BNT Desk: शिवहर–लालगढ़ पथ स्थित कतरवा गांव में लंबे समय से सड़क पर जमा पानी अब ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। जलजमाव की समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण जलजमाव वाली सड़क पर ही बैठ गए और ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन गाते हुए सत्याग्रह किया। ग्रामीणों का यह विरोध पूरी तरह गांधीवादी अंदाज में रहा। उनका कहना है कि वे वर्षों से सड़क निर्माण और जलनिकासी की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। सड़क पर पानी जमा रहने से लोगों को रोजाना आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जलजमाव से सड़क बन जाती है तालाब
कतरवा गांव के ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। हल्की बारिश के बाद भी सड़क पर पानी जमा हो जाता है और पूरा रास्ता तालाब जैसा दिखाई देने लगता है। लगातार पानी जमा रहने के कारण पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और अन्य वाहनों से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जलजमाव लंबे समय तक बना रहता है। इससे स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है।
वर्षों से पक्की सड़क की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि कतरवा गांव के इस मार्ग पर पक्की सड़क निर्माण की मांग कोई नई नहीं है। लंबे समय से स्थानीय लोग प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क निर्माण की मांग करते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार समस्या बताने के बावजूद अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई। इसी कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण होने से इलाके के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी और बारिश के समय होने वाली परेशानी भी कम होगी। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर काम शुरू होना चाहिए।
सड़क के साथ नाली और जलनिकासी की भी मांग
ग्रामीणों ने सिर्फ सड़क निर्माण की मांग नहीं की है। उनका कहना है कि सड़क के साथ-साथ समुचित नाली और जलनिकासी की व्यवस्था भी जरूरी है। ग्रामीणों के मुताबिक, अगर केवल सड़क बना दी गई और पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो कुछ समय बाद फिर वही समस्या पैदा हो सकती है। बारिश का पानी सड़क पर जमा होता रहेगा और नई सड़क भी जलजमाव की चपेट में आ जाएगी। इसी वजह से ग्रामीण सड़क निर्माण के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इलाके की भौगोलिक स्थिति और पानी के बहाव को देखते हुए नाली का निर्माण कराया जाना चाहिए, ताकि बारिश का पानी आसानी से बाहर निकल सके।
पानी में बैठकर किया गांधीवादी विरोध
समस्या के खिलाफ ग्रामीणों ने जिस तरह का विरोध किया, उसने लोगों का ध्यान खींचा। ग्रामीण जलजमाव वाली सड़क पर ही बैठ गए और ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन गाते हुए सत्याग्रह किया। इस विरोध के जरिए ग्रामीणों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं। जलजमाव के बीच बैठकर भजन गाने का यह तरीका इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्या का समाधान कराना है।
प्रशासन को आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण और जलनिकासी की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने साफ किया कि वे लंबे समय से समस्या झेल रहे हैं और अब केवल आश्वासन के भरोसे नहीं बैठेंगे। उनका कहना है कि संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कर समस्या की वास्तविक स्थिति समझनी चाहिए और उसके बाद सड़क तथा नाली निर्माण की दिशा में काम शुरू करना चाहिए।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन से उठे कई सवाल
कतरवा गांव में ग्रामीणों के इस अनोखे सत्याग्रह ने सड़क और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किसी भी गांव के विकास की सबसे जरूरी जरूरतों में से एक है। खराब सड़क और जलजमाव के कारण लोगों को रोजाना परेशानी होती है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। यदि उनकी मांगों पर जल्द पहल होती है तो लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सकता है। वहीं, अगर समस्या जस की तस बनी रहती है तो ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। फिलहाल कतरवा गांव में जलजमाव और सड़क निर्माण की मांग को लेकर किया गया यह गांधीवादी सत्याग्रह इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।