BNT Desk: पटना की सड़कों पर ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके संचालन को लेकर व्यवस्था अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। शहर में 15 हजार से अधिक ई-रिक्शा चल रहे हैं। इनके लिए न तो निर्धारित रूट तय किए गए हैं और न ही पर्याप्त आधिकारिक स्टैंड बनाए गए हैं। ऐसे में चालकों ने खुद ही अलग-अलग चौक-चौराहों और सड़क के मुहानों पर करीब 80 जगहों को स्टैंड बना लिया है। इससे शहर के कई प्रमुख इलाकों में रोज जाम की स्थिति बन रही है।
10 मिनट का सफर 30-45 मिनट में
ई-रिक्शा के बेतरतीब संचालन का असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ रहा है। रोजाना सड़कों पर निकलने वाले लाखों वाहन चालकों को अलग-अलग इलाकों में जाम का सामना करना पड़ता है। दफ्तर, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल जाने वाले लोगों को कई बार 10 मिनट की दूरी तय करने में 30 से 45 मिनट तक लग रहे हैं। जाम में एम्बुलेंस और दूसरे आपातकालीन वाहन भी फंस जाते हैं।
हर साल बढ़ रहा ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन
शहर में ई-रिक्शा की संख्या कम करने के बजाय इनके रजिस्ट्रेशन लगातार बढ़ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2023 में करीब 5,200 ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन हुआ था। 2024 में यह संख्या बढ़कर 7,500 और 2025 में 9,200 तक पहुंच गई। 2026 में अब तक करीब 6,000 ई-रिक्शा के रजिस्ट्रेशन की बात सामने आई है।
बिना ट्रेनिंग और कम उम्र के चालक भी सड़क पर
ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के साथ चालकों की ट्रेनिंग और लाइसेंसिंग भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई जगह कम उम्र के युवक बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और यातायात नियमों की जानकारी के ई-रिक्शा चला रहे हैं। अधिक कमाई के लिए क्षमता से ज्यादा यात्रियों को बैठाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। अप्रशिक्षित चालकों की अचानक ब्रेक लगाने, गलत दिशा में वाहन चलाने, बीच सड़क पर यात्रियों को उतारने-बिठाने और अचानक मोड़ने जैसी गतिविधियों से दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है।
पटना जंक्शन से पटना सिटी तक अवैध स्टैंड
ई-रिक्शा के अनधिकृत स्टैंड शहर के कई प्रमुख इलाकों में दिखाई देते हैं। पटना जंक्शन गोलंबर, GPO गोलंबर, चितकोहरा, बोरिंग चौराहा, राजापुर पुल, हड़ताली मोड़, गांधी मैदान, करबिगहिया, कंकड़बाग नगर निगम कार्यालय, आशियाना मोड़, राजा बाजार, राजेंद्र नगर, बेटर मोड़, 70 फीट, सिपारा, मीठापुर, फुलवारीशरीफ, अनीसाबाद गोलंबर, खगौल लख, पाटलिपुत्र गोलंबर और कुर्जी मोड़ समेत कई जगहों पर ई-रिक्शा खड़े रहते हैं। इन जगहों पर सड़क के किनारे यात्रियों के इंतजार में ई-रिक्शा की कतार लगने से कई बार सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है। इससे पहले से व्यस्त सड़कों पर वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है।
ट्रकों की नो-एंट्री के बाद भी जाम
दानापुर से फुलवारीशरीफ, पुलिस कॉलोनी, अनीसाबाद गोलंबर, बेउर बाइपास और जीरो माइल से टोल प्लाजा तक करीब 15 से 20 किलोमीटर के हिस्से में भी ई-रिक्शा और ऑटो की संख्या काफी है। पहले इस मार्ग पर दिन में ट्रकों की आवाजाही भी जाम का एक कारण मानी जाती थी। अब दिन में ट्रकों के परिचालन पर रोक के बावजूद जाम की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऑटो और ई-रिक्शा की बड़ी संख्या, अनियंत्रित पार्किंग और सड़क पर यात्रियों को उतारने-बिठाने से इस मार्ग पर यातायात प्रभावित हो रहा है। शहर में बढ़ते ई-रिक्शा को व्यवस्थित करने के लिए रूट निर्धारण, अधिकृत स्टैंड, चालक प्रशिक्षण और यातायात नियमों के पालन पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।