BNT Desk: मोकामा के कद्दावर नेता अनंत सिंह और चर्चित गायक गुंजन सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) मामले में शुक्रवार को जिला जज राजेंद्र पांडेय की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अनंत सिंह को किसी भी प्रकार की फौरी राहत देने से साफ मना कर दिया है। कोर्ट ने न केवल गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग खारिज की, बल्कि मामले की गहराई को देखते हुए पुलिस से केस डायरी भी तलब की है।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलील
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश पाठक ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि:
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वायरल वीडियो को देखने से स्पष्ट होता है कि इसमें विधायक अनंत सिंह का कोई दोष नहीं है।
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यह पूरी घटना एक राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है और जानबूझकर उन पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
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वीडियो के साथ छेड़छाड़ (Tampering) की गई है और इसमें कहीं भी कोई अश्लील गतिविधि या मुजरा नहीं दिख रहा है।
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जिस हिस्से में अश्लील गीत बज रहे हैं, वहां अनंत सिंह मौजूद ही नहीं थे।
प्रतिबंधित हथियारों की आशंका
वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से जिला लोक अभियोजक देव वंश गिरी उर्फ भानु गिरी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि:
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2 और 3 मई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जो मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव का है।
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यह कार्यक्रम गुड्डू राय के घर आयोजित ‘जनेऊ’ का था, जिसमें अनंत सिंह और गुंजन सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे।
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वीडियो में प्रतिबंधित और आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन होता दिख रहा है, जो कानूनन जुर्म है।
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वीडियो की सत्यता और हथियारों की प्रामाणिकता की पुष्टि के लिए इसे एफएसएल (FSL) जांच के लिए भेजा जा रहा है।
अब 20 मई पर टिकी नजरें
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि जब तक पुलिस की ‘केस डायरी’ सामने नहीं आ जाती, तब तक कोई फैसला या राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पुलिस को डायरी पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को होगी।
9 लोगों पर है एफआईआर
आपको बता दें कि यह मामला मीरगंज थाने में दर्ज है, जिसमें विधायक अनंत सिंह, गायक गुंजन सिंह समेत कुल 9 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की थी।
कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गिरफ्तारी पर रोक न लगने से उन पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है। अब सबकी निगाहें 20 मई को होने वाली सुनवाई और पुलिस की केस डायरी पर टिकी हैं।