BNT Desk: बिहार के बड़े पुलों और प्रमुख सड़कों से गुजरने वाले वाहन चालकों को अब अपनी जेब ढीली करनी होगी। राज्य सरकार अपनी स्वतंत्र टोल टैक्स नीति (Toll Tax Policy) लागू करने की तैयारी में है। पथ निर्माण विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसमें पुलों और सड़कों के रखरखाव के लिए नया टैक्स फॉर्मूला पेश किया गया है।
कैसे तय होगा टोल? (नया फॉर्मूला)
नई नीति में पुलों पर टैक्स वसूली का एक अनोखा और सख्त फॉर्मूला तैयार किया गया है:
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लंबाई का 10 गुना: पुल के मुख्य हिस्से की जितनी लंबाई होगी, उसे 10 से गुणा कर टोल वसूला जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि पुल 5 किलोमीटर लंबा है, तो उस पर 50 किलोमीटर की सड़क के बराबर टैक्स देना होगा।
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एप्रोच रोड का शुल्क: पुल तक पहुँचने वाली एप्रोच रोड पर भी अलग से करीब 60 से 65 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से शुल्क लगेगा।
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अंतिम राशि: पुल की लंबाई का गुणा और एप्रोच रोड का शुल्क जोड़कर फाइनल टोल टैक्स निर्धारित किया जाएगा।
निजी और भारी वाहनों के लिए अलग दरें
प्रस्ताव के अनुसार, अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए दरें भी अलग होंगी:
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निजी चारपहिया वाहन: इन पर प्रति किलोमीटर 60 से 65 पैसे का शुल्क प्रस्तावित है।
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कॉमर्शियल और भारी वाहन: ट्रक और बसों जैसे भारी वाहनों के लिए यह दर काफी अधिक हो सकती है।
क्यों पड़ी टोल की जरूरत?
बिहार में अब तक राज्य सरकार के अधीन आने वाले पुलों के लिए कोई ठोस टोल नीति नहीं थी। सरकार का मानना है कि:
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रखरखाव: बड़े पुलों और सड़कों की मरम्मत और देखभाल पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।
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स्थायी फंड: टोल से मिलने वाली राशि से इन परियोजनाओं के मेंटेनेंस के लिए एक स्थायी फंड उपलब्ध हो सकेगा।
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बेहतर सुविधाएं: इस पैसे का उपयोग भविष्य में नई सड़कों और सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और डेली पैसेंजर्स को राहत
आम जनता और स्थानीय निवासियों के विरोध को देखते हुए सरकार ने कुछ रियायतें भी दी हैं:
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मंथली पास: नौकरीपेशा और छोटे व्यापारियों के लिए मासिक पास की सुविधा होगी, जिससे उन्हें हर चक्कर में पूरा पैसा नहीं देना पड़ेगा।
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स्थानीय छूट: टोल प्लाजा के पास रहने वाले ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को टैक्स में विशेष छूट या पूर्ण माफी दी जा सकती है।
कब से लागू होगी नई व्यवस्था?
पथ निर्माण विभाग के अनुसार, नीति का ड्राफ्ट तैयार है और जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की हरी झंडी मिलते ही राज्य के चुनिंदा बड़े पुलों और मुख्य राज्य मार्गों (SH) पर टोल प्लाजा का निर्माण और वसूली शुरू कर दी जाएगी।
निष्कर्ष: जहाँ सरकार इसे बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी बता रही है, वहीं आम जनता पर इसका सीधा आर्थिक असर पड़ेगा। खासकर उन लोगों के लिए जो व्यवसाय या नौकरी के लिए रोजाना इन पुलों का उपयोग करते हैं।