BNT Desk: बिहार की राजधानी पटना के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में एक क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। पटना की सबसे व्यस्त और पुरानी सड़क, अशोक राजपथ पर लगने वाले भीषण जाम से अब मरीजों और उनके परिजनों को हमेशा के लिए मुक्ति मिलने वाली है। पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) को सीधे डबल डेकर फ्लाईओवर से जोड़ने का काम अब अपने अंतिम चरण में है। यह न केवल पटना का, बल्कि बिहार का अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है जहाँ एक प्रमुख अस्पताल को सीधे फ्लाइओवर से ‘कनेक्ट’ किया जा रहा है।
जाम से मुक्ति: पीएमसीएच पहुंचना होगा आसान
अशोक राजपथ पर ट्रैफिक का दबाव किसी से छिपा नहीं है। एम्बुलेंस को अस्पताल के गेट तक पहुँचने में घंटों लग जाते थे, जिससे कई बार मरीजों की जान पर बन आती थी। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार ने गांधी मैदान से साइंस कॉलेज तक बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर में एक विशेष रैंप का प्रावधान किया है।
यह रैंप फ्लाईओवर को सीधे PMCH की नई मल्टी लेवल पार्किंग से जोड़ेगा। इसका मतलब है कि अब गाड़ियों को नीचे की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर जाने की जरूरत नहीं होगी। कार या एम्बुलेंस सीधे फ्लाईओवर से उतरकर अस्पताल परिसर के अंदर दाखिल हो सकेंगी।
क्या है डबल डेकर फ्लाईओवर का गणित?
पटना का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट यातायात को दो स्तरों पर बांट देगा:
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पहला टायर (Level 1): यह कारगिल चौक से साइंस कॉलेज की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए होगा।
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दूसरा टायर (Level 2): यह विपरीत दिशा यानी साइंस कॉलेज से गांधी मैदान की ओर आने वाले वाहनों के लिए होगा।
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सीधा कनेक्शन: इसी फ्लाईओवर से एक डेडिकेटेड रैंप (रास्ता) पीएमसीएच की ओर मुड़ेगा, जो सीधे पार्किंग एरिया में खुलेगा।
मरीजों और तीमारदारों को बड़ी राहत
PMCH न केवल पटना, बल्कि पूरे बिहार का सबसे बड़ा अस्पताल है। यहाँ प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज आते हैं। इस नए रैंप के बन जाने से:
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समय की बचत: एम्बुलेंस बिना किसी बाधा के सीधे इमरजेंसी वार्ड के करीब पहुँच सकेंगी।
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पार्किंग की समस्या खत्म: मल्टी लेवल पार्किंग से सीधा जुड़ाव होने के कारण तीमारदारों को गाड़ी खड़ी करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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कम होगा प्रदूषण: सड़कों पर जाम कम होने से ध्वनि और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी, जो अस्पताल के वातावरण के लिए बेहतर है।
बाकरगंज नाला परियोजना: सुस्त रफ्तार ने बढ़ाई चिंता
जहाँ एक तरफ फ्लाईओवर का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, वहीं बाकरगंज नाला परियोजना की धीमी रफ्तार ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यह प्रोजेक्ट जल निकासी और सड़क चौड़ीकरण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वर्तमान में इसका काम अधूरा पड़ा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि काम धीमा होने के कारण धूल और मलबे से परेशानी हो रही है। अधिकारियों ने निर्माण एजेंसी को चेतावनी दी है कि मानसून आने से पहले काम में तेजी लाई जाए।
पटना की राजनीति और विकास का चेहरा
बिहार में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच, नीतीश कुमार की सरकार इस प्रोजेक्ट को अपने ‘विकास मॉडल’ के रूप में पेश कर रही है। 10 अप्रैल को नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने और 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से संभावित इस्तीफे की चर्चाओं के बीच, इस तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का पूरा होना उनकी विरासत (Legacy) का हिस्सा माना जाएगा। माना जा रहा है कि 18 अप्रैल के बाद बनने वाली नई सरकार इन प्रोजेक्ट्स की निगरानी और तेज करेगी।
सुरक्षा और सावधानी के निर्देश
फ्लाईओवर निर्माण के दौरान अशोक राजपथ पर चलने वाले वाहन चालकों के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:
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डायवर्जन का पालन करें: निर्माण कार्य के कारण समय-समय पर रास्ते बदले जाते हैं, ट्रैफिक पुलिस के संकेतों का पालन करें।
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धूल से बचाव: निर्माण क्षेत्र में धूल अधिक होती है, दोपहिया वाहन चालक मास्क और चश्मे का उपयोग करें।
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भारी वाहनों पर रोक: पीक ऑवर्स के दौरान भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित है, नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना हो सकता है।