पटना: चना दाल सप्लाई के नाम पर 27.36 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी, RJD MLC सुनील कुमार सिंह की पत्नी-बेटे के खिलाफ चार्जशीट

BNT
By
7 Min Read

BNT Desk: पटना में भारत चना दाल की आपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये लेने और कथित तौर पर दाल की सप्लाई नहीं करने से जुड़े मामले में पुलिस ने RJD MLC सुनील कुमार सिंह की पत्नी वंदना सिंह और उनके बेटे यशस्वी सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। मामला गर्दनीबाग थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य सामने आए, जिसके आधार पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट ने दोनों को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है।

 

चना दाल की सप्लाई के लिए जमा कराई गई थी रकम

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला चना दाल की खरीद और उसकी आपूर्ति से जुड़ा है। गर्दनीबाग थाना क्षेत्र की मगध विहार कॉलोनी की रहने वाली मेघा को आशा इंटरप्राइजेज की प्रोपराइटर बताया गया है। वह फल, सब्जी और खाद्यान्न अलग-अलग सप्लायर से खरीदकर बाजार में बेचने का कारोबार करती हैं। इसी कारोबारी गतिविधि के दौरान उन्होंने भारत चना दाल की खरीद के लिए संबंधित समितियों से संपर्क किया था। शिकायत के मुताबिक, दाल की आपूर्ति के लिए वंदना सिंह से जुड़ी जय माता दी कृषक सेवा स्वालाभी सहकारी समिति लिमिटेड के खाते में 23.65 लाख रुपये जमा किए गए थे। आरोप है कि रकम जमा किए जाने के बाद भी तय शर्तों के अनुसार चना दाल की आपूर्ति नहीं की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि काफी समय बीत जाने के बावजूद न तो उन्हें दाल मिली और न ही जमा की गई रकम वापस की गई।

 

यशस्वी सिंह पर 3.71 लाख रुपये लेने का आरोप

मामले में दूसरा आरोप सुनील कुमार सिंह के बेटे यशस्वी सिंह से जुड़ा है। शिकायतकर्ता मेघा के अनुसार, चना दाल की आपूर्ति के नाम पर यशस्वी सिंह से जुड़े पक्ष को भी 3.71 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद निर्धारित दाल की आपूर्ति नहीं की गई और भुगतान की गई राशि भी वापस नहीं की गई। यशस्वी सिंह को सारण फल-सब्जी कृषक स्वालाभी सेवा समिति लिमिटेड से जुड़े पद पर बताया गया है। इस तरह शिकायत में दो अलग-अलग लेनदेन का उल्लेख किया गया है। एक मामले में 23.65 लाख रुपये और दूसरे मामले में 3.71 लाख रुपये की राशि का आरोप है। दोनों रकम को मिलाने पर कुल राशि 27.36 लाख रुपये होती है।

 

एक जून 2025 को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

शिकायतकर्ता मेघा ने इन आरोपों को लेकर एक जून 2025 को गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर रकम के लेनदेन, संबंधित समितियों, दाल की आपूर्ति और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की। पुलिस ने यह भी जांच की कि शिकायतकर्ता की ओर से जिन रकमों का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है, उनका संबंध चना दाल की आपूर्ति से था या नहीं। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है।

 

पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने का किया दावा

पुलिस की ओर से कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में कहा गया है कि अनुसंधान के दौरान दोनों आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य सामने आए। इसी आधार पर वंदना सिंह और यशस्वी सिंह को मामले में आरोपित करते हुए न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई। चार्जशीट दाखिल होना पुलिस जांच के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा करता है। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कोर्ट की ओर से दोनों को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से मेघा के पति मनीष सिंह यादव ने भी बताया कि पुलिस ने मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। उनके मुताबिक, चार्जशीट के बाद न्यायालय ने वंदना सिंह और यशस्वी सिंह को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है।

 

27.36 लाख रुपये के लेनदेन का मामला

मामले में दर्ज शिकायत के अनुसार, वंदना सिंह से जुड़े पक्ष के खिलाफ 23.65 लाख रुपये की राशि का आरोप है। वहीं यशस्वी सिंह से जुड़े मामले में 3.71 लाख रुपये का आरोप लगाया गया है। दोनों रकम को जोड़ने पर कुल राशि 27.36 लाख रुपये होती है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यह भुगतान भारत चना दाल की आपूर्ति के लिए किया गया था, लेकिन कथित तौर पर सामान उपलब्ध नहीं कराया गया और रकम भी वापस नहीं की गई। पुलिस जांच के बाद अब यह मामला अदालत के सामने है। चार्जशीट में पुलिस ने जिन तथ्यों और साक्ष्यों का उल्लेख किया है, उनकी न्यायिक जांच आगे की प्रक्रिया में होगी।

 

चार्जशीट अंतिम दोषसिद्धि नहीं

इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं होते। चार्जशीट पुलिस जांच का निष्कर्ष है, जबकि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध होना न्यायालय में चलने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के मूल्यांकन पर निर्भर करता है। फिलहाल कोर्ट ने वंदना सिंह और यशस्वी सिंह को उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है। आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी। मामले में आरोपित पक्ष का विस्तृत जवाब या बचाव अदालत के समक्ष आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

Share This Article