BNT Desk: बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व राजद नेता तेज प्रताप यादव की पार्टी की महिला प्रत्याशी वीणा मानवी को पटना की गांधी मैदान थाना पुलिस ने एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, अदालत में पेशी के बाद उन्हें राहत मिल गई। कोर्ट ने वर्ष 2009 से जुड़े एक मामले में उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
2009 के मामले में हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, वीणा मानवी के खिलाफ वर्ष 2009 में सिविल कोर्ट में एक परिवाद दायर किया गया था। इसी मामले में अदालत ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (जिसे आम बोलचाल में ‘लाल वारंट’ कहा जाता है) जारी किया था। वारंट के तामिला के लिए गांधी मैदान थाना पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, यह वारंट ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC-9, कोर्ट नंबर-26) द्वारा 26 फरवरी 2026 को जारी किया गया था। वीणा मानवी पर भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत संपत्ति के गबन और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप हैं। इसी दिन एसीजेएम-7 की अदालत में भी उनके खिलाफ दर्ज एक अन्य मामले में सुनवाई निर्धारित थी।
पहले से भी दर्ज हैं कई मामले
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वीणा मानवी के खिलाफ पहले भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्ष 2016 में कंकड़बाग थाना में जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम और साइबर अपराध से जुड़े मामलों का भी उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में है।
नोट: इन मामलों में आरोप दर्ज हैं। इनके अंतिम निपटारे का निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा किया जाना है।
गिरफ्तारी के दौरान हुआ हंगामा
गांधी मैदान थाना पुलिस जब वीणा मानवी को गिरफ्तार करने पहुंची तो वहां कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान वीणा मानवी भावुक हो गईं और विरोध जताया। इसके बाद पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले गई।
वकील ने उठाए सवाल
वीणा मानवी की अधिवक्ता निशा सिंह ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनकी मुवक्किल अदालत में कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही थीं, तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वकील के मुताबिक, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी पहले ही अदालत को दी जा चुकी थी।
अदालत से मिली राहत
मेडिकल जांच के बाद वीणा मानवी को अदालत में पेश किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने वर्ष 2009 के मामले में उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। फिलहाल मामले की आगे की सुनवाई न्यायालय में जारी रहेगी।