BNT Desk: बिहार में पंचायत आम चुनाव 2026 की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। चुनाव से पहले पंचायतों के परिसीमन के साथ आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी प्रक्रिया पर काम चल रहा है। खास तौर पर अत्यंत पिछड़ा वर्ग यानी EBC के लिए आरक्षण के नए आधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, इस बार EBC आरक्षण का आधार केवल उपलब्ध आंकड़ों तक सीमित नहीं रखने की तैयारी है। इसके लिए सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि अलग-अलग क्षेत्रों और जातियों को पंचायत स्तर पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षण की कितनी आवश्यकता है। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर 2026 पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन और आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया के दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। आयोग ने 15 जून 2026 को आरक्षण निर्धारण के लिए जनसंख्या संबंधी प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन किया था।
पंचायती राज विभाग ने तैयार किए मानक
EBC आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से मानक और गाइडलाइन तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन्हीं मानकों के आधार पर राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग अध्ययन करेगा। इस अध्ययन में अत्यंत पिछड़ा वर्ग में शामिल करीब 122 जातियों की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति का आकलन किए जाने की बात कही गई है। इसके लिए संबंधित गांवों और क्षेत्रों में सर्वे कराया जा सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अलग-अलग इलाकों में EBC वर्ग के लोगों की राजनीतिक भागीदारी की स्थिति क्या है और किन क्षेत्रों में आरक्षण की जरूरत अधिक है।
सर्वे के बाद तय हो सकता है आरक्षण का आधार
पंचायत चुनाव में EBC को कितना आरक्षण मिलेगा, इसका अंतिम आधार अध्ययन और आयोग की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है। आयोग अपने अध्ययन में निर्धारित मानकों के आधार पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अनुशंसा सरकार को देगा। रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से पंचायती राज विभाग तक पहुंचने और आगे निर्वाचन विभाग को भेजे जाने की प्रक्रिया बताई गई है। यानी आरक्षण की प्रक्रिया में कई स्तर शामिल होंगे। पहले क्षेत्रवार और वर्गवार स्थिति का अध्ययन होगा, फिर आयोग उसके आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और उसके बाद संबंधित विभागों के स्तर पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।
50 फीसदी की सीमा सबसे अहम
पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया में कुल आरक्षण की सीमा एक महत्वपूर्ण पहलू है। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, बिहार पंचायत राज अधिनियम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए कुल आरक्षण अधिकतम 50 प्रतिशत तक रखा गया है। आयोग की जानकारी के मुताबिक पिछड़े वर्ग के लिए SC और ST के आरक्षण के बाद बचे स्थानों में अधिकतम 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाने का प्रावधान है। आरक्षण व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के संदर्भ में EBC के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अलग से अध्ययन किए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके तहत यह देखना होगा कि किन समूहों और क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व की स्थिति क्या है और आरक्षण का आधार किस तरह तय किया जाए।
2021 के चुनाव में पिछड़ा वर्ग के लिए था 20 प्रतिशत प्रावधान
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2021 के पंचायत आम चुनाव में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों की व्यवस्था थी। ग्राम पंचायत सदस्य के कुल पदों में BC श्रेणी के महिला और अन्य पदों को मिलाकर 16.15 प्रतिशत के आसपास आरक्षण दर्ज किया गया था, जबकि अलग-अलग पदों पर आंकड़े अलग रहे। आयोग के नियमों में पिछड़ा वर्ग के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान दर्ज है। आगामी चुनाव में EBC के लिए आरक्षण का वास्तविक स्वरूप और प्रतिशत किस तरह तय होगा, यह संबंधित अध्ययन और अंतिम प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित प्रतिशत को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
पंचायत को आधार इकाई बनाने की तैयारी
आरक्षण निर्धारण में स्थानीय स्तर के आंकड़ों को महत्व दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसका मतलब यह है कि केवल पूरे राज्य की औसत आबादी के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पंचायत स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को भी देखा जा सकता है। अगर परिसीमन के बाद पंचायतों की सीमाओं और संख्या में बदलाव होता है, तो आरक्षित पंचायतों और सीटों की संख्या पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग पहले से ही 2026 के पंचायत परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया पर काम कर रहा है और जुलाई 2026 में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद से संबंधित परिसीमन अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।
परिसीमन के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
बिहार में पंचायत चुनाव 2026 के लिए परिसीमन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चरण है। राज्य निर्वाचन आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में पंचायत परिसीमन से संबंधित कई निर्देश और अधिसूचनाएं दर्ज हैं। पंचायतों की सीमाओं और निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण के बाद आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। परिसीमन में जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। आयोग की जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के गठन में जनसंख्या को आधार बनाया जाता है। ऐसे में आने वाले पंचायत चुनाव में दो प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी—पहली पंचायतों का नया परिसीमन और दूसरी आरक्षण का निर्धारण। EBC के लिए सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के अध्ययन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में कितनी सीटें आरक्षित होंगी। फिलहाल चुनाव की तैयारी के बीच EBC आरक्षण को लेकर सर्वे और अध्ययन की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। अंतिम आरक्षण व्यवस्था आयोग की रिपोर्ट, सरकारी प्रक्रिया और निर्वाचन संबंधी निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगी।