BNT Desk: मई महीने की शुरुआत देशभर के करोड़ों वाहन चालकों के लिए सुकून भरी खबर लेकर आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जारी भारी उठापटक और वैश्विक तनाव के बीच भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देने का फैसला किया है। देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने साफ कर दिया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब महंगाई को लेकर आम जनता पहले से ही चिंतित है। ईंधन की कीमतों का स्थिर रहना न केवल वाहन मालिकों के लिए, बल्कि माल ढुलाई सस्ती रहने के कारण फल, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को काबू में रखने में भी मददगार साबित होगा।
देश और पटना का ताजा रेट
देशभर के विभिन्न शहरों में तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। बिहार की राजधानी पटना की बात करें तो यहाँ की कीमतें राज्य के अन्य हिस्सों के लिए एक बेंचमार्क की तरह काम करती हैं।
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सामान्य पेट्रोल: पटना में पेट्रोल की कीमत 105.23 रुपये प्रति लीटर पर टिकी हुई है।
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डीजल: डीजल का भाव 91.60 रुपये प्रति लीटर बना हुआ है।
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प्रीमियम पेट्रोल (X-100): शौकीन और हाई-एंड कारों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रीमियम पेट्रोल (X-100) की कीमत काफी ऊंचे स्तर पर है, जो 160 रुपये प्रति लीटर के करीब बिक रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल ईंधन खपत का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा रिटेल ग्राहक (आम जनता) ही इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कीमतों में बदलाव न करना एक बड़ा जनहितकारी कदम माना जा रहा है।
इंटरनेशनल मार्केट में उबाल
एक तरफ भारत में कीमतें स्थिर हैं, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार से अच्छे संकेत नहीं मिल रहे हैं। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
आज के ताजा आंकड़ों के मुताबिक:
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ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): अंतरराष्ट्रीय मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड 111.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
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अमेरिकी क्रूड (WTI): अमेरिकी तेल का भाव भी 105.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह 110 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ना तय है।
तेल कंपनियों पर बढ़ता बोझ
भले ही पेट्रोल पंपों पर कीमतें नहीं बढ़ी हैं, लेकिन इसका खामियाजा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भुगतना पड़ रहा है। वैश्विक बाजार से महंगा तेल खरीदकर घरेलू बाजार में कम दाम पर बेचने के कारण कंपनियों का ‘अंडर रिकवरी’ घाटा बढ़ता जा रहा है।
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार:
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कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 14 रुपये का नुकसान हो रहा है।
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डीजल पर यह घाटा करीब 18 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
यह आर्थिक दबाव लंबी अवधि में चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि कंपनियां लगातार घाटा सहकर अपना परिचालन (Operations) जारी नहीं रख पाएंगी।
कब तक बनी रहेगी यह राहत?
फिलहाल मई की शुरुआत में मिली यह राहत कब तक टिकेगी, यह पूरी तरह से वैश्विक हालातों और सरकार की नीति पर निर्भर करता है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो स्थिति सामान्य बनी रहेगी। हालांकि, यदि क्रूड ऑयल 115-120 डॉलर की तरफ बढ़ता है, तो कंपनियों के पास कीमतों में मामूली बढ़ोतरी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
एक तरफ सरकार और तेल कंपनियां जनता को महंगाई से बचाने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति ही यह तय करेगी कि आपकी गाड़ी का टैंक कितनी कीमत में भरेगा।