सासाराम रेलवे स्टेशन: पटना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में लग गई आग; एक बोगी जलकर खाक, यात्रियों के आक्रोश के बीच जांच में जुटा रेल प्रशासन

BiharNewsAuthor
6 Min Read

BNT Desk: पंडित दीनदयाल उपाध्याय-गयाजी रेल खंड के सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार की सुबह एक बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल बच गया। स्टेशन पर खड़ी एक सवारी गाड़ी में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे पूरी ट्रेन धू-धू कर जलने लगी। सासाराम से आरा होकर पटना जाने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में आग लगने की खबर फैलते ही प्लेटफॉर्म और ट्रेन के भीतर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया। अपनी जान बचाने के लिए यात्री सामान छोड़कर इधर-उधर भागने लगे। घटना सोमवार की सुबह करीब 6:00 बजे की बताई जा रही है, जब स्टेशन पर आम दिनों की तरह यात्रियों की काफी चहल-पहल थी।

धमाके के साथ उठीं आग की लपटें

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 6:00 बजे जब यात्री ट्रेन में सवार हो रहे थे और कुछ अपनी सीटों पर बैठ चुके थे, तभी अचानक एक बोगी से धुएं का गुबार निकलने लगा। देखते ही देखते धुएं ने विकराल रूप ले लिया और आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं।

ट्रेन की बोगी को आग की चपेट में गिरता देख प्लेटफॉर्म पर मौजूद रेल कर्मियों और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। जो यात्री ट्रेन के अंदर थे, वे दरवाजे और खिड़कियों की तरफ भागे। स्टेशन पर अफरातफरी का माहौल कायम हो गया। स्थानीय लोगों और यात्रियों ने तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को दी।

रेलवे प्रबंधन पर लगा लापरवाही का बड़ा आरोप

इस घटना के बाद सासाराम रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की पोल खुलकर सामने आ गई है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों ने रेल प्रबंधन पर नाकामी और घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि अगर रेलवे की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होती, तो ट्रेन को इतना बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सकता था।

यात्रियों ने गुस्से में बताया कि जब ट्रेन में आग लगी, तो उसे शुरुआती स्तर पर बुझाने के लिए स्टेशन पर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं थे। ट्रेन में पानी की रिफिलिंग के लिए जो पाइपलाइन बिछाई गई है, उसमें पानी की एक बूंद तक नहीं थी। हद तो तब हो गई जब आपातकाल के लिए रखे गए रेलवे के अग्निशमन (फायर फाइटिंग) सिलेंडरों को लाया गया, लेकिन वे सभी खाली निकले; उनमें गैस ही नहीं थी।

एक बोगी जलकर खाक, बची बाकी ट्रेन

रेलवे की इस प्रशासनिक नाकामी के कारण शुरुआती कीमती समय बर्बाद हो गया और आग पर काबू नहीं पाया जा सका। नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते आग ने पूरी बोगी को अपनी चपेट में ले लिया और वह धधक उठी। बाद में स्थानीय दमकल विभाग को सूचित किया गया।

“स्टेशन पर न तो पानी की व्यवस्था थी और न ही फायर सिलेंडर काम कर रहे थे। अगर समय रहते पानी और गैस से भरे सिलेंडर मिल जाते, तो आग को एक छोटे से हिस्से में ही रोका जा सकता था। रेलवे की लापरवाही से पूरी बोगी खाक हो गई।” — एक आक्रोशित रेल यात्री

काफी मशक्कत के बाद जब अग्निशमन दल की गाड़ियां पहुँचीं, तब जाकर आग पर काबू पाया गया। सुरक्षा के लिहाज से रेल कर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए प्रभावित बोगी को ट्रेन के बाकी हिस्सों से काटकर अलग किया, जिससे पूरी ट्रेन को जलने से बचा लिया गया। लेकिन तब तक वह बोगी पूरी तरह जलकर लोहा बन चुकी थी।

शॉर्ट सर्किट हो सकती है वजह, जांच शुरू

मामले की जानकारी देते हुए आरपीएफ (RPF) निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि रेल प्रशासन और दमकल कर्मियों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है। स्थिति अब नियंत्रण में है। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट होना सामने आ रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी घटना में किसी भी यात्री को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुँचा है, सभी सुरक्षित हैं। हालांकि, रेल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए घटना के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

भले ही इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन सासाराम के स्थानीय लोगों और आम रेल यात्रियों में रेलवे के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ है। यदि यह घटना स्टेशन के बजाय किसी सुनसान रास्ते या चलती ट्रेन में हुई होती और उस वक्त भी सुरक्षा उपकरण खाली मिलते, तो सैकड़ों यात्रियों की जान जा सकती थी। यात्रियों ने मांग की है कि खाली सिलेंडरों और पानी की कमी के जिम्मेदार दोषी अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

Share This Article