सम्राट चौधरी का DM-SP को ‘अल्टीमेटम’: कानून-व्यवस्था पर कोई समझौता नहीं, अब AI से लैस होगी बिहार पुलिस

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BNT Desk: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के बाद राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कड़ा रुख अपना लिया है। गुरुवार को पटना में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) के साथ सीधा संवाद किया। इस बैठक का एकमात्र और स्पष्ट संदेश था— “कानून का राज हर हाल में कायम रहेगा।” इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पटना SSP कार्तिकेय शर्मा और सभी जोन के IG-DIG सहित पुलिस महकमे के आला अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री का ‘गुरुमंत्र’

कार्यशाला का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता अपराध नियंत्रण और न्याय है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि पुलिसिंग ऐसी होनी चाहिए जिससे अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा हो और आम जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने पुलिस और जनता के बीच बेहतर तालमेल और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता लाने की बात कही।

AI और तकनीक

इस कार्यशाला का सबसे दिलचस्प और आधुनिक पहलू रहा— आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा। मुख्यमंत्री ने बदलते समय के साथ पुलिसिंग को भी आधुनिक बनाने पर जोर दिया।

  • अपराध नियंत्रण: डेटा विश्लेषण और AI के जरिए अपराध के पैटर्न को समझने की कोशिश होगी।

  • निगरानी प्रणाली: संवेदनशील इलाकों में AI आधारित कैमरों और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

  • प्रशासनिक सुधार: ‘ज्ञान भारतम’ और ‘एग्री भारत’ जैसे पोर्टल्स के विस्तार के जरिए सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के जरिए तकनीक के उपयोग और स्मार्ट पुलिसिंग के नए मॉडलों को सबके सामने रखा।

जवाबदेही तय

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को ऑफिस से निकलकर फील्ड में समय बिताने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिकायतों का त्वरित निपटारा (Action) ही सरकार की सफलता का पैमाना है। कार्यशाला में मौजूद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी अधिकारियों को अनुशासन और समयबद्ध तरीके से फाइलों के निष्पादन का निर्देश दिया।

बैठक में केवल अपराध ही नहीं, बल्कि जमीन विवाद और मद्य निषेध जैसे मुद्दों पर भी गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से फीडबैक लिया और हर जिले की विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए रणनीति बनाने को कहा।

पुलिस मुख्यालय और जिलों का सीधा जुड़ाव

यह बैठक न केवल व्यक्तिगत रूप से मौजूद अधिकारियों के लिए थी, बल्कि पुलिस मुख्यालय में तैनात वरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस पूरी चर्चा से जुड़े रहे। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सरकार की नीतियों और निर्देशों का पालन नीचे से ऊपर तक एक समान तरीके से हो।

कार्यशाला की झलकियां और अहमियत

पटना के मंच पर एक साथ बिहार के सबसे ताकतवर अधिकारियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में राज्य की व्यवस्था में बड़े बदलाव दिखने वाले हैं। मंच पर सीएम के साथ मुख्य सचिव और सीनियर अफसरों की टीम ने यह साफ कर दिया कि अब प्रशासन ‘एक्शन मोड’ में है। अधिकारियों को सख्त लहजे में अपनी जवाबदेही समझने और जनता के प्रति संवेदनशील रहने को कहा गया है।

विकसित बिहार की नई राह

इस कार्यशाला को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने के लिहाज से एक ‘माइलस्टोन’ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह कदम बिहार में ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का मॉडल विकसित करने की दिशा में एक बड़ी पहल है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस ‘गुरुमंत्र’ के बाद जिलों में पुलिस और प्रशासन का चेहरा कितना बदलता है। लेकिन एक बात साफ है—अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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