BNT Desk: बिहार की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। राज्य में नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के कमान संभालने के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जहां नई सरकार एक्शन मोड में नजर आ रही है, वहीं विपक्ष ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए इसे ‘जनता की नहीं, बल्कि चुनाव के पीछे के खेल की सरकार’ करार दिया है।
‘इलेक्टेड’ नहीं, ‘सिलेक्टेड’ मुख्यमंत्री: तेजस्वी का बड़ा बयान
तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी की नियुक्ति पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ताक पर रख दिया गया है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिसे चुना था, उसे हटाकर एक ‘सिलेक्टेड’ (चयनित) मुख्यमंत्री को कुर्सी पर बिठा दिया गया है। हालांकि, तेजस्वी ने शिष्टाचार निभाते हुए सम्राट चौधरी को औपचारिक बधाई तो दी, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि विपक्ष चुप नहीं बैठने वाला है। उन्होंने कहा कि बधाई अपनी जगह है, लेकिन जनता के प्रति जवाबदेही सबसे ऊपर है।
बिजली, महिला सुरक्षा और विकास पर मांगा जवाब
तेजस्वी यादव ने केवल राजनीतिक हमला ही नहीं किया, बल्कि सरकार के सामने मुद्दों की एक लंबी फेहरिस्त रख दी है। उन्होंने मांग की कि नई सरकार को तुरंत निम्नलिखित विषयों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए:
-
बिजली दरें: बिहार में महंगी बिजली एक बड़ा मुद्दा रही है। तेजस्वी ने पूछा कि क्या नई सरकार जनता को राहत देने के लिए बिजली दरों में कटौती करेगी?
-
महिला सुरक्षा: महिलाओं से जुड़े फैसलों पर स्पष्टता की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि केवल बातें करने से काम नहीं चलेगा, ठोस कदम दिखने चाहिए।
-
आर्थिक रोडमैप: तेजस्वी ने सरकार से पूछा कि बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने के लिए उनके पास क्या योजना है। उन्होंने मांग की कि सरकार एक विस्तृत रोडमैप पेश करे ताकि पता चल सके कि बिहार पिछड़ेपन की बेड़ियों से कब आजाद होगा।
“दिल्ली से चल रही है बिहार सरकार”
तेजस्वी यादव ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के फैसले अब पटना में नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रभाव में लिए जा रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हम जो पहले कहते थे, वही अब सच साबित हो रहा है। बिहार की स्वायत्तता को केंद्र के हाथों गिरवी रख दिया गया है।” शराबबंदी कानून पर मुख्यमंत्री के बयानों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि सरकार को पुरानी कहानियों के बजाय धरातल पर काम करके दिखाना चाहिए।
महिला आरक्षण और ओबीसी कार्ड
आरक्षण के मुद्दे पर तेजस्वी ने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की असली प्राथमिकता महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि संविधान में बदलाव करना है।
“महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों? सरकार की मंशा साफ नहीं है। वे केवल ओबीसी और पिछड़ा वर्ग को गुमराह कर रहे हैं।” – तेजस्वी यादव
उन्होंने ओबीसी वर्ग के आरक्षण को लेकर भी सरकार को घेरा और पूछा कि इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया है। उन्होंने मांग की कि आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए और इसके लिए सरकार की योजना क्या है, यह सार्वजनिक होना चाहिए।