BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना में रहने वाले और लंबे समय से नगर निगम का प्रॉपर्टी टैक्स (संपत्ति कर) नहीं चुकाने वाले हजारों लोगों के लिए एक बेहद जरूरी और चेतावनी भरी खबर है। पटना नगर निगम (PMC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक बकाया टैक्स की वसूली के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सख्त अभियान शुरू कर दिया है।
निगम द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पटना शहर के कुल 63 हजार 816 संपत्तिधारकों पर शिकंजा कसा गया है, जिन पर कुल 65 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। सालों से टैक्स चोरी करने वाले और बार-बार चेतावनी को नजरअंदाज करने वाले इन मकान मालिकों और कमर्शियल बिल्डिंग के मालिकों के खिलाफ अब निगम प्रशासन आर-पार के मूड में आ गया है।
चेतावनी के बाद सीधे होगी ‘कुर्की-जब्ती’ और खातों पर रोक
नगर निगम प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि अब केवल नोटिस भेजने का दौर खत्म हो चुका है। यदि बार-बार दी जा रही चेतावनियों के बाद भी बकायेदार अपना टैक्स जमा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इसके तहत बकायेदारों के बैंक खातों को फ्रीज (जब्त) किया जा सकता है, जिससे वे अपने खातों से पैसों का लेन-देन नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा, नगर निगम अधिनियम के तहत चल-अचल संपत्ति की कुर्की करने और जरूरत पड़ने पर बकायेदार की जमीन या मकान की सरेआम नीलामी करने तक की कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, समाज में बदनामी के डर से टैक्स चुकाने के लिए बड़े बकायेदारों के नाम प्रमुख चौराहों और समाचार पत्रों में सार्वजनिक करने पर भी विचार चल रहा है।
1 लाख से अधिक बकाया वाले 685 ‘बड़े डिफॉल्टर्स’ रडार पर
पटना नगर निगम ने इस महाअभियान के पहले चरण में उन लोगों को विशेष रूप से चिन्हित किया है, जिन पर एक लाख रुपये या उससे अधिक का भारी-भरकम टैक्स बाकी है।
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अंतिम डिमांड नोटिस: शहर भर में ऐसे कुल 685 बड़े बकायेदार मिले हैं, जिन्हें नगर निगम सीधे ‘डिमांड नोटिस’ भेज रहा है।
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अधिकारियों की चेतावनी: निगम अधिकारियों के मुताबिक, यह डिमांड नोटिस इन बकायेदारों के लिए आखिरी मौका (अंतिम चेतावनी) है। अगर नोटिस मिलने के बाद तय समय सीमा के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बिना कोई दूसरा मौका दिए सीधे अदालती और कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किस अंचल (Zone) में कितना है प्रॉपर्टी टैक्स का बकाया?
पटना नगर निगम के अलग-अलग अंचलों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वीआईपी और पॉश इलाका माना जाने वाला नूतन राजधानी अंचल टैक्स न चुकाने में सबसे आगे है। सभी अंचलों की विस्तृत रिपोर्ट नीचे दी गई है:
| अंचल का नाम (Zone) | बकायेदारों की संख्या | कुल बकाया राशि (करोड़ में) |
| नूतन राजधानी अंचल | 11,327 | ₹16.65 करोड़ |
| बांकीपुर अंचल | – | ₹15.13 करोड़ |
| पाटलिपुत्र अंचल | – | ₹14.88 करोड़ |
| कंकड़बाग अंचल | – | ₹08.67 करोड़ |
| अजीमाबाद अंचल | – | ₹07.07 करोड़ |
| पटना सिटी अंचल | – | ₹03.17 करोड़ |
कंट्रोल रूम से फोन कर दी जा रही है चेतावनी
नगर निगम ने केवल बड़े बकायेदारों पर ही नहीं, बल्कि छोटे बकायेदारों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। जिन लोगों पर 5 हजार रुपये से अधिक का टैक्स बकाया है, उनके लिए निगम मुख्यालय में एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। इस कंट्रोल रूम से कर्मचारियों द्वारा सीधे बकायेदारों को फोन (कॉल) कर जल्द से जल्द भुगतान करने की हिदायत दी जा रही है।
भुगतान की सुविधा: जनता की सुविधा के लिए निगम ने ऑनलाइन (वेबसाइट के माध्यम से) और ऑफलाइन (काउंटर पर जाकर) दोनों तरह के डिजिटल और मैनुअल भुगतान माध्यमों को बेहद सरल बना दिया है ताकि लोग आसानी से घर बैठे भी टैक्स भर सकें।
क्यों जरूरी है टैक्स?
निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पटना शहर के भीतर चमचमाती सड़कें, मजबूत नालियां, कचरा प्रबंधन व साफ-सफाई, चौराहों पर स्ट्रीट लाइटें और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए इस टैक्स की राशि का आना बेहद जरूरी है।
जब लोग सालों तक टैक्स नहीं देते हैं, तो शहर के विकास कार्यों के लिए बजट की कमी हो जाती है। निगम प्रशासन ने आम जनता से भावुक और सख्त अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई, कोर्ट-कचहरी और बैंक खाते फ्रीज होने जैसी अप्रिय परेशानियों से बचने के लिए समय रहते पूरी ईमानदारी से अपना प्रॉपर्टी टैक्स जमा करा दें और शहर के विकास में भागीदार बनें।