसे में मृतक की पहचान को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। परिजनों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से सत्यापन के बाद ही नाम को अंतिम रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

फिलहाल इस मामले का मुख्य मुद्दा पोस्टमार्टम के बाद शव को घर ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है। इस घटना के बाद अस्पताल में शव परिवहन की व्यवस्था और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

 

एंबुलेंस मैनेजर और संबंधित कर्मियों को नोटिस

वीडियो वायरल होने और मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संज्ञान लिया है। जानकारी के मुताबिक, एंबुलेंस मैनेजर समेत संबंधित कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनसे पूछा गया है कि आखिर परिजनों को जरूरत के समय एंबुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।

अब संबंधित कर्मियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि एंबुलेंस की अनुपलब्धता के पीछे क्या कारण था, क्या उस समय वाहन उपलब्ध थे और परिजनों की मांग पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में किसी कर्मचारी की गलती साबित नहीं करता। संबंधित पक्ष का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी।

 

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

छपरा सदर अस्पताल की इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं के दावों और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को घर ले जाने के लिए परिजनों को वाहन की जरूरत थी। लेकिन, उनके दावे के अनुसार, एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण उन्हें ठेले का सहारा लेना पड़ा।

ऐसे मामलों में केवल अस्पताल में इलाज की सुविधा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जरूरत के समय परिवहन और अन्य बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे परिवारों के लिए, जिनके पास निजी वाहन की व्यवस्था नहीं होती, सरकारी सहायता का समय पर मिलना जरूरी है।

फिलहाल प्रशासन ने संबंधित कर्मियों से जवाब मांगा है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की वास्तविक वजह क्या थी और व्यवस्था में कहां चूक हुई। इस मामले में आगे की कार्रवाई और अधिकारियों के स्पष्टीकरण पर सबकी नजर बनी हुई है।

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