पटना: Covid-19 से मौत पर RT-PCR रिपोर्ट न होने के आधार पर मुआवजा रोकना गलत, पटना हाईकोर्ट ने दिए भुगतान के निर्देश

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BNT Desk: Covid-19 संक्रमण के दौरान हुई मौत के मामले में केवल तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकने को पटना हाईकोर्ट ने गलत करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में कोविड-19 को मौत का कारण बताया गया है, तो यह महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साक्ष्य माना जाएगा। केवल RT-PCR रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर मृतक की विधवा को कोविड सहायता राशि से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह फैसला न्यायमूर्ति आलोक कुमार की एकलपीठ ने आशा देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को मामले पर दोबारा विचार करने और पात्रता पाए जाने पर बिहार कोविड सहायता योजना, 2022 के तहत अनुग्रह राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

 

इलाज के दौरान हुई थी पति की मौत

मामला मुंगेर की आशा देवी से जुड़ा है। याचिका में बताया गया कि उनके पति अजय कुमार शर्मा की 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में उनकी मौत का कारण कोविड-19 दर्ज किया गया था। इसके बाद कोविड संक्रमण से हुई मौत के आधार पर परिवार को मिलने वाली सहायता राशि के लिए मामला आगे बढ़ा।

जिला प्रशासन की ओर से जारी मेमो संख्या 299, दिनांक 20 मार्च 2023 के जरिए अजय कुमार शर्मा का नाम कोविड से मृत लोगों की सूची में शामिल किया गया था। इतना ही नहीं, उनके मामले में अनुग्रह राशि भी आवंटित की गई थी। इसके बावजूद परिवार को राशि का भुगतान नहीं किया गया।

 

बार-बार आवेदन देने के बाद भी नहीं मिली राशि

याचिका के अनुसार, भुगतान नहीं होने के बाद आशा देवी ने संबंधित अधिकारियों के सामने कई बार अपनी बात रखी। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर के जिलाधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन दिया।

उनका कहना था कि जब अस्पताल के मृत्यु प्रमाण पत्र में कोविड-19 को मौत का कारण दर्ज किया गया है और जिला प्रशासन की सूची में भी मृतक का नाम शामिल किया जा चुका है, तो केवल एक तकनीकी कमी के आधार पर सहायता राशि रोकी नहीं जानी चाहिए।

इसके बावजूद मामले में गठित तीन सदस्यीय जिला स्वास्थ्य समिति ने RT-PCR रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया।

 

RT-PCR रिपोर्ट नहीं होने को बनाया गया आधार

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल RT-PCR रिपोर्ट को लेकर उठा। जिला स्वास्थ्य समिति ने रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर कोविड सहायता का दावा स्वीकार नहीं किया था।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के पत्र संख्या 186(11), दिनांक 9 मार्च 2022 में इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे। पत्र के अनुसार पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड नहीं होने या टेस्ट रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने को अपने आप में मुआवजा रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

इसके बावजूद आशा देवी के पति के मामले में RT-PCR रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने को दावा खारिज करने का आधार बनाया गया। इसी के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र माना महत्वपूर्ण साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने कोविड से मौत की पुष्टि के लिए उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों पर विचार किया। अदालत ने कहा कि अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अगर अस्पताल के रिकॉर्ड में कोविड-19 को मृत्यु का कारण दर्ज किया गया है और मृतक का नाम जिला स्तर पर स्वीकृत कोविड मृतकों की सूची में भी शामिल है, तो केवल RT-PCR रिपोर्ट के अभाव को आधार बनाकर सहायता राशि रोकना उचित नहीं होगा।

अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोविड प्रमाण पत्र या टेस्ट रिपोर्ट का अभाव हर मामले में अपने आप निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।

 

चार सप्ताह में दोबारा करना होगा मामले पर विचार

पटना हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को मामले पर चार सप्ताह के भीतर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि मामले की दोबारा जांच करते समय उपलब्ध दस्तावेजों और अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को ध्यान में रखा जाए।

यदि आशा देवी के पति का मामला बिहार कोविड सहायता योजना, 2022 के तहत पात्र पाया जाता है, तो उन्हें निर्धारित अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।

इस आदेश से उन परिवारों के लिए भी राहत की उम्मीद जगी है, जिनके परिजनों की कोविड काल में मौत हुई थी, लेकिन दस्तावेजों या टेस्ट रिपोर्ट से जुड़ी तकनीकी कमी के कारण उनके सहायता दावे अटक गए थे।

 

तकनीकी कमी से वास्तविक हक नहीं छीना जा सकता

कोर्ट के आदेश का मुख्य संदेश यही है कि कोविड सहायता जैसे मामलों में केवल कागजी या तकनीकी कमी के आधार पर पात्र व्यक्ति के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता। खासकर तब, जब अस्पताल का आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र कोविड-19 को मृत्यु का कारण बताता हो और प्रशासनिक रिकॉर्ड में भी मृतक को कोविड मृतकों की सूची में शामिल किया गया हो।

आशा देवी के मामले में अब संबंधित अधिकारियों को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार चार सप्ताह के भीतर दोबारा निर्णय लेना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि योजना के तहत पात्रता पूरी होने पर अनुग्रह राशि का भुगतान किस प्रक्रिया से किया जाता है।

यह फैसला कोविड-19 से जुड़ी सहायता राशि के मामलों में दस्तावेजों के मूल्यांकन और तकनीकी कमियों के आधार पर दावे खारिज करने को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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