बिहार: कैसे टूटी CO-RO की 52 दिनों की हड़ताल? जानें राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच हुआ ‘सीक्रेट एग्रीमेंट’

BiharNewsAuthor
5 Min Read

BNT Desk: बिहार में जमीन-जायदाद के काम के लिए पिछले दो महीनों से अंचल कार्यालयों (Block Offices) के चक्कर काट रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। 9 मार्च 2026 से जारी राजस्व अधिकारियों की ऐतिहासिक 52 दिनों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है। लेकिन क्या यह सुलह इतनी सहज थी? पर्दे के पीछे ऐसी कौन सी ‘स्क्रिप्ट’ लिखी गई जिसने अधिकारियों को झुकने पर मजबूर किया या फिर सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े? आज के इस विशेष विश्लेषण में हम उस ‘इनसाइड स्टोरी’ को खोलेंगे जो सरकारी प्रेस नोट में नहीं बताई गई।

वो दो चेहरे, जिनके हटते ही बदली फिजा

इस हड़ताल के टूटने की नींव उसी दिन पड़ गई थी जब बिहार की सत्ता का समीकरण बदला और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों की नाराजगी के पीछे दो प्रमुख नाम थे:

  1. विजय सिन्हा: पिछली सरकार में राजस्व मंत्री रहते हुए विजय सिन्हा ने अधिकारियों के प्रति बेहद सख्त रुख अपनाया था। अधिकारियों के एक बड़े वर्ग में उन्हें लेकर काफी गुस्सा था। नई सरकार के गठन के समय उन्हें इस विभाग से दूर रखना एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना गया।

  2. सी.के. अनिल (पूर्व प्रधान सचिव): राजस्व विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव सी.के. अनिल और अधिकारियों के बीच का ‘ईगो क्लैश’ किसी से छिपा नहीं था। जैसे ही नई सरकार ने सी.के. अनिल का तबादला किया, यह साफ हो गया कि सरकार अब टकराव नहीं, बल्कि संवाद चाहती है।

इन दो चेहरों के सीन से हटते ही समझौते की मेज सज गई। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और विभाग के नए सचिव जय सिंह की एंट्री ने ‘डैमेज कंट्रोल’ का काम किया और अधिकारियों को भरोसे में लिया।

क्या था वो ‘सीक्रेट समझौता’?

30 अप्रैल की देर शाम जब बिहार राजस्व सेवा महासंघ ने हड़ताल स्थगित करने का एलान किया, तो उसके पीछे कुछ ठोस आश्वासन थे:

  • कार्रवाई की वापसी: हड़ताल के दौरान जिन अधिकारियों पर निलंबन या अन्य दंडात्मक कार्रवाई की गई थी, उसे वापस लेने का भरोसा दिया गया है।

  • सैलरी का नुकसान नहीं: 52 दिनों की इस अनुपस्थिति को ‘उपार्जित अवकाश’ (Earned Leave) में बदला जाएगा, जिससे अधिकारियों की जेब पर आंच नहीं आएगी।

  • DCLR पद पर नियंत्रण: भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पद को पूरी तरह राजस्व विभाग के अधीन लाने की मांग पर सरकार ने ‘त्वरित कार्रवाई’ का वादा किया है।

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि संघ ने अपनी 11 सूत्री मांगों को छोड़ा नहीं है, बल्कि सरकार को 2 महीने का अल्टीमेटम दिया है। यदि समय रहते मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन दोबारा शुरू हो सकता है।

अब जनता की बारी और काम का भारी बोझ

हड़ताल खत्म होने के बाद अब असली परीक्षा अधिकारियों की है। 4 मई 2026 से सभी अधिकारी अपने कार्यालयों में बैठेंगे।

  • पेंडिंग मामलों का अंबार: पिछले 52 दिनों में लाखों की संख्या में दाखिल-खारिज (Mutation), एलपीसी और अन्य जमीन संबंधी मामले अटके हुए हैं।

  • विशेष निगरानी: सरकार ने साफ कर दिया है कि अब काम की रफ्तार धीमी नहीं होनी चाहिए। जिला स्तर पर अब काम की ‘विशेष निगरानी’ की जाएगी। यानी अब अगर लापरवाही हुई, तो अधिकारियों पर सीधी गाज गिर सकती है।

सम्राट चौधरी सरकार के लिए यह एक बड़ी जीत है कि उन्होंने बिना किसी बड़े बवाल के एक लंबे समय से चली आ रही हड़ताल को खत्म करा दिया। लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। क्या सरकार दो महीने के भीतर अधिकारियों की उन जटिल मांगों को पूरा कर पाएगी? और क्या अधिकारी जनता के पेंडिंग पड़े कामों को ईमानदारी से निपटाएंगे? बिहार की जनता फिलहाल इसी उम्मीद में है कि अब उनके अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने का सिलसिला खत्म होगा।

Share This Article