BNT Desk: बिहार की जीवनदायिनी गंगा और अन्य नदियों में नाव संचालन के दौरान बढ़ती लापरवाही को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है। लगातार मिल रही शिकायतों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के बाद जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने स्पष्ट कर दिया है कि अब यात्रियों की जान से खिलवाड़ करने वाले नाविकों और नाव मालिकों की खैर नहीं होगी।
सोमवार को जिले के प्रमुख घाटों का जायजा लेने के बाद डीएम ने सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे अब गंगा की लहरों पर मनमानी नहीं, बल्कि कानून का पहरा होगा।
घाटों पर निरीक्षण में खुली पोल
जिलाधिकारी ने खुद दीघा पाटीपुल, जेपी सेतु पूर्वी, मीनार घाट, कंगन घाट, गायघाट, नासरीगंज, हल्दीछपरा और उमानाथ घाट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान जो हकीकत सामने आई, वह डराने वाली थी। नावों पर न केवल क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जा रहा था, बल्कि मवेशी, दोपहिया वाहन और भारी निर्माण सामग्री तक लादकर संचालन किया जा रहा था। डीएम ने इसे “सीधा जीवन से खिलवाड़” करार देते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
‘नाइट कर्फ्यू’ और मौसम का सख्त पहरा
नदियों में होने वाले बड़े हादसों का मुख्य कारण कम रोशनी और खराब मौसम होता है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं:
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सूर्यास्त के बाद रोक: सूरज डूबने के बाद और सूर्योदय से पहले किसी भी नाव का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
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मौसम की शर्त: यदि मौसम खराब है या भारी बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी है, तो नावों को घाट पर ही बांधकर रखना होगा।
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चिन्हित घाट: अब नाविक कहीं से भी नाव नहीं खोल पाएंगे। केवल प्रशासन द्वारा सुरक्षित घोषित किए गए घाटों से ही आवाजाही की अनुमति होगी।
ये उपकरण हुए अनिवार्य
अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना के समय यात्रियों के पास बचने का कोई साधन नहीं होता। अब हर छोटी-बड़ी नाव के लिए कुछ सुरक्षा उपकरण अनिवार्य कर दिए गए हैं:
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प्रत्येक नाव पर लाइफ जैकेट और लाइफ ब्वाय (तैरने वाले रिंग) होना जरूरी है।
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प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड किट रखना होगा।
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नाव पर स्पष्ट रूप से नाविक का नाम, मोबाइल नंबर, निबंधन संख्या और यात्री क्षमता लिखनी होगी, ताकि यात्री भी जागरूक रह सकें।
निबंधन के बिना सब ‘अवैध’
जिला प्रशासन ने जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को निर्देश दिया है कि जिले की सभी नावों का निबंधन जल्द से जल्द पूरा किया जाए। बिना निबंधन वाली नावों को ‘अवैध’ माना जाएगा और पकड़े जाने पर उन्हें ज़ब्त कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हर नाव का रिकॉर्ड सरकारी फाइल में हो ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
चप्पे-चप्पे पर होगी निगरानी
डीएम ने केवल नाविकों को ही नहीं, बल्कि अंचल अधिकारियों (CO) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) को भी सीधी चेतावनी दी है। इन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के घाटों पर निरंतर गश्त करने का आदेश दिया गया है। निगरानी की रिपोर्ट रोज़ाना जिला आपदा प्रबंधन शाखा को भेजी जाएगी। यदि किसी अधिकारी के क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारी पर भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माना और जेल
प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि नावों पर मवेशी और भारी वाहनों को लादना अब भारी पड़ेगा। यदि किसी नाव की क्षमता 20 लोगों की है और उस पर 21वां व्यक्ति भी मिला, तो नाविक का लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने वाले नाव मालिकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की तैयारी भी कर ली गई है।
सुरक्षा ही प्राथमिकता
नदी मार्ग बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन विकास की इस दौड़ में सुरक्षा को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। जिलाधिकारी की इस सख्ती का उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि गंगा की गोद में सफर करने वाला हर नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुँचे। अब यह नाविकों और आम जनता की जिम्मेदारी है कि वे इन नियमों का पालन करें और अपनी जान जोखिम में न डालें।