BNT Desk: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नीतीश कुमार का पड़ोसी रहने वाला लालू परिवार अब जल्द ही अपना पता बदलने को मजबूर होगा। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को पटना स्थित 10, सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास को 15 दिनों के भीतर खाली करने का सख्त निर्देश दिया है।
20 साल पुराने ठिकाने पर ‘संकट’
यह बंगला पिछले करीब दो दशकों से लालू परिवार के कब्जे में है और साल 2006 से यह उनका मुख्य निवास बना हुआ था। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर यदि आवास खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
नया वैकल्पिक पता
सरकार ने राबड़ी देवी को बेघर नहीं किया है, बल्कि उन्हें वैकल्पिक रूप से 39, हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया गया है।
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पुरानी कोशिशें: इससे पहले 25 नवंबर 2025 को भी आवास खाली करने का आदेश जारी किया गया था।
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शिफ्टिंग की प्रक्रिया: दिसंबर 2025 के अंत में सामान शिफ्ट करने की सुगबुगाहट शुरू हुई थी, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सख्त रुख
2025 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश की राजनीति की तस्वीर बदली है। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों के पालन में अब किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। जैसे ही सम्राट चौधरी ने कमान संभाली, भवन निर्माण विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है।
पूर्व मंत्रियों पर भी गिरी गाज
यह कार्रवाई केवल राबड़ी देवी तक सीमित नहीं है। भवन निर्माण विभाग ने कई अन्य पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी किया है।
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नियम क्या कहता है: पद समाप्त होने के बाद निर्धारित समय के भीतर सेंट्रल पूल के आवास खाली करना अनिवार्य है।
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अंतिम चेतावनी: नोटिस में साफ कहा गया है कि 15 दिनों की मोहलत अंतिम है। इसके बाद मामला सक्षम अधिकारी के पास जाएगा, जहाँ जुर्माना या अन्य प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
सरकारी प्रबंधन और राजनीतिक मायने
विभाग के सूत्रों के अनुसार, यह कदम सरकारी आवासों के बेहतर प्रबंधन और वर्तमान मंत्रियों व पदाधिकारियों को समय पर जगह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता सकता है, वहीं सत्ता पक्ष इसे ‘नियमों का राज’ करार दे रहा है।
क्या तय समय में खाली होगा बंगला?
अब सबकी निगाहें 10, सर्कुलर रोड पर टिकी हैं। क्या लालू परिवार 15 दिनों के भीतर नए आवास में शिफ्ट हो जाएगा या यह मामला फिर से किसी कानूनी या राजनीतिक मोड़ की ओर मुड़ेगा? फिलहाल, प्रशासन ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि अब सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता और नियम ही सर्वोपरि होंगे।