BNT Desk: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने देश के लाखों छात्र-छात्राओं, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। CBSE बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद अक्सर कई छात्र अपने अंकों (मार्क्स) को लेकर संतुष्ट नहीं होते हैं। ऐसे में बोर्ड ने कॉपियों के Revaluation और दोबारा जांच की प्रक्रिया को बेहद सस्ता और सुलभ बना दिया है।
बोर्ड द्वारा नियमों में किए गए इस बड़े बदलाव के बाद अब कोई भी छात्र महज 100 रुपये की मामूली फीस देकर अपनी पूरी आंसर शीट (उत्तर पुस्तिका) की दोबारा जांच करवा सकता है। CBSE के इस छात्र-हितैषी कदम से उन मेधावी बच्चों को सबसे ज्यादा न्याय मिलेगा, जो प्रतिभावान होने के बावजूद सिर्फ पैसों की तंगी के कारण अपनी कॉपियों की दोबारा जांच नहीं करवा पाते थे।
पहले देने पड़ते थे 700 रुपये
CBSE के पुराने नियमों के मुताबिक, यदि किसी छात्र को लगता था कि उसकी कॉपी ठीक से नहीं जांची गई है और वह अपनी पूरी आंसर शीट को दोबारा चेक करवाना चाहता था, तो उसे प्रति विषय 700 रुपये की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती थी। दो या तीन विषयों में नंबर कम आने पर यह खर्च 2000 रुपये से ऊपर चला जाता था।
मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार के बच्चों के लिए इतनी बड़ी रकम दे पाना मुमकिन नहीं था, जिसके कारण वे चाहकर भी री-चेकिंग के लिए आवेदन नहीं कर पाते थे और कम नंबरों के साथ ही समझौता करने को मजबूर हो जाते थे। लेकिन अब बोर्ड ने इस फीस को 700 रुपये से घटाकर सीधे 100 रुपये कर दिया है। यानी अब छात्रों को प्रति विषय पूरे 600 रुपये की सीधी बचत होगी।
अंकों की गिनती (स्क्रूटनी) की फीस भी हुई बेहद कम
बोर्ड ने न सिर्फ पूरी कॉपी की जांच बल्कि ‘स्क्रूटनी’ (Scrutiny) की प्रक्रिया को भी बेहद किफायती बना दिया है। स्क्रूटनी का मतलब होता है कि यदि किसी छात्र को पूरी कॉपी दोबारा नहीं जंचवानी है, बल्कि सिर्फ यह देखना है कि उसके कुल अंकों को जोड़ने में कोई गलती तो नहीं हुई है, या कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं छूट गया है, तो वह इसके लिए आवेदन कर सकता है।
नया फीस स्ट्रक्चर: पहले स्क्रूटनी यानी अंकों के मिलान के लिए छात्रों से 500 रुपये प्रति विषय लिए जाते थे। CBSE ने इस व्यवस्था में भी बड़ी राहत देते हुए इस फीस को घटाकर अब सिर्फ 100 रुपये कर दिया है।
विशेष प्रश्नों की जांच के नियम भी बदले
इन दो बड़ी राहतों के अलावा, यदि किसी छात्र को पूरी कॉपी या कुल नंबरों के जोड़ पर शक नहीं है, बल्कि सिर्फ कुछ विशेष और चुनिंदा प्रश्नों (Specific Questions) के मूल्यांकन पर संदेह है, तो वह सिर्फ उन्हीं प्रश्नों की दोबारा जांच के लिए भी अपील कर सकता है। पहले इसके लिए अलग से 100 रुपये प्रति प्रश्न के हिसाब से चार्ज देना पड़ता था, लेकिन अब इस पूरी व्यवस्था को भी नए नियमों के तहत बेहद सरल और पारदर्शी बना दिया गया है ताकि छात्रों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
गरीब और मेधावी छात्रों को मिलेगा ‘शिक्षा का अधिकार’
शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने CBSE के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक पैसे की कमी के कारण देश के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के गरीब छात्र अपने अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। कई बार होनहार छात्रों के नंबर भी मानवीय भूल या तकनीकी गड़बड़ी के कारण कम हो जाते थे, जिससे उनका पूरा करियर प्रभावित होता था।
लेकिन अब फीस मात्र 100 रुपये हो जाने से हर वर्ग का छात्र बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी उत्तर पुस्तिका को दोबारा जांचने के लिए आवेदन कर सकेगा। इससे न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि छात्रों का बोर्ड की परीक्षा प्रणाली पर भरोसा भी और ज्यादा मजबूत होगा।
नतीजों में संदेह होने पर तुरंत करें आवेदन
CBSE बोर्ड प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह नियम आगामी सत्र के परिणामों से ही पूरी तरह प्रभावी माना जाएगा। यदि किसी भी छात्र को अपने परीक्षा परिणाम या मिले हुए अंकों पर थोड़ा सा भी संदेह है, तो वह रिजल्ट जारी होने के बाद तय समय सीमा के भीतर CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से इसके लिए आवेदन कर सकता है। बेहद कम खर्च में होने वाली इस री-चेकिंग प्रक्रिया से अब लाखों छात्रों का भविष्य संवरने की उम्मीद जताई जा रही है।