पटना: बेऊर जेल में बड़ी कार्रवाई; निलंबित अधिकारियों के जेल में प्रवेश और साक्ष्य मिटाने के आरोप के बाद कारा विभाग सख्त, विभागीय जांच जारी

BNT
By
5 Min Read

BNT Desk: पटना के बेऊर केंद्रीय कारा में निलंबित अधिकारियों के कथित अनधिकृत प्रवेश और साक्ष्य मिटाने के आरोपों के बाद कारा विभाग ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस मामले में ड्यूटी पर तैनात चार कक्षपालों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, जेल के उपाधीक्षक सुधीर शर्मा को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। कारा विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

इन चार कक्षपालों को किया गया निलंबित

कारा विभाग ने जिन चार कक्षपालों पर कार्रवाई की है, उनमें संजीव गुप्ता, धीरज कुमार, उमेश कुमार और अजय जॉन मरांडी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में इनकी भूमिका संदिग्ध मानी गई। आरोप है कि ड्यूटी पर रहते हुए इन्होंने निलंबित अधिकारियों के जेल परिसर में प्रवेश को नहीं रोका। इसी आधार पर विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन्हें निलंबित करने का फैसला लिया। इसके अलावा उपाधीक्षक सुधीर शर्मा से भी पूरे मामले में जवाब मांगा गया है। विभाग को उनके स्पष्टीकरण का इंतजार है। इसके बाद उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

 

20 जून की छापेमारी के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले की शुरुआत 20 जून को हुई संयुक्त छापेमारी के बाद हुई। उस दिन कारा महानिदेशालय और जिला प्रशासन की टीम ने बेऊर केंद्रीय कारा में जांच की थी। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। रिपोर्ट में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद तत्कालीन मेडिकल अधिकारी, असिस्टेंट जेलर समेत पांच अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इन अधिकारियों को 2 जुलाई तक अपना प्रभार दूसरे अधिकारियों को सौंपने का निर्देश भी दिया गया था, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके।

 

साक्ष्य मिटाने की कोशिश का आरोप

कारा विभाग के अनुसार, निलंबन के बाद भी कुछ अधिकारी कथित तौर पर जेल परिसर में आते रहे। आरोप है कि उन्होंने जेल के रिकॉर्ड, दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की, जिससे जांच से जुड़े साक्ष्य प्रभावित हो सकते थे। जब यह जानकारी विभाग तक पहुंची, तब मामले की दोबारा जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि ड्यूटी पर मौजूद कुछ कर्मियों ने इन अधिकारियों के जेल में प्रवेश को नहीं रोका। इसके बाद चारों कक्षपालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, विभाग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि दस्तावेजों के साथ किस तरह की छेड़छाड़ हुई और इससे जांच पर कितना असर पड़ा। यह सभी बातें विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेंगी।

 

जांच का दायरा बढ़ाया गया

कारा विभाग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि केवल चार कक्षपालों की भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी और की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि जेल प्रशासन में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

जेल प्रशासन में बढ़ी हलचल

चार कक्षपालों के निलंबन और उपाधीक्षक को शोकॉज नोटिस मिलने के बाद बेऊर केंद्रीय कारा में हलचल बढ़ गई है। जेल प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी अब विभागीय जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। कारा विभाग ने साफ किया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाएगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजर विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

Share This Article