BNT Desk: गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है, लेकिन कई परिवारों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बाढ़ राहत अभियान के आठवें दिन भी प्रभावित लोगों को जरूरी सामान उपलब्ध कराने का सिलसिला जारी रहा। समाजसेवी अजय सिंह की टीम ने शुक्रवार को उन इलाकों का दौरा किया, जहां से त्रिपाल और राहत सामग्री की जरूरत की सूचना मिल रही थी। टीम ने अलग-अलग पंचायतों और गांवों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों के बीच त्रिपाल और सूखा राशन वितरित किया।
जलस्तर घटा, फिर भी राहत सामग्री की जरूरत
गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कई परिवार अभी भी अपने घरों से दूर सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। बाढ़ के कारण कई परिवारों के घर और घरेलू सामान प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल तौर पर त्रिपाल, भोजन और अन्य जरूरी सामान की आवश्यकता बनी हुई है। इसी को देखते हुए अजय सिंह की टीम ने राहत अभियान को जारी रखा। टीम के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय लोगों से स्थिति की जानकारी ली और जिन जगहों पर त्रिपाल की कमी बताई गई, वहां सहायता पहुंचाने का प्रयास किया।
मैनपुरा गांव में जरूरतमंदों को मिला त्रिपाल
आरा प्रखंड के बागीपाकड़ पंचायत अंतर्गत मैनपुरा गांव में भी टीम ने जरूरतमंद परिवारों के बीच त्रिपाल का वितरण किया। बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से रहने में परेशानी न हो, इसके लिए त्रिपाल उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा सुंदरपुर बरजा, दरियापुर, सिंघीतला और धमार पंचायत में भी राहत अभियान चलाया गया। टीम के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित परिवारों तक पहुंचकर उनकी जरूरतों की जानकारी ली और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार राहत सामग्री वितरित की।
छोटका और बड़का धर्मपुरा में भी पहुंची मदद
अगरसंडा पंचायत के छोटका धर्मपुरा और बड़का धर्मपुरा में भी अजय सिंह की टीम ने राहत सामग्री पहुंचाई। इन इलाकों में बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच त्रिपाल का वितरण किया गया। टीम का कहना है कि राहत अभियान केवल एक जगह तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। जिन पंचायतों और गांवों से जरूरत की सूचना मिल रही है, वहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के माध्यम से स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। इसके बाद जरूरत के मुताबिक सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
बड़हरा और आरा के अन्य इलाकों में भी सर्वे
बड़हरा और आरा प्रखंड के दूसरे बाढ़ प्रभावित पंचायतों में भी कार्यकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर स्थिति की जानकारी ली। टीम ने उन परिवारों को चिन्हित करने का प्रयास किया, जिन्हें अभी भी रहने या भोजन से जुड़ी सहायता की जरूरत है। राहत अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के मुताबिक, जलस्तर घटने के बाद राहत कार्य की प्राथमिकताएं कुछ बदल गई हैं। अब ऐसे परिवारों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जो बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद अपने घरों में वापस नहीं लौट पाए हैं और फिलहाल अस्थायी ठिकानों पर रह रहे हैं।
आठवें दिन भी जारी रहा राहत अभियान
अजय सिंह की टीम पिछले कई दिनों से लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य कर रही है। आठवें दिन भी अभियान जारी रहा। हालांकि जलस्तर में कमी आने के कारण हालात पहले की तुलना में कुछ बेहतर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों की जरूरतों को देखते हुए राहत कार्य को पूरी तरह रोकने के बजाय उसे जरूरत के हिसाब से जारी रखा जा रहा है। टीम की ओर से प्रभावित क्षेत्रों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर ऐसे स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जहां त्रिपाल या सूखा राशन की तत्काल जरूरत है। इसके बाद कार्यकर्ताओं को वहां भेजकर सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
सामान्य स्थिति लौटने तक मदद जारी रखने की बात
समाजसेवी अजय सिंह ने कहा कि गंगा के जलस्तर में कमी आना राहत की अच्छी खबर है, लेकिन इससे बाढ़ प्रभावित परिवारों की सभी समस्याएं तुरंत खत्म नहीं हो जातीं। जब तक लोग पूरी तरह सामान्य स्थिति में वापस नहीं लौटते, तब तक उनकी जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों से त्रिपाल या अन्य आवश्यक सहायता की जरूरत की सूचना मिलेगी, वहां टीम के माध्यम से मदद पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा। उनका कहना है कि राहत अभियान का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायता पहुंचाना है।
फिलहाल गंगा के जलस्तर में गिरावट के बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी है। प्रशासनिक स्तर के प्रयासों के साथ सामाजिक संगठनों और समाजसेवियों की ओर से भी प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में जलस्तर और घटने पर लोगों के घर लौटने की स्थिति बन सकती है, लेकिन तब तक अस्थायी ठिकानों पर रह रहे परिवारों के लिए राहत सामग्री की जरूरत बनी रहने की संभावना है।