बिहार में क्या महिलाओं का यही है सम्मान? ऑपरेशन करके ठंड में फर्श पर सुलाया गया

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ऑपरेशन के बाद खुले बरामदे में महिला मरीज

BNT, Darbhanga: बिहार के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री विकास की लंबी – लंबी बातें करते हैं। महिला सम्मान और सशक्तिकरण जैसे शब्द हर भाषण में इस्तेमाल होता है। लेकिन,  दरभंगा से स्वास्थ्य विभाग की ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सभी बातों को सिर्फ बातें ही करार करेगी। जहां महिलाओं के सम्मान की बात होती है, वहीं ऑपरेशन के बाद 22 महिलाओं को फर्श पर लिटा दिया गया।

बुधवार की रात, जब दरभंगा में तापमान 10 डिग्री से नीचे जा चुका था, सदर पीएचसी में फैमिली प्लानिंग ऑपरेशन के बाद 22 महिलाओं को खुले बरामदे में फर्श पर लिटा दिया गया। न बेड मिला, न कंबल, न गर्माहट का कोई इंतजाम। सिर्फ गद्दे बिछाकर महिलाओं को छोड़ दिया गया।

मीना देवी (परिजन): “कंबल, मच्छरदानी भी नहीं मिली। अब किसको क्या बोलेंगे। जैसे रहना है रहेंगे। इन्फेक्शन होगा तो क्या करेंगे। अब सरकार जानें, क्या करना है।”

पूनम देवी (परिजन): “सरकार कहती है कि सब कुछ दिया है, अब आप ही देख लीजिए। क्या खुले आसमान में ओस में मरीज को रखेंगे। मोदी सरकार कहती है कि ये करते हैं, वो करते हैं, आप लोग ही हाल देख लीजिए। सिर्फ बाहर-बाहर ही काम करते हैं। दरभंगा के लिए कुछ नहीं करते हैं।”

वहीं, ड्यूटी पर तैनात डॉ. दीपक कुमार ने इस मामले पर सफाई दी और जगह की कमी के कारण सभी को बेड उपलब्ध नहीं हो पाया। मरीजों को गद्दे उपलब्ध कराए गए।

ऑपरेशन के बाद महिलाओं को विशेष देखभाल, साफ वार्ड, गर्माहट, मच्छरदानी जैसी अनिवार्य सुविधाओं की जरूरत होती है। लेकिन दरभंगा के सदर पीएचसी में चाय-पानी तक का इंतजाम नहीं था। रातभर महिलाएं ठंड और दर्द से कराहती रहीं, परिजन असहाय होकर देखते रहे।

मंगल पांडेय जी से सवाल है!

विकास के दावे करने वाली बिहार सरकार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय जी से सवाल है, क्या यही है आपका परिवार नियोजन कार्यक्रम? बिल्डिंग बनाने के दावे होते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाएं खोजने पर भी दिखाई नहीं देती। परिजनों को बाहर से हजारों रुपए की दवा खरीदनी पड़ती है, जबकि अस्पताल से सिर्फ दो दिन की दवा मिलती है।

जब सरकार महिलाओं को परिवार नियोजन के लिए प्रोत्साहित करती है, तो क्या उनके सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं बनती? ऐसी व्यवस्था में महिलाएं कैसे भरोसा करेंगी?

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच हो, जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो और अस्पताल में तत्काल बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए।

सवाल यह है कि विकसित बिहार के नारे के बीच क्या महिलाओं को यही सम्मान मिलेगा? स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जवाब की उम्मीद है। दरभंगा की महिलाओं को न्याय कब मिलेगा?”

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