बिहार टेंडर घोटाला: हाईकोर्ट ने ED-SVU की जांच पर उठाए सवाल, पूछा- छह अधिकारियों के नाम आए तो FIR सिर्फ तीन पर क्यों?

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BNT Desk: बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित गड़बड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच पर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने पूछा कि जब मामले में छह अधिकारियों के नाम सामने आए, तो प्राथमिकी केवल तीन के खिलाफ क्यों दर्ज की गई? अदालत ने SVU के एडीजी को पक्षकार बनाने और शपथपत्र दाखिल कर इसका जवाब देने का निर्देश दिया है।

‘मोहरा’ कौन और पर्दे के पीछे असली किंगपिन कौन?

रिशुश्री की याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच की दिशा और आरोपितों की भूमिका को लेकर कई सवाल किए। सुनवाई में अदालत की टिप्पणी का केंद्र यह था कि मामले में केवल सामने आए लोगों तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कथित तौर पर पर्दे के पीछे भूमिका निभाने वालों की भी पड़ताल होनी चाहिए। अदालत ने कथित तौर पर याचिकाकर्ता को ‘मोहरा’ बताते हुए असली ‘किंगपिन’ की भूमिका पर सवाल उठाया। साथ ही यह भी जानना चाहा कि क्या जांच के दौरान कुछ लोगों को बचाने और दूसरों को फंसाने जैसी स्थिति बन रही है। हालांकि, अदालत की टिप्पणियां सुनवाई के दौरान उठाए गए सवाल हैं। इन्हें किसी व्यक्ति के दोषी होने या जांच एजेंसियों की ओर से जानबूझकर किसी को बचाने का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

 

छह अधिकारियों के नाम सामने आए, FIR केवल तीन पर क्यों?

इस मामले में सबसे अहम सवाल प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर उठा। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब छह अधिकारियों के नाम सामने आए थे, तो SVU ने केवल तीन अधिकारियों के खिलाफ ही FIR क्यों दर्ज की? अदालत जानना चाहती है कि बाकी अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाने के पीछे क्या आधार था। जांच में सामने आए सभी संबंधित लोगों की भूमिका का आकलन किस तरह किया गया और किन तथ्यों के आधार पर कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, इन बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की जरूरत जताई गई। हाईकोर्ट के सवालों से जांच की निष्पक्षता और कार्रवाई के आधार को लेकर जवाबदेही का मुद्दा सामने आया है। अब एजेंसी को यह स्पष्ट करना होगा कि प्राथमिकी दर्ज करने के दौरान किन तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया।

 

SVU के ADG को पक्षकार बनाने का निर्देश

पटना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को विशेष निगरानी इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही एडीजी को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि बाकी अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। इस निर्देश के बाद मामले में SVU की ओर से जांच की प्रक्रिया और प्राथमिकी दर्ज करने के आधार पर जवाब दिया जाना है। अदालत यह जानना चाहती है कि जिन अधिकारियों के नाम सामने आए, उनकी भूमिका की जांच किस तरह की गई और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्या निर्णय लिया गया। एडीजी का शपथपत्र आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे जांच एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने आएगा।

ED और SVU की जांच पर बढ़ी निगाहें

सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में अब जांच एजेंसियों के जवाब पर नजर रहेगी। हाईकोर्ट के सवालों ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है कि जांच में शामिल सभी संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल किस तरह की जा रही है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में अगली सुनवाई की तारीख और जांच एजेंसियों के विस्तृत जवाब का उल्लेख नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले शपथपत्र से जांच के संबंध में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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