BNT Desk: बिहार में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मुजफ्फरपुर AK-47 बरामदगी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि एनआईए की टीम ने गुरुवार देर रात वैशाली जिले के नगर थाना क्षेत्र स्थित जौहरी बाजार में उनके कार्यालय के पास से उन्हें हिरासत में लिया और अपने साथ ले गई।
यह कार्रवाई केस नंबर RC-11/2024/NIA/DLI के तहत की गई है। इस मामले की जांच एनआईए कर रही है। अधिवक्ता की गिरफ्तारी के बाद उनके परिवार ने एजेंसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि एनआईए जानबूझकर संदीप कुमार सिन्हा को इस मामले में फंसा रही है। परिवार ने पिछली छापेमारी और कथित बरामदगी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
जौहरी बाजार स्थित कार्यालय के पास से गिरफ्तारी
जानकारी के मुताबिक, एनआईए की टीम ने वैशाली के नगर थाना क्षेत्र में जौहरी बाजार स्थित अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा के कार्यालय के पास कार्रवाई की। टीम उन्हें गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। यह मामला वर्ष 2024 में मुजफ्फरपुर के फकुली थाना क्षेत्र में AK-47 राइफल और उससे जुड़े सामान की बरामदगी से जुड़ा है।
इस मामले में बिहार पुलिस की शुरुआती जांच के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अगस्त 2024 में जांच अपने हाथ में ली थी। इसके बाद से एजेंसी हथियारों की खरीद-बिक्री और कथित तस्करी नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
एनआईए ने अक्टूबर 2025 में जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में संदीप कुमार सिन्हा उर्फ छोटू लाला को गिरफ्तार मुख्य आरोपी विकास कुमार का करीबी सहयोगी और कथित हथियार तस्करी नेटवर्क का सक्रिय सदस्य बताया था। एजेंसी ने उस समय उनके वैशाली स्थित घर से हथियार, कारतूस और नकदी बरामद करने की जानकारी भी दी थी।
पिता का आरोप- दूसरी रेड में घर के बाहर रखी गई रिवॉल्वर
अधिवक्ता की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता ने एनआईए की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसी की टीम इससे पहले भी दो बार उनके घर पर छापेमारी कर चुकी है। पिता के मुताबिक, पहली बार हुई छापेमारी में घर से कोई आपत्तिजनक सामान बरामद नहीं हुआ था। परिवार का आरोप है कि दूसरी बार छापेमारी के दौरान एनआईए ने घर के बाहर स्थित एक कमरे में रिवॉल्वर रखकर उसकी बरामदगी दिखाई। पिता ने दावा किया कि यह हथियार वहां पहले से मौजूद नहीं था और एजेंसी ने जानबूझकर उसे रखकर जब्ती की कार्रवाई की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरी छापेमारी के दौरान एनआईए की टीम उनकी लाइसेंसी बंदूक और कुछ नकदी भी अपने साथ ले गई थी। परिवार का कहना है कि इस कार्रवाई को लेकर उन्होंने एनआईए के महानिदेशक से लेकर प्रधानमंत्री तक शिकायत की है। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। एनआईए की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चचेरे भाई ने कहा- जब्ती सूची को एनआईए कोर्ट में दी चुनौती
गिरफ्तार अधिवक्ता के चचेरे भाई ने भी एनआईए की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि दूसरी बार की गई छापेमारी और जब्ती सूची को पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत में चुनौती दी गई है। परिवार के अनुसार, इस मामले में अदालत ने एनआईए से जवाब मांगा है। चचेरे भाई का आरोप है कि इसी कानूनी चुनौती के कारण एजेंसी ने दुर्भावना से प्रेरित होकर संदीप कुमार सिन्हा को गिरफ्तार किया है। परिवार का कहना है कि अधिवक्ता पहले से ही एनआईए की कार्रवाई को अदालत में चुनौती दे रहे थे और अब उनकी गिरफ्तारी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अदालत में दायर याचिका और उस पर हुई कार्यवाही का विस्तृत आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने पर ही इस दावे की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
