BNT Desk: भागलपुर और कोसी-सीमांचल की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु की सेहत को लेकर बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। लगभग 4.7 किलोमीटर लंबे इस महासेतु के तकनीकी विश्लेषण के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पुल के कई हिस्से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। संयुक्त जांच टीम ने सुझाव दिया है कि पुल के दो सबसे कमजोर स्पैन (स्लैब) को पूरी तरह तोड़कर फिर से बनाना अनिवार्य है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी को टाला जा सके।
बीआरओ की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
सीमा सड़क संगठन (BRO) के कर्नल समर्थ गुप्ता के नेतृत्व में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने पुल का गहन निरीक्षण किया। इस जांच रिपोर्ट में सामने आया कि पुल के पूरे ‘सस्पेंडेड स्पैन’ यानी स्लैब सेक्शन में समस्या है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुल के सभी पिलरों की बियरिंग खराब हो चुकी है। बियरिंग का एकतरफा घिसाव पुल की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
क्यों झुक रहा है पुल?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुल के खराब होने के पीछे ओवरलोडिंग और ट्रैफिक का असंतुलन सबसे मुख्य कारण है।
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एकतरफा दबाव: भागलपुर से नवगछिया की ओर जाने वाले भारी वाहनों का वजन ज्यादा होता है, जबकि दूसरी तरफ से आने वाले वाहन तुलनात्मक रूप से हल्के होते हैं।
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झुकाव की समस्या: लगातार एक तरफ अधिक भार पड़ने के कारण पुल का बरारी वाला हिस्सा पूर्व दिशा की ओर झुक गया है।
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खिसकती दीवारें: जांच के दौरान 4-5 जगहों पर साइड वॉल ऊपर-नीचे खिसकी हुई पाई गई है, जो संरचनात्मक कमजोरी का संकेत है।
निर्माण तकनीक पर उठे सवाल:
बीआरओ की टीम ने निरीक्षण के दौरान सेतु के पुराने निर्माण तकनीक पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों ने पाया कि दोनों ओर के स्लैब को टिकाने के लिए केवल 1 से 1.5 फीट की जगह दी गई थी, जबकि इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार यह कम से कम 5 फीट होनी चाहिए थी। इसे निर्माण के समय की एक बड़ी तकनीकी चूक माना जा रहा है, जिसकी वजह से पुल समय से पहले कमजोर हो गया।
मरम्मत की तैयारी:
अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। सरकार को यह तय करना है कि केवल क्षतिग्रस्त स्लैब की मरम्मत कराई जाए या फिर पूरे कमजोर हिस्से का पुनर्निर्माण हो।
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संभावित मॉडल: मरम्मत के लिए ‘बेली ब्रिज’ मॉडल या ‘स्टील पाइल ब्रिज’ तकनीक के उपयोग पर विचार किया जा रहा है।
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BRO की तैयारी: अगर सरकार से मंजूरी मिलती है, तो बीआरओ अगले 2-4 दिनों में काम शुरू कर सकता है। इसके लिए आधुनिक संसाधनों और मशीनों को जुटाने की योजना बनाई गई है।
लाखों लोगों की आवाजाही पर संकट
विक्रमशिला सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख जरिया है। रोजाना लाखों लोग और हजारों मालवाहक वाहन इस पुल से गुजरते हैं। यदि मरम्मत के लिए पुल को बंद किया जाता है या निर्माण कार्य शुरू होता है, तो कोसी और सीमांचल क्षेत्र का संपर्क बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, प्रशासन यातायात को सुचारू रखने और पुल को सुरक्षित बनाने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट स्पष्ट है—देरी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकती है। अब देखना यह है कि बिहार सरकार और पथ निर्माण विभाग कितनी जल्दी और किस तकनीक के साथ इस जीवनरेखा को बचाने का काम शुरू करते हैं।