बिहार: सचिवालय कर्मियों के लिए शुरू हुई इलेक्ट्रॉनिक बस सेवा, परिवहन मंत्री ने दिखाई हरी झंडी

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BNT Desk: देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को लेकर समय-समय पर दिए गए बयानों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। प्रधानमंत्री की इसी अपील को ध्यान में रखते हुए बिहार के परिवहन विभाग ने एक बेहद सराहनीय और पर्यावरण-अनुकूल कदम उठाया है। विभाग की ओर से बिहार सचिवालय के कर्मचारियों (सचिवालय कर्मियों) के लिए विशेष ‘इलेक्ट्रॉनिक बस’ (E-Bus) सेवा की शुरुआत की गई है।

इस नई और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बस सेवा का विधिवत शुभारंभ बिहार सरकार के माननीय मंत्री दामोदर रावत के द्वारा किया गया। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर इस बस को रवाना किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रदूषण मुक्त, आरामदायक और किफायती सफर की सुविधा देना है, ताकि वे अपने निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का रुख कर सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से मिली प्रेरणा

इस खास मौके पर मीडिया से बात करते हुए बिहार सरकार के मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया था कि देश को आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण को बचाने के लिए हमें पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करना होगा।

“प्रधानमंत्री जी ने जिस तरीके से देशवासियों से अपील की थी कि हमें पारंपरिक ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए, उसी से प्रेरणा लेते हुए हमारे परिवहन विभाग ने यह फैसला लिया है। यह इलेक्ट्रॉनिक बस सेवा सचिवालय कर्मियों के लिए एक बड़ी राहत बनेगी और इससे ईंधन की भी भारी बचत होगी।” — दामोदर रावत, मंत्री

पांच प्रमुख बिंदुओं (रूट्स) से होकर गुजरेगी बस

सचिवालय कर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने इस इलेक्ट्रॉनिक बस का रूट चार्ट बेहद योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया है। यह बस शहर के पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं (स्टॉपेज) से होकर गुजरेगी, जहाँ से सबसे अधिक संख्या में सचिवालय कर्मी बस सेवा का लाभ उठा सकते हैं।

इन पांच प्रमुख बिंदुओं से होकर यह बस सीधे सचिवालय परिसर पहुंचेगी। इससे कर्मचारियों को समय पर कार्यालय पहुँचने में मदद मिलेगी और उन्हें ऑटो या निजी वाहनों के लिए होने वाली रोज-रोज की भागदौड़ से मुक्ति मिल जाएगी। विभाग का मानना है कि इन पांचों पॉइंट को जोड़ने से पटना की सड़कों पर गाड़ियों का दबाव और ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम होगी।

सचिवालय कर्मियों को मिलेंगे कई फायदे

बिहार सचिवालय में रोजाना हजारों की संख्या में कर्मचारी और अधिकारी काम करने आते हैं। इनमें से अधिकांश लोग अपनी कार या मोटरसाइकिल से दफ्तर पहुँचते हैं, जिससे न केवल ईंधन का खर्च बढ़ता है बल्कि सचिवालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग की भी बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।

इस ई-बस सेवा के शुरू होने से कर्मचारियों को कई सीधे फायदे मिलेंगे:

  • आर्थिक बचत: रोजाना महंगे पेट्रोल और डीजल पर होने वाला खर्च बचेगा।

  • समय की बचत: बस का रूट और समय निर्धारित होने से कर्मचारी बिना किसी तनाव के समय पर दफ्तर पहुंचेंगे।

  • आरामदायक सफर: ये इलेक्ट्रॉनिक बसें पूरी तरह वातानुकूलित (AC) और शोर-मुक्त होती हैं, जिससे सफर थकाऊ नहीं होगा।

 

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बिहार का बड़ा कदम

आज के समय में बढ़ता प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में परिवहन के क्षेत्र में ‘इलेक्ट्रिक वाहनों’ (EV) को बढ़ावा देना बेहद जरूरी हो गया है। बिहार सरकार द्वारा सचिवालय कर्मियों के लिए शुरू की गई यह ई-बस सेवा इसी ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) का एक हिस्सा है।

इन बसों के चलने से कार्बन उत्सर्जन (धुआं) बिल्कुल शून्य हो जाएगा, जिससे पटना की हवा को साफ और स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह प्रयोग पूरी तरह सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में शहर के अन्य सरकारी कार्यालयों और आम जनता के लिए भी इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक बसों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की जाएगी।

कर्मचारियों में उत्साह की लहर

परिवहन विभाग की इस नई पहल का सचिवालय के कर्मचारियों ने खुले दिल से स्वागत किया है। उद्घाटन के पहले ही दिन बस को देखने और उसमें सफर करने को लेकर कर्मचारियों में खासा उत्साह देखा गया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार का यह कदम बेहद व्यावहारिक है और वे इस सेवा का नियमित रूप से उपयोग करेंगे। इस शुरुआत से यह साफ है कि बिहार सरकार अब विकास के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर भी पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है।

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