BNT Desk: बिहार में पिछले कुछ वर्षों में पुलों के लगातार गिरने और धंसने की घटनाओं ने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन हादसों से सबक लेते हुए राज्य सरकार ने पिछले साल राज्य के बड़े और महत्वपूर्ण पुलों का ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट’ (सुरक्षा जांच) कराने का एक बड़ा फैसला लिया था। इस बेहद संवेदनशील और तकनीकी जांच का जिम्मा देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी पटना (IIT Patna) को सौंपा गया था।
अब इस मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आ रहा है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, IIT पटना को राज्य के कुल 85 बड़े पुलों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें से 47 पुलों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर पथ निर्माण विभाग (RCD) को सौंप दी गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विभाग के अधिकारियों के बीच खलबली मच गई है।
IIT पटना की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा:
IIT पटना के विशेषज्ञों द्वारा सौंपी गई इस शुरुआती ऑडिट रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले और डराने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 47 पुलों की जांच पूरी हो चुकी है, उनमें से 9 पुलों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक और जर्जर पाई गई है।
विशेषज्ञों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इन 9 पुलों को तत्काल और शीघ्र मरम्मत (Repairing) की सख्त जरूरत है। यदि समय रहते इन पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कभी भी कोई बड़ी और अप्रिय घटना घट सकती है, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
इन जिलों के पुलों की स्थिति है सबसे ज्यादा खराब
IIT पटना ने अपनी रिपोर्ट में जिन पुलों को खतरनाक और संवेदनशील घोषित किया है, उनका जिलावार विवरण इस प्रकार है:
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मुजफ्फरपुर: जिले में दो पुलों की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। इसमें विशेष रूप से बूढ़ी गंडक नदी पर बने एक महत्वपूर्ण पुल के सुपरस्ट्रक्चर को तुरंत दुरुस्त करने की सलाह दी गई है।
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गया: गयाजी क्षेत्र में कुल तीन पुल बेहद जर्जर स्थिति में पाए गए हैं, जिन पर गाड़ियों का भारी दबाव रहता है।
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लखीसराय: इस जिले के भी दो पुलों की संरचना में तकनीकी कमियां और जर्जरता पाई गई है।
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हाजीपुर (वैशाली): यहाँ के एक पुल को विशेषज्ञों ने अपनी डेंजर लिस्ट (खतरनाक सूची) में शामिल किया है।
सुल्तानगंज-अगवानी घाट पुल हादसे के बाद लिया गया था फैसला
गौरतलब है कि पिछले साल भागलपुर के सुल्तानगंज से खगड़िया के अगवानी घाट के बीच गंगा नदी पर बन रहे महासेतु का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर नदी में गिर गया था। इस हादसे के बाद पूरे देश में बिहार के पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे और विपक्ष ने भी सरकार को चौतरफा घेरने की कोशिश की थी।
फैसले की पृष्ठभूमि: अगवानी घाट पुल हादसे के बाद ही सरकार ने पिछले साल जून के महीने में राज्य के सभी बड़े पुलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। इसके तहत 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले सभी पुलों की सेहत जांचने का जिम्मा आईआईटी पटना को मिला था।
लागू हुई नई मेंटेनेंस पॉलिसी
पुलों की सुरक्षा को हमेशा के लिए पुख्ता करने के लिए बिहार सरकार ने पिछले साल एक नई ‘ब्रिज मेंटेनेंस पॉलिसी’ (पुल रखरखाव नीति) को भी मंजूरी दी थी। इस नई नीति के तहत केवल पुलों का निर्माण ही काफी नहीं होगा, बल्कि समय-समय पर उनका स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा, समय पर मरम्मत होगी और सबसे खास बात यह कि प्रत्येक पुल का एक ‘डिजिटल हेल्थ कार्ड’ तैयार किया जाएगा। इस कार्ड के जरिए कंप्यूटर पर एक क्लिक करते ही पता चल जाएगा कि किस पुल की मरम्मत कब हुई थी और उसकी वर्तमान स्थिति कैसी है।
जल्द सौंपी जाएगी बाकी पुलों की रिपोर्ट
पथ निर्माण विभाग के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, आईआईटी पटना के विशेषज्ञ बाकी बचे हुए पुलों की जांच भी अंतिम चरण में कर रहे हैं। जल्द ही सभी 85 (कुछ सूत्रों के अनुसार 87) पुलों की अंतिम और पूर्ण रिपोर्ट विभाग को सौंप दी जाएगी।
फिलहाल, जो 47 रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं, उनका बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के शीर्ष इंजीनियरों और अधिकारियों द्वारा गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट में दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर खतरनाक पाए गए 9 पुलों की मरम्मत का काम बिना किसी देरी के जल्द ही युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा ताकि आम जनता का सफर सुरक्षित रहे।