BNT Desk: बिहार में अब सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की रफ्तार तेज होने वाली है। सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति में महत्वपूर्ण संशोधनों को हरी झंडी दे दी है। इस नीति के जरिए सरकार न केवल प्रदूषण कम करना चाहती है, बल्कि आम नागरिकों को आर्थिक राहत देकर उन्हें पर्यावरण के अनुकूल वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित भी कर रही है।
महिलाओं के लिए खास तोहफा:
नई नीति में महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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सब्सिडी: यदि कोई महिला अपने नाम पर इलेक्ट्रिक कार खरीदती है, तो उसे सरकार की ओर से 1 लाख रुपये तक की नकद सब्सिडी दी जाएगी।
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उद्देश्य: इस पहल का मकसद परिवहन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें तकनीकी रूप से उन्नत वाहनों की ओर प्रेरित करना है।
मोटर व्हीकल टैक्स में 50% की भारी बचत
गाड़ी खरीदने के बाद रजिस्ट्रेशन और टैक्स का खर्च एक बड़ा बोझ होता है। सरकार ने इस बोझ को आधा कर दिया है:
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बिहार में रजिस्टर होने वाले सभी प्रकार के इलेक्ट्रिक वाहनों (दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया) पर मोटर व्हीकल टैक्स में 50% की छूट मिलेगी।
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यह छूट व्यक्तिगत उपयोग और व्यावसायिक उपयोग, दोनों तरह के वाहनों पर लागू होगी।
2030 तक का ‘ग्रीन’ विजन
बिहार सरकार ने इस नीति के माध्यम से भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
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30% इलेक्ट्रिक गाड़ियां: सरकार का लक्ष्य है कि साल 2030 तक बिहार में बिकने वाली हर 100 नई गाड़ियों में से कम से कम 30 गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों।
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ईंधन की बचत: इस बदलाव से बिहार में हर साल लगभग 10 करोड़ लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत होने का अनुमान है।
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प्रदूषण मुक्त बिहार: वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करके राज्य के शहरों की हवा को स्वच्छ बनाना प्राथमिकता है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
नीति के तहत केवल सब्सिडी ही नहीं, बल्कि राज्य भर में चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने की योजना भी शामिल है। पेट्रोल पंपों, सार्वजनिक पार्किंग और प्रमुख हाईवे पर चार्जिंग पॉइंट बनाए जाएंगे ताकि इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों को रास्ते में किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
क्यों खास है यह फैसला?
यह संशोधन नीति बिहार को ‘क्लीन एनर्जी’ (स्वच्छ ऊर्जा) के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करेगी। भारी सब्सिडी और टैक्स छूट के बाद अब इलेक्ट्रिक गाड़ियां मध्यम वर्ग की पहुंच में होंगी, जिससे न केवल जेब पर बोझ कम होगा बल्कि आने वाली पीढ़ी को एक प्रदूषण मुक्त वातावरण भी मिल सकेगा।