NIA ने पहले भी घर से हथियार और नकदी बरामद करने का दावा किया था
इस मामले में एनआईए की ओर से 9 अक्टूबर 2025 को जारी प्रेस विज्ञप्ति महत्वपूर्ण है। एजेंसी ने बताया था कि संदीप कुमार सिन्हा उर्फ छोटू लाला के वैशाली स्थित घर की तलाशी के दौरान एक 9 एमएम पिस्टल, 18 जिंदा कारतूस, दो पिस्टल मैगजीन, एक डबल बैरल 12 बोर बंदूक, 35 कारतूस और 4.21 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे।
एनआईए ने उन्हें गिरफ्तार मुख्य आरोपी विकास कुमार का करीबी सहयोगी बताते हुए आरोप लगाया था कि वह हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए नागालैंड से अवैध हथियार और गोला-बारूद बिहार के अलग-अलग इलाकों में पहुंचाए जा रहे थे।
दूसरी तरफ, संदीप कुमार सिन्हा के परिजन इसी बरामदगी और छापेमारी की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उनका दावा है कि हथियार और नकदी की जब्ती गलत तरीके से दिखाई गई। ऐसे में अब जांच एजेंसी के साक्ष्य और परिवार की ओर से अदालत में दी गई चुनौती इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
क्या है मुजफ्फरपुर का AK-47 बरामदगी मामला?
यह मामला 7 मई 2024 को मुजफ्फरपुर जिले के फकुली थाना क्षेत्र में सामने आया था। पुलिस ने उस दिन विकास कुमार और सत्यम कुमार को गिरफ्तार किया था। शुरुआती कार्रवाई के दौरान उनके पास से AK-47 राइफल का बट और स्कोप बरामद होने की बात सामने आई थी।
पूछताछ के आधार पर पुलिस ने आगे कार्रवाई की और मुर्गघटिया पुल के पास छिपाकर रखी गई AK-47 राइफल तथा पांच जिंदा कारतूस बरामद किए थे। जांच में हथियार की खरीद और उसे बिहार तक पहुंचाने के कथित नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की गई।
बिहार पुलिस की शुरुआती जांच के बाद केंद्र सरकार ने मामला एनआईए को सौंप दिया। एजेंसी ने हथियारों की खरीद, बिक्री, आपूर्ति और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच शुरू की। इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और आर्म्स एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं।
अब तक कई आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
एनआईए इस मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, शुरुआती चार आरोपियों में विकास कुमार, सत्यम कुमार, देवमणि राय उर्फ अनीश और मोहम्मद अहमद अंसारी शामिल थे। इसके बाद मंजूर खान समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
फरवरी 2026 में एनआईए ने मंजूर खान के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल करने की जानकारी दी थी। बाद में इस मामले में कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत और अन्य संदिग्धों की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ी। अगस्त 2026 में एजेंसी ने फरार आरोपी भैरव त्रिपाठी और करमुल्लाह की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी।
अधिवक्ता की गिरफ्तारी के बाद आगे क्या?
अधिवक्ता संदीप कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। एनआईए उनसे पूछताछ कर हथियारों की कथित तस्करी और नेटवर्क में उनकी भूमिका से जुड़े तथ्यों की जांच कर सकती है। वहीं, परिवार की ओर से छापेमारी और जब्ती सूची को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी कानूनी स्तर पर सुनवाई हो सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले में दो पक्ष सामने हैं। एनआईए पहले अपनी प्रेस विज्ञप्ति में संदीप कुमार सिन्हा को हथियार तस्करी नेटवर्क से जुड़ा बता चुकी है, जबकि उनके परिजन एजेंसी की कार्रवाई को गलत और दुर्भावनापूर्ण बता रहे हैं। इन आरोपों और दावों की अंतिम सच्चाई जांच तथा अदालत की कार्यवाही से ही सामने आएगी।