BNT Desk: बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए राज्य के 224 राजस्व कर्मचारियों (राजस्व कर्मियों) का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। सरकार का यह फैसला न केवल कर्मचारी संगठनों के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है, बल्कि इससे आम जनता को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों (DMs) को आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि 11 फरवरी 2026 से 19 अप्रैल 2026 के बीच निलंबित किए गए सभी कर्मियों की बहाली प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
पूर्व मंत्री के सख्त आदेश पर फिरा पानी
यह फैसला राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा अपनी ही सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आदेश को पलटना माना जा रहा है।
विजय सिन्हा के कार्यकाल के दौरान, जब राजस्व कर्मी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर गए थे, तब अनुशासनहीनता और काम में बाधा डालने के आरोप में 224 कर्मचारियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया था। तत्कालीन सरकार ने इसे भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही के खिलाफ एक “जीरो टॉलरेंस” कार्रवाई बताया था। हालांकि, सम्राट चौधरी ने कार्यभार संभालने के बाद मामले की गंभीरता को समझते हुए और प्रशासनिक गति को प्राथमिकता देते हुए इस निलंबन को निरस्त करने का निर्देश दिया है।
क्यों जरूरी था यह फैसला? ठप पड़े थे हजारों काम
पिछले ढाई महीनों से राजस्व कर्मियों के निलंबन के कारण बिहार की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले भूमि संबंधी कार्य पूरी तरह ठप पड़े थे। कर्मचारियों की कमी के कारण आम आदमी दर-दर भटकने को मजबूर था। बहाली के इस फैसले के बाद अब निम्नलिखित कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है:
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दाखिल-खारिज (Mutation): जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नाम चढ़वाने के हजारों आवेदन लंबित पड़े थे।
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नामांतरण और रसीद: जमीन की रसीद कटाने और नामांतरण के कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
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जनगणना कार्य: आगामी प्रशासनिक कार्यों और जनगणना संबंधी डेटा जुटाने में इन कर्मियों की अहम भूमिका होती है।
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सरकारी योजनाओं का लाभ: भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र न मिलने के कारण कई किसान सरकारी योजनाओं और बैंक लोन से वंचित हो रहे थे।
प्रशासन का तर्क: “जनता की सुविधा हमारी प्राथमिकता”
सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विभाग के आला अधिकारियों ने कहा कि निलंबन के कारण प्रशासनिक मशीनरी सुस्त पड़ गई थी। “जनता को दफ्तरों के चक्कर काटते देखना सरकार के लिए चिंता का विषय था। हमारा लक्ष्य प्रशासनिक कामकाज को पारदर्शी बनाना और उसे तेज करना है। कर्मचारियों की बहाली से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन फिर से पटरी पर लौट सकेगा।”
हालांकि, सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि बहाली के बाद इन कर्मचारियों के काम की निगरानी की जाएगी ताकि कार्यसंस्कृति में सुधार बना रहे।
कर्मचारी संगठनों में खुशी की लहर
जैसे ही निलंबन वापसी की खबर आई, बिहार राज्य राजस्व कर्मचारी संघ और अन्य कर्मचारी संगठनों ने इसे ‘न्याय की जीत’ बताया। संगठनों का कहना है कि वे सरकार के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं और रुके हुए कामों को अतिरिक्त समय देकर पूरा करेंगे। पटना सहित राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों पर कर्मचारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है।