BNT Desk: बिहार में मछली की बिक्री व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार सुधा की तर्ज पर फ्रेश कैच कियोस्क खोलने जा रही है। राज्यभर में कुल 100 कियोस्क स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में 30 और दूसरे चरण में 70 कियोस्क खोले जाएंगे। इस योजना से लोगों को स्वच्छ वातावरण में ताजी मछली मिलेगी, वहीं मछली पालकों को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
सात निश्चय-3 के तहत शुरू होगी योजना
बिहार सरकार राज्य में मत्स्य कारोबार को व्यवस्थित और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी के तहत सात निश्चय-3 योजना के अंतर्गत फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना पर अधिकतम 10.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय और बिहार एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BAIDCL) के माध्यम से योजना को लागू किया जाएगा। कियोस्क बनाने के लिए सरकारी जमीन, नगर निकायों की भूमि या जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
पहले चरण में 30 कियोस्क का निर्माण कराया जा रहा है। इनके जल्द शुरू होने की योजना है। दूसरे चरण में 70 और कियोस्क स्थापित किए जाएंगे। इस तरह राज्य में कुल 100 आधुनिक मछली बिक्री केंद्र तैयार करने का लक्ष्य है।
पटना समेत इन शहरों में खुलेंगे कियोस्क
पहले चरण में बिहार के प्रमुख शहरों में फ्रेश कैच कियोस्क स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, बेगूसराय, मोतिहारी, बेतिया, हाजीपुर, किशनगंज, कटिहार और मुंगेर शामिल हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से शहरी उपभोक्ताओं को मछली खरीदने के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित जगह मिलेगी। फिलहाल कई इलाकों में मछली की बिक्री पारंपरिक तरीके से होती है, जहां साफ-सफाई, सुरक्षित भंडारण और मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। आधुनिक कियोस्क शुरू होने से इन समस्याओं को कम करने और ग्राहकों को बेहतर बिक्री व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कोल्ड चेन से लेकर डिजिटल पेमेंट तक की सुविधा
फ्रेश कैच कियोस्क को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। यहां मछलियों को सुरक्षित रखने और उनकी ताजगी बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन, डीप फ्रीजर और डिस्प्ले काउंटर की व्यवस्था होगी। इसके अलावा बिक्री केंद्रों पर स्वच्छ पानी, जल निकासी, बिजली और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में बैकअप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। डिजिटल भुगतान और अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था भी योजना का हिस्सा है। इन सुविधाओं का उद्देश्य मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखना, बिक्री केंद्रों पर स्वच्छता सुनिश्चित करना और ग्राहकों को बेहतर अनुभव देना है। स्थानीय मत्स्य उत्पादकों और कियोस्क संचालकों के बीच व्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला भी विकसित की जाएगी, ताकि केंद्रों पर नियमित रूप से ताजी मछलियां उपलब्ध कराई जा सकें।
एक कियोस्क पर 13.20 लाख रुपये तक खर्च
योजना के तहत एक कियोस्क की निर्धारित इकाई लागत 11 लाख रुपये रखी गई है। संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखते हुए इसकी अधिकतम लागत 13.20 लाख रुपये आंकी गई है। सरकार निर्धारित इकाई लागत के 80 प्रतिशत या वास्तविक निर्माण लागत, दोनों में से जो भी कम होगा, उसका वहन करेगी। निर्माण कार्य के लिए एजेंसी या संवेदक का चयन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, कियोस्क के संचालन के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार संचालकों का चयन होगा। केंद्रों के नियमित संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित संचालकों की होगी।
मछली पालकों और मत्स्य समितियों को मिलेगा फायदा
इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मछली पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। कियोस्क के जरिए मत्स्य उत्पादकों को अपने उत्पाद सीधे व्यवस्थित बिक्री नेटवर्क तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इसके लिए मत्स्य निदेशालय या BAIDCL के माध्यम से नियमित आपूर्ति श्रृंखला विकसित की जाएगी। साथ ही कियोस्क संचालकों के प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। योजना से मछली पालकों, मछली किसान उत्पादक संगठनों (FFPO) और मत्स्य सहकारी समितियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर बाजार व्यवस्था से मत्स्य उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, कियोस्क के संचालन और आपूर्ति व्यवस्था के जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।
शहरी उपभोक्ताओं को मिलेगी ताजी मछली
बिहार में मछली की मांग को देखते हुए फ्रेश कैच कियोस्क योजना बिक्री व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। कोल्ड स्टोरेज, स्वच्छता, डिजिटल भुगतान और व्यवस्थित आपूर्ति जैसी सुविधाओं से मछली की बिक्री को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य है। पहले चरण के 30 कियोस्क शुरू होने के बाद योजना का विस्तार दूसरे चरण में किया जाएगा। यदि व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ राज्य के मत्स्य कारोबार और मछली पालकों की बाजार तक पहुंच को भी मजबूती मिल सकती है।