पटना: पूर्व सांसद आनंद मोहन का JDU पर सीधा और करारा हमला; कहा- “सिर्फ चुनाव के टिकट ही नहीं, बल्कि मंत्री पद भी करोड़ों रुपये में बिके”

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BNT Desk: बिहार की राजनीति में उस समय एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया, जब पूर्व सांसद और राज्य के कद्दावर नेताओं में शुमार आनंद मोहन ने सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) पर अब तक का सबसे तीखा, सीधा और सनसनीखेज हमला बोला। राजधानी पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक मंच से बोलते हुए आनंद मोहन ने जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ पार्टी के भीतर सक्रिय एक खास लॉबी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने खुले तौर पर और बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि जेडीयू के अंदर अब सिद्धांतों, नैतिकता और कार्यकर्ताओं की निष्ठा की कोई जगह नहीं बची है। उन्होंने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पार्टी में न केवल विधानसभा या लोकसभा चुनाव के टिकट बल्कि सरकार में शामिल होने के लिए बाकायदा मंत्री पद भी करोड़ों रुपये की भारी-भरकम डील करके बेचे गए हैं। इस बयान के सामने आते ही सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के गठन पर उठाए सवाल

आनंद मोहन केवल टिकट बेचने के आरोपों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने विशेष रूप से राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय के गठन और मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया को लेकर भी भारी तंज कसा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारना सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यक्तिगत लाभ और निजी हितों को सर्वोपरि रखा गया है। उन्होंने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘पार्टी के एक खास बाप-बेटे को खुद डॉक्टर और चौबीस घंटे विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। यही वजह है कि अपनी निजी सहूलियत और स्वार्थ के लिए निशांत को स्वास्थ्य मंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया गया है।’ आनंद मोहन का यह इशारा सीधे तौर पर जेडीयू के भीतर एक बेहद शक्तिशाली और प्रभावशाली परिवार की तरफ था, जिसने पार्टी के अंदर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

जेडीयू की “चांडाल चौकड़ी” पर निशाना

पूर्व सांसद ने पार्टी के भीतर नीतिगत निर्णय लेने वाली कोर कमेटी और मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द घूमने वाले कुछ चुनिंदा नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें “चांडाल चौकड़ी” की संज्ञा दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह कुछ खास और स्वार्थी नेताओं का एक ऐसा समूह बन चुका है, जो लगातार मुख्यमंत्री को जमीनी हकीकत से दूर रख रहा है और उन्हें गुमराह करने का काम कर रहा है। आनंद मोहन के अनुसार, यह चौकड़ी अपने निजी आर्थिक और राजनीतिक स्वार्थों को पूरा करने के लिए पूरी पार्टी को धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से बर्बादी की कगार पर धकेल रही है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर समय रहते इस चौकड़ी के प्रभाव को कम नहीं किया गया, तो जेडीयू का वजूद ही खतरे में पड़ जाएगा और सालों की मेहनत से बनी पार्टी बिखर जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में मची खलबली

आनंद मोहन के इस विस्फोटक और विवादित बयान के बाद बिहार के राजनीतिक हलकों में बयानबाजी का दौर बेहद तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को लपकते हुए सरकार से इस्तीफे और उच्च स्तरीय जांच की मांग शुरू कर दी है। विपक्ष का कहना है कि जब सरकार के अपने ही लोग इतने गंभीर आरोप लगा रहे हैं, तो इसमें कोई न कोई सच्चाई जरूर होगी। दूसरी तरफ, इस अचानक हुए हमले से जेडीयू पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता इस मामले पर कुछ भी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं, और इसे आनंद मोहन का निजी बयान बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, इस बयान ने बिहार एनडीए (NDA) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को एक बार फिर से चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं।

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