BNT Desk: पटना मेट्रो के रुकनपुरा स्टेशन पर निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टेशन के अंडरग्राउंड हिस्से को मजबूत बनाने के लिए डायफ्राम वॉल यानी डी-वॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत साइट पर तैयार किए गए बड़े-बड़े स्टील री-इन्फोर्समेंट केज को भारी क्षमता वाली क्रेन की मदद से उठाकर निर्धारित स्थान पर स्थापित किया जा रहा है। इंजीनियरों और तकनीकी टीम की निगरानी में स्टील केज की फिटिंग का काम किया जा रहा है, ताकि अंडरग्राउंड स्टेशन की संरचना को मजबूत आधार मिल सके।
भारी क्रेन से स्टील केज की सटीक फिटिंग
रुकनपुरा स्टेशन के निर्माण में डायफ्राम वॉल की अहम भूमिका है। अंडरग्राउंड स्टेशन के चारों तरफ मजबूत दीवार तैयार करने के लिए पहले स्टील री-इन्फोर्समेंट केज तैयार किए जाते हैं। इसके बाद इन भारी और बड़े आकार के केज को क्रेन की मदद से उठाकर निर्माण स्थल पर लाया जाता है। साइट पर मौजूद इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी केज को निर्धारित स्थान पर सही तरीके से स्थापित करने की प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं। इस दौरान स्टील संरचना की स्थिति, उसकी फिटिंग और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। निर्माण के इस चरण में थोड़ी भी स्थिति संबंधी गड़बड़ी आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए केज की सटीक स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
डी-वॉल से मजबूत होगा अंडरग्राउंड स्टेशन
स्टील री-इन्फोर्समेंट केज की स्थापना के बाद डायफ्राम वॉल निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी। धीरे-धीरे यही संरचना अंडरग्राउंड स्टेशन की दीवारों और पूरे ढांचे को मजबूती देने का काम करेगी। मेट्रो स्टेशन के भूमिगत हिस्से के निर्माण में डी-वॉल को महत्वपूर्ण संरचनात्मक हिस्सा माना जाता है। रुकनपुरा स्टेशन पर भी निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। हर चरण में स्टील संरचनाओं की सही स्थिति और मजबूती सुनिश्चित की जा रही है, जिससे आगे होने वाले अंडरग्राउंड निर्माण के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके।
मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना जंक्शन तक 5.2 किमी टनलिंग पूरी
पटना मेट्रो परियोजना के दूसरे हिस्से में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। मोइन-उल-हक स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से पटना जंक्शन मेट्रो स्टेशन तक अप लाइन में करीब 5.2 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनलिंग का काम पूरा हो गया है। यह उपलब्धि पीसी-03 के तहत नौवें टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम ब्रेकथ्रू के साथ हासिल हुई। इस ब्रेकथ्रू के साथ टीबीएम-1 ने इस हिस्से में अपनी टनलिंग यात्रा पूरी कर ली है। भूमिगत सुरंग का यह हिस्सा पटना के प्रमुख क्षेत्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्माण चरण को दर्शाता है। मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना जंक्शन तक अंडरग्राउंड कॉरिडोर तैयार होने के साथ इस रूट पर आगे के निर्माण कार्य को भी गति मिलने की उम्मीद है। टनलिंग का काम पूरा होना मेट्रो परियोजना के भूमिगत हिस्से के निर्माण में एक अहम चरण है।
पटना जू के पास स्टेशन के डिजाइन में बदलाव
पटना जू के पास भी मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। यहां स्टेशन के डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, पटना जू के पास तैयार किए गए मेट्रो शाफ्ट से सुरंग निर्माण के लिए चार टीबीएम नवंबर में उतारी जाएंगी। इनमें से दो टीबीएम पूरब दिशा की ओर जाएंगी। इन मशीनों के जरिए पटना जंक्शन की तरफ अप और डाउन सुरंग तैयार की जाएगी। वहीं, दो अन्य टीबीएम पश्चिम दिशा की ओर रुकनपुरा स्टेशन तक जाएंगी और इस दिशा में भी अप और डाउन सुरंग का निर्माण करेंगी। इस तरह पटना जू के पास तैयार किया जा रहा शाफ्ट भूमिगत सुरंग निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में इस्तेमाल होगा। चार टीबीएम के जरिए दोनों दिशाओं में सुरंग निर्माण की योजना से अलग-अलग हिस्सों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने का काम आगे बढ़ेगा।
रुकनपुरा से पटना जंक्शन तक बढ़ेगा अंडरग्राउंड नेटवर्क
रुकनपुरा स्टेशन पर डी-वॉल निर्माण, मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना जंक्शन तक टनलिंग पूरी होने और पटना जू के पास चार टीबीएम उतारने की तैयारी से पटना मेट्रो के अंडरग्राउंड नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे काम की तस्वीर सामने आती है। रुकनपुरा स्टेशन पर फिलहाल भारी स्टील री-इन्फोर्समेंट केज की स्थापना का काम चल रहा है। वहीं, पटना जंक्शन की दिशा में टनलिंग का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। पटना जू के पास चार टीबीएम के प्रस्तावित इस्तेमाल के बाद पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में सुरंग निर्माण को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण का अगला चरण पूरा करने में मदद मिलेगी।