BNT Desk:बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में इस वक्त एक बहुत बड़ी और अभूतपूर्व प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है। विभाग के नए मंत्री दिलीप जायसवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ सीधी और सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई ने पूरी नौकरशाही में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि, इस पूरी खबर और इसके सियासी संदेश को समझने के लिए हमें बिहार की राजनीति और पिछले छह महीनों की उस कहानी को देखना होगा, जहाँ केवल वादे और नारे चल रहे थे, लेकिन जमीनी कार्रवाई नदारद थी।
यह पूरी कहानी बयानों से शुरू होकर अब ठोस नतीजों तक पहुँच चुकी है, जिसने यह साबित कर दिया है कि बिहार सरकार अब भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
विजय सिन्हा का दौर:
नवंबर 2025 में जब विजय कुमार सिन्हा ने बिहार के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने विभाग को सुधारने के लिए बेहद आक्रामक तेवर दिखाए थे। उन्होंने खुले मंच से भूमि माफियाओं को कड़ी चेतावनी दी थी और अधिकारियों को पूरी पारदर्शिता के साथ जमीन सर्वे का काम समय पर पूरा करने का आदेश दिया था।
उनके कार्यकाल में बिहार देश का पहला ऐसा राज्य भी बना जिसने राजस्व प्रशासन की कमियों को दूर करने के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) कमेटी का गठन किया। इतना ही नहीं, जनवरी 2026 में भागलपुर के एक जनसंवाद कार्यक्रम में उन्होंने लोगों का दिल जीतने के लिए मंच से गाना भी गाया था— “छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए दौर में लिखेंगे, मिलकर नई कहानी।”
लेकिन इस फिल्मी अंदाज और बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं दिख रही थी। जब दिसंबर 2025 में सर्किल ऑफिसर्स (CO) एसोसिएशन ने उनके सख्त रवैये के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखा, तो नौकरशाही के दबाव के आगे विभाग की रफ्तार सुस्त पड़ गई। वादे तो थे, लेकिन ठोस नतीजों का अभाव साफ दिख रहा था।
सियासी बदलाव और दिलीप जायसवाल की ‘एंट्री’
अप्रैल 2026 में बिहार की राजनीति ने एक नया मोड़ लिया। एनडीए (NDA) ने प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। इसके बाद मई 2026 में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्रालय की कमान सौंपी गई डॉ. दिलीप जायसवाल को।
पदभार संभालते ही दिलीप जायसवाल ने बिना किसी लाग-लपेट के विभाग की कड़वी सच्चाई को स्वीकार किया। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा:
“यह विभाग लंबे समय से एक ‘अंधेरी कोठरी’ की तरह बदनाम रहा है। यहां कर्मचारियों की समस्याओं और हड़ताल के कारण आम जनता के काम हमेशा ठप पड़े रहते थे। बिहार की 70 फीसदी आबादी इस विभाग पर टिकी है। अब यह सब बदलेगा। गलत करने वाले अधिकारी किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।” — दिलीप जायसवाल, राजस्व मंत्री
मुजफ्फरपुर के भ्रष्ट अधिकारी पर तगड़ा एक्शन
मंत्री दिलीप जायसवाल का यह बयान सिर्फ हवा-हवाई नहीं था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जब राज्य में जमीन सर्वे के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया, तो मुजफ्फरपुर के कुढ़नी के राजस्व अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने सरकारी आदेशों की खुलेआम अनदेखी की। उन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप पहले से थे, और सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट को भी उन्होंने दबाकर रखा था।
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (DM) की शिकायत पर विभाग ने इस बार फाइल को ठंडे बस्ते में नहीं डाला। मंत्री दिलीप जायसवाल के निर्देश पर त्वरित जांच हुई और आरोपी अधिकारी धर्मेंद्र कुमार पर ₹92,500 का भारी जुर्माना ठोक दिया गया। इसके साथ ही उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश जारी कर दिया गया।
विजय सिन्हा बनाम दिलीप जायसवाल:
इस पूरी कार्रवाई के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में पूर्व मंत्री विजय सिन्हा और वर्तमान मंत्री दिलीप जायसवाल के कार्य करने के तरीकों की तुलना होने लगी है:
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विजय सिन्हा ने नीयत दिखाई: उन्होंने माफियाओं को चेताया, जनसंवाद किए, गाने गाए और जिलों का दौरा किया। लेकिन नौकरशाही और अधिकारी संघों के दबाव के आगे वे कोई बड़ा दंडात्मक कदम नहीं उठा सके। उनके दौर में नारे थे, पर नतीजे कम थे।
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दिलीप जायसवाल ने नतीजे दिखाए: उन्होंने आते ही विभाग की बीमारी को पहचाना, उसे ‘अंधेरी कोठरी’ कहा और सीधे भ्रष्ट अधिकारियों पर चाबुक चलाना शुरू कर दिया। उन्होंने यह साबित किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आदेश को हल्के में लेने वालों का क्या अंजाम होता है।
नौकरशाही को मिला कड़ा संदेश
दिलीप जायसवाल के इस कड़े फैसले के बाद बिहार के राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह साफ संदेश चला गया है कि अब सिर्फ भाषणबाजी या काम को लटकाने की नीति नहीं चलेगी। फाइलें अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लापरवाही पर जेब ढीली करनी पड़ रही है, और जो अधिकारी अपनी आदतें नहीं सुधारेंगे, उनके लिए सस्पेंशन और जेल का रास्ता पूरी तरह खुल चुका है।