BNT Desk: पटना विश्वविद्यालय (PU) के ऐतिहासिक परिसर में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब नए प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन (कला संकाय) के उद्घाटन समारोह के दौरान छात्रों के एक गुट ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री के आगमन से महज 10 मिनट पहले हुए इस हंगामे ने सुरक्षा व्यवस्था और जिला प्रशासन की नींद उड़ा दी। अब इस मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए छात्र संघ के अध्यक्ष समेत कई छात्रों पर मुकदमा दर्ज कराया है।
छात्र संघ अध्यक्ष और 35 अज्ञात पर प्राथमिकी
पीरबहोर थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) प्रखंड पंचायत राज्य पदाधिकारी विरेंद्र चौधरी की ओर से कराई गई है। पुलिस ने कुल 6 छात्रों को नामजद किया है, जिनमें शामिल हैं:
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शांतनू शेखर (अध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ)
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हिंमाशु कुमार
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दीपू कुमार
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एहसानुल्लाह रजा (एकबाल छात्रावास)
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मुख्तार (एकबाल छात्रावास)
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अनुराग
इनके अलावा, 30 से 35 अज्ञात विद्यार्थियों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस वीडियो फुटेज और फोटोग्राफ्स के जरिए अन्य प्रदर्शनकारियों की पहचान करने में जुटी है। आरोप है कि दोपहर करीब 2:50 बजे जब मुख्यमंत्री का आगमन होने वाला था, तब इन छात्रों ने उग्र होकर विधि व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया।
क्यों भड़के छात्र? अपमान और अनदेखी का आरोप
हंगामा कर रहे छात्रों का गुस्सा विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार के प्रति था। छात्रों ने मौके पर तैनात मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनके विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
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आमंत्रण की कमी: छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय के नए भवन के उद्घाटन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में छात्र संघ के निर्वाचित प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया।
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कुलपति की अनदेखी: प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि विश्वविद्यालय के कुलपति को भी उचित सम्मान और आमंत्रण नहीं दिया गया।
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शिलापट्ट विवाद: छात्रों ने नाराजगी जताई कि उद्घाटन के शिलापट्ट पर कुलपति का नाम अंकित नहीं किया गया, जो उनके अनुसार विश्वविद्यालय की गरिमा के खिलाफ है।
मजिस्ट्रेट से धक्का-मुक्की और पुलिस को चोटें
प्राथमिकी के अनुसार, जब तैनात मजिस्ट्रेट और सुरक्षा बलों ने छात्रों को रोकने की कोशिश की, तो वे उग्र हो गए। छात्रों ने नारे लगाते हुए कार्यक्रम में व्यवधान डाला। इस दौरान तैनात मजिस्ट्रेट के साथ धक्का-मुक्की की गई, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हंगामे के समय कुलपति वहीं मौजूद थे और छात्र उन्हीं के समर्थन में नारे लगा रहे थे। प्रशासन का मानना है कि यदि कुलपति चाहते, तो वे छात्रों को समझाकर हंगामा रोक सकते थे।
छात्र संघ की चेतावनी: “यह आवाज दबाने की साजिश”
मुकदमा दर्ज होने के बाद छात्र संघ के पदाधिकारियों में गहरा आक्रोश है।
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अध्यक्ष शांतनू शेखर ने कहा, “मैंने सिर्फ उपमुख्यमंत्री के सामने छात्रों और विश्वविद्यालय के हित की बात रखी थी। यह प्राथमिकी छात्रों के हक की आवाज को दबाने की सोची-समझी साजिश है।”
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उपाध्यक्ष सिफत फैज ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय को जानबूझकर इस आयोजन से दूर रखना अपमानजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि छात्र संघ इस अन्याय के खिलाफ संवैधानिक तरीके से आंदोलन करेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख
इस पूरे विवाद पर पटना विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि उन्हें प्राथमिकी के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उद्घाटन समारोह विश्वविद्यालय का निजी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे सरकार की ओर से आयोजित किया गया था, इसलिए आमंत्रण की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी।
कैंपस में बढ़ता तनाव
फिलहाल पीरबहोर थाना पुलिस वीडियो साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात छात्रों की सूची तैयार कर रही है। दूसरी ओर, छात्र संघ इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताकर बड़े आंदोलन की रणनीति बना रहा है। पटना विश्वविद्यालय का माहौल एक बार फिर गरमा गया है, जिससे आने वाले दिनों में शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने की संभावना है